सेंधवा चुनाव कांड: अरुण यादव की भूमिका संदिग्ध, इज्जत बचाने जारी किया बयान | MP NEWS

Monday, January 8, 2018

भोपाल। बड़वानी जिले की सेंधवा नगर पालिका में शर्मनाक शिकस्त के बाद अब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अब जबकि मामला मीडिया की सुर्खियों में आ गया तो यादव ने एक बयान जारी करके अपना सम्मान बचाने की कोशिश की है। बता दें कि यहां भाजपा ने एक फरार हत्यारोपी संजय यादव की मां को प्रत्याशी बनाया था। कहा जा रहा है कि संजय यादव की दहशत के कारण 6 प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस ले लिए, इसमें कांग्रेस के 2 प्रत्याशी भी शामिल थे। प्रदेश अध्यक्ष यादव पर दाग यह लगा है कि वो सेंधवा में अपना प्रत्याशी तक नहीं उतार पाए वो भी तब जबकि बड़वानी अरुण यादव का प्रभाव वाला जिला है और अरुण यादव सीएम कैंडिडेट बनने की जुगत लगा रहे हैं। 

कांग्रेस पर दाग क्यों
इस मामले में कांग्रेस पर दाग इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि कांग्रेस की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट में भी स्पष्ट हो गया था कि भाजपा की तरफ से फरार हत्यारोपी संजय यादव के परिवार से किसी को प्रत्याशी बनाया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी को यह पहले से ही पता था। बावजूद इसके कांग्रेस ने अपनी कोई तैयारी नहीं की। वो पूरे क्षेत्र में एक भी नेता को नहीं तलाश पाई जो संजय यादव के खिलाफ चुनाव लड़ पाता। संजय यादव की दहशत केवल स्थानीय नेताओं और प्रत्याशियों पर ही दिखाई नहीं दी, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव पर भी दिखाई दी। उन्होंने चुनाव आयोग से इस संदर्भ में एक अदद शिकायत तक नहीं की। एक तरह से अरुण यादव ने भाजपा प्रत्याशी को वॉकओवर दे दिया। 

अब क्या कहते हैं अरुण यादव
अब जबकि नाम वापसी की तारीख भी निकल गई और सेंधवा में अध्यक्ष समेत 10 वार्डों में भाजपा के प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित होने की स्थिति में आ गए। प्रदेश भर की मीडिया ने कांग्रेस पर सवाल उठा दिए तब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री अरूण यादव ने एक अदद बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने भाजपा को निशाना बनाते हुए कहा है कि भाजपा कुख्यात अपराधियों व हिस्ट्रीशीटरों के परिजनों को प्रत्याशी बनाकर प्रदेश में राजनैतिक आतंकवाद परोस रही है।

अरुण यादव की भूमिका संदिग्ध
सेंधवा मामले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव की भूमिका संदेह की जद में आ रही है। यादव का यह बयान उस समय आना चाहिए था जब भाजपा ने अपना प्रत्याशी घोषित किया था परंतु यादव ने सेंधवा में संघर्ष की योजना ही नहीं बनाई। 2 ऐसे स्थानीय नेताओं को टिकट दिया जो संजय यादव की दहशत मेें थे। भूमिका इसलिए भी संदिग्ध मानी जा रही है क्योंकि संजय यादव पहले कांग्रेस से पार्षद था एवं अरुण यादव के संपर्क में था।

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