वो हंगामा नहीं, किसानों की आवाज़ थी महामहिम ! | EDITORIAL

Tuesday, February 27, 2018

राकेश दुबे@प्रतिदिन। मध्यप्रदेश विधानसभा में राज्यपाल को अपना अभिभाषण हंगामे के बीच जैसे-तैसे पूरा करना पड़ा। राज्यपाल महोदया, आपने अपने राजनीतिक जीवन में ऐसे कई हंगामे देखे और सुने होंगे।  परन्तु, यह हंगामा अजीब था, राज्यपाल महोदया जब आप अपनी सरकार की किसान हित योजनाओं की तारीफ कर रही थी, प्रदेश के हर जिले का किसान, सरकार को कोस रहा था। प्रतिपक्ष अपने विरोधी तेवर दिखा रहा था। 19 मिनट के भाषण में 10 मिनट तो कोई यह नही समझ सका यह सब उन किसानों के लिए हो रहा है, जिनकी आत्महत्या का आंकड़ा 2016-17 में 2000 से आगे निकल गया है। राज्यपाल महोदय आपकी सरकार का नेतृत्व, अपने को  किसानों का मसीहा कहने वाले कर रहे हैं। 

आपने अख़बार में मंदसौर गोलीकांड की खबर भी पढ़ी होगी, उसके घाव अभी तक ताज़ा हैं। किसानों और किसानी के लिए भूख हड़ताल पर बैठे किसानपुत्र [मुख्यमंत्री] ने विधानसभा के अभिभाषण की ब्रीफिंग में आपको यह तो बताया होगा कि “आपकी सरकार इस गोली कांड में बरखेडा पन्त के अभिषेक पाटीदार के किसी परिवारजन को 14 जून 2017 से आज तक नौकरी नहीं दे पाई है और न गोली चलाने वाले पुलिसकर्मीयों पर मुकदमा ही दर्ज कर पाई है।

आपकी यह सरकार 14 वर्ष से है, मध्यप्रदेश क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार पिछले 15 वर्ष में राज्य में 18000 हजार किसान आत्महत्या कर चुके हैं। फरवरी 2016 से फरवरी 2017 के बीच किसान और किसानी से जिन्दगी बसर करने वाले खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या का आंकड़ा 2000 से आगे निकल गया है। राज्य में 2013-14 को छोड़ दें तो पिछले 15 साल में हर साल सामान्य से कम वर्षा हुई है। पिछले एक वर्ष में किसान महीने में 2 बार के औसत से, 25 बार सडक पर उतर चुके हैं। मंदसौर गोली कांड के बाद से अबतक कोई 160 किसान आत्महत्या कर चुके हैं और 27 आत्महत्या के प्रयास कर चुके हैं। किसान संगठनों की बात माने तो 12 बरस पहले प्रदेश के किसानों पर 2000 करोड़ का कर्ज था आज यह बढकर 44000 करोड़ हो गया है।

विधानसभा में हंगामा कर रहे प्रतिपक्ष और अंदर ही अंदर इस विषय को लेकर कसमसा रहे 202 विधायकों को किसान और किसानी पर जिन्दगी चलाते ग्रामीण वोटर ही चुनते है। प्रतिपक्ष रोष निकाल रहा है, शेष मन ही मन उबल रहे हैं। आपकी सरकार के खजाने का 77 प्रतिशत हिस्सा कृषि से होने वाली आय का है। 66 प्रतिशत किसान कर्ज लेकर खेती करते हैं। कैसे और कहाँ चल रही है किसान कल्याण योजना? आपकी सरकार तो प्याज तक ढंग से खरीद और सुरक्षित नहीं रख सकी है। कल का हंगामा किसान की आवाज़ थी, जो सदन में शोर-शराबा कही गई, समाज में इसे शाप और बद्दुआ कहा जा रहा है। कहिये ! आप  ही  कुछ, अपनी सरकार से किसानों के हित में।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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