दावोस में पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण की खास बातें | NATIONAL NEWS

Tuesday, January 23, 2018

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दावोस में सजे विश्व आर्थिक मंच से पूरी दुनिया को संदेश दिया. अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय ग्रंथों में हजारों साल पहले लिखे वसुदेव कुटंबकम के सिद्धांत को आज पूरी दुनिया को जरूरत है. वैश्विक आर्थिक विकास का फायदा पूरे समाज को पहुंचाने के लिए जरूरी है कि इस सिद्धांत पर दुनिया के सभी देश एक दूसरे को एक परिवार की तरह लेकर आगे चलें. जानें प्रधानमंत्री के स्पीच की 15 खास बातें:

1. प्रधानमंत्री ने कहा कि दावोस में भारत की शुरुआत 1997 में हुई थी जह तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा दावोस पहुंचे थे. तब से लेकर अब तक भारत की जीडीपी 6 गुना हो चुकी है. उस वक्त इस मंच का स्लोगन था बिल्डिंग दि नेटवर्क सोसाइटी. आज हम सिर्फ नेटवर्क सोसाइटी ही नहीं बल्कि बिग डेटा, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के युग में जी रहे हैं.
2. आज दो दशकों के बाद हमारा समाज एक जटिल नेटवर्क से बंधा है, उस वक्त भी दावोस अपने समय से आगे था और आज भी वह आगे है. इस वर्ष क्रिएटिंग अ शेयर्ड वर्ल्ड इसका थीम है.

3. मौजूदा समय में डेटा के बड़े पहाड़ तैयार हैं और उनके नियंत्रण की कोशिशें की जा रही है. माना जा रहा है कि जिसके पास डेटा का अधिकार होगा वहीं दुनिया के शीर्ष पर काबिज होगा.
4. विज्ञान, तकनीकि और आर्थिक तरक्की के नए आयामों में समाज को आगे बढ़ाने का दम है लेकिन इससे मानवता को बांटने का काम भी किया है. इससे शांति और समृद्धि का संतुलन भी बिगड़ गया है.
5. गरीबी, बरोजगारी और प्राकृतिक संसाधनों के नियंत्रण की समस्या से पूरी दुनिया जूझ रही है. हमें सोचना है कि क्या हमारी अर्थव्यवस्था समाज में दरारों को तरजीह तो नहीं दे रही है.

6. हजारों साल पहले संस्कृति में लिखे ग्रंथों में भारतीय चिंतकों ने लिखा है कि वसुधैव कुटुंबकम यानी पूरी दुनिया एक परिवार है. लिहाजा हम सब एक ही परिवार की तरह बंधे हुए हैं. हमें एक साझा सूत्र जोड़ती हैं. आज दुनिया में दरारों और दूरियों को मिटाने में वसुधैव कुटुंबकम की सोच बेहद कारगर है.
7. पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया के सामने क्लाइमेट चेंज की बड़ी चुनौती है और हम इससे लड़ने के लिए अभीतक एकजुट होकर प्रयास नहीं कर पा रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि जब दुनिया के सामने कोई साझा चुनौती आए तो सभी को एकजुट होकर उनका सामना करने की जरूरत है.

8. भारतीय परंपरा में प्रकृति के साथ गहरा रिश्ता है. हजारों साल पहले भारत में मानव मात्र को भूमि माता पुत्रो अहम पुत्र यानी हम सभी पृथ्वी की संतान हैं. यदि ऐसा है तो आज हम पृथ्वि की संतानों में युद्ध क्यों चल रहा है?
9. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद है. आतंकवाद से दुनिया की सभी सरकारें परिचित हैं. इनके दो आयामों पर पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद जितना खतरनाक है उससे भी अधिक खतरनाक है गुड टैरेरिस्ट और बैड टैरेरिस्ट के बीच भेद.

10. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आंतकवाद की चुनौतियों में दुनिया के सामने सबसे गंभीर मसला है कि दुनियाभर में पढ़ें-लिखे लोग आतंकवाद का रास्ता चुन रहे हैं. इस चुनौती से निपटने के लिए बेहद जरूरी है कि दुनियाभर के देशों को एकजुट होकर आर्थिक नीतियों के सहारे सभी वर्गों को मुख्यधारा में लाएं.

11. ग्लोबलाइजेशन की चमक धीरे-धीरे कम हो रही है. संयुक्त राष्ट्र अभी भी मान्य है लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने संगठन क्या आज के मानव की आकांक्षाओं को परिलक्क्षित करते हैं?  ग्लोबलाइजेशन के प्रवाह का रुख बदला जाए. द्वपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार समझौते रुक चुके हैं.

12. भारत में रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म की नीतियों पर चलने की कोशिश की जा रही है. इसी का नतीजा है कि भारत में निवेश करना, कारोबार करना, टूरिज्म के लिए जाना इत्यादि पहले की तुलना में बहुत आसान हो चुका है.

13. पीएम मोदी ने कहा कि भारत में रेड टेप हटाकर रेड कार्पेट बिछाया जा रहा है. ज्यादातर क्षेत्रों में ऑटोमैटिक रूट के जरिए विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी गई है. भारत में बीते तीन साल के अंदर सैकड़ों पुराने और बेकार हो चुके कानून को हटाने का काम किया है. देश में पार्दर्शिता को बढ़ाने के लिए देश में जीएसटी को भी लागू किया गया है.

14. भारत के लोग और भारत के युवा 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के निर्माण में सक्रिय हैं. इनोवेशन के जरिए वह जॉब सीकर नहीं जॉब गिवर बनेंगे. पीएम मोदी ने कहा कि भारत की रैंकिंग और रेटिंग में हुए सुधार से दुनिया परिचित है. देश में स्वेच्छा से सब्सिडी का त्याग किया है. ऐसे अनेक प्रमाण भारत की आर्थिक विकास की गाथा सुनाता है.

15. विश्व की बड़ी ताकतों के बीच सहयोग के संबंध हो. साथ ही उनके बीच प्रतिस्पर्धा कहीं दीवार बनकर नहीं खड़ी होनी चाहिए. दूसरी जरूरत है कि नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना पहले से ज्यादा जरूरी हैं. पीएम ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सुधार तुरंत किया जाना चाहिए. साथ ही विश्व की आर्थिक प्रगति में और तेजी लाने की जरूरत है.

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