राहुल गांधी का टेंपल रन के साथ अब 'डाउन टू अर्थ' केंपन | NATIONAL NEWS

31 January 2018

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पीएम नरेंद्र मोदी के इतर एक नई लाइन खींचने में लगे हैं। यदि वो सफल रहे तो आने वाले कुछ ही दिनों में आपको राजनीति में 2 नए वर्ग स्पष्ट दिखाई देने लगेंगे। एक जो धमकी देता है और दूसरों की निंदा करता रहता है और दूसरा जो प्यार भरी बातें करता है, लोगों की मदद करता है और नफरत की राजनीति के खिलाफ है। गुजरात चुनाव में राहुल गांधी के टेेंपल रन ने भाजपा के पसीने छुड़ा दिए थे। अब राहुल गांधी इसके साथ एक नया केंपन ले आए हैं। हम इसे 'डाउन टू अर्थ केंपन' नाम देते हैं। इसके तहत राहुल गांधी खुद को एक आम एवं मददगार नागरिक के तौर पर प्रस्तुत कर रहे हैं। 

पिछले दिनों में इसे लेकर एक साथ 3 घटनाएं हुईं हैं। ताजा घटनाक्रम में कांग्रेस के दिग्गज नेता को फ्लाइट में को-पैसेंजर की मदद करते हुए देखा गया। सोशल मीडिया पर राहुल की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें वे फ्लाइट में एक यात्री का लगेज उठाने में मदद कर रहे हैं।राहुल गांधी की यह तस्वीरें दिल्ली से गुवाहाटी जा रही फ्लाइट की हैं। कांग्रेस अध्यक्ष यहां किसी आम शख्स की तरह साथी पैसेंजर का सामान उठाकर रखते हुए दिखाई देते हैं। इस दौरान फ्लाइट में कुछ पैसेंजर्स ने राहुल गांधी के साथ सेल्फी भी क्लिक की, जिसे ट्विटर पर शेयर किया। सोशल मीडिया पर यूजर्स उन्हें 'डाउन टू अर्थ' तो कोई 'मैन विद गोल्डन हार्ट' कह रहा है।

6वीं कतार में बैठे, बस की कतार में खड़े हुए
गौरतलब है कि 26 जनवरी पर दिल्ली में राजपथ पर हुए प्रोग्राम में विपक्षी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष को 6वीं कतार में बैठने की जगह दी गई थी। इसके पीछे रणनीति क्या थी यह तो आयोजक ही जानें परंतु राहुल गांधी ने इस अवसर का भरपूर लाभ उठाया। वो 6वीं कतार में भीड़ के साथ बैठे नजर आए। इसी व्यवहार के चलते सोशल मीडिया पर लोगों ने राहुल गांधी की काफी सराहना की। इससे पहले भी वे एयरपोर्ट पर फ्लाइट तक ले जाने वाली बस में चढ़ने के लिए कतार में खड़े नजर आए थे। 

नफरत फैलाने वाली भीड़ के खिलाफ प्यार लुटाने वाली भीड़
देखना रोचक होगा कि क्या राहुल गांधी का यह अभियान भारत में धमकी देने वाली और हिंसा का समर्थन करने वाली भीड़ के खिलाफ मदद करने वाली और प्यार लुटाने वाली भीड़ खड़ी कर पाएगा। यदि ऐसा हुआ तो यह भाजपा के खिलाफ एक बड़ा और प्रभावी अभियान माना जाएगा। बता दें कि सत्ता में होने के बावजूद भाजपा नेता ना केवल अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं बल्कि खुद को सही साबित करने के लिए कुतर्क भी करते हैं और कभी देशभक्ति तो कभी किसी के सम्मान के नाम पर किसी ना किसी का विरोध करते रहते हैं। फिल्म पद्मावत का विरोध ऐसा ही था। केंद्र से लेकर राजस्थान और महाराष्ट्र तक भाजपा की सरकारें थीं, फिर भी ना तो फिल्म की शूटिंग रोकी ना सेंसर बोर्ड को रोका। संजय लीला भंसाली के खिलाफ बयानबाजी चलती रही। 

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