विश्वविद्यालयीन शिक्षकों को सातवाँ वेतनमान स​मिति गठित | EMPLOYEE NEWS

Monday, January 8, 2018

भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य शासन ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत मध्यप्रदेश के शासकीय एवं विश्वविद्यालयीन शिक्षकों को सातवाँ वेतनमान दिये जाने के संबंध में अपर संचालक, उच्च शिक्षा डॉ. जगदीश चन्द्र जाटिया के संयोजन में एक समिति का गठन किया है। श्री नीरज मंडलोई वि.क.अ. सह आयुक्त उच्च शिक्षा ने जानकारी दी है कि यह समिति प्रदेश के शासकीय एवं अनुदान प्राप्त महाविद्यालयीन शिक्षकों के साथ-साथ विश्वविद्यालयीन शिक्षकों के लिये सातवाँ यूजीसी वेतनमान लागू करने के संबंध में नियम एवं नीति बनायेगी। समिति की पहली बैठक 9 जनवरी को सुबह 11.30 बजे कार्यालय आयुक्त, उच्च शिक्षा संचालनालय में आहूत की गयी है।

स्कूली बच्चों की परिवहन व्यवस्था सुधारें: शिवराज सिंह 
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्कूली बच्चों की परिवहन व्यवस्था सुधारने के लिये अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा है कि विद्यार्थियों के परिवहन में लगे वाहन निर्धारित मानदण्डों के अनुरूप होना सुनिश्चित किया जाये। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि 15 साल से अधिक पुरानी बसें स्कूलों में नहीं चलेंगी। साथ ही इन वाहनों की जाँच के लिये ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर स्थापित किये जायें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज यहाँ स्टेट हेंगर में संबंधित अधिकारियों की आपात बैठक ली। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों के परिवहन के लिये उपयोग की जाने वाली बसों की अधिकतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित करने के निर्देश तत्काल जारी किये जायें। ऑटोमैटिक फिटनेस सेन्टर स्थापित किये जायें, जिनमें बस सीधे अंदर जायेगी और फिटनेस की जांच ऑटोमैटिक तरीके से होगी। स्कूली बसों की स्पीड भी अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। यदि ज्यादा गति पायी जाती है तो बस चालक के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।

इसके अलावा स्पीड गर्वनर और जीपीएस की क्वालिटी में सुधार के लिये एक केन्द्रीयकृत डाटा सेन्टर बनाने का भी निर्णय लिया गया है। इस सेन्टर के माध्यम से बसों की लोकेशन और स्पीड का अनुमान लगाया जा सकेगा कि कौन सी बस स्पीड से ज्यादा चल रही है। इससे बसों की स्पीड कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। श्री चौहान ने कहा कि परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस विभाग के अधिकारियों के माध्यम से भी नियमित रूप से शैक्षणिक संस्थानों में उपयोग होने वाले वाहनों के मापदण्डों के अनुरूप होने की जांच सुनिश्चित की जाये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूली बच्चों के परिवहन में उपयोग किये जाने वाले वाहनों को मापदण्डों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिये पालकों की सहभागिता हेतु उनकी शैक्षणिक संस्था के स्तर पर समिति गठित की जाये। इस व्यवस्था को सुनिश्चित कराने के लिये जिला स्तर पर जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक व क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी तथा अनुभाग स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तथा अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) की भी समिति गठित की जाये।

श्री चौहान ने कहा कि ऑटोमेटिक ड्रायविंग टेस्ट ट्रेक्स बनाये जायें। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये वाहनों की क्षमता के दृष्टिगत अधिकतम बच्चों की संख्या निर्धारित की जाकर उसका पालन सुनिश्चित किया जाये। साथ ही बसों में सीट बेल्ट लगाये जाने की व्यवस्था के लिये समस्त शैक्षणिक संस्थाओं को समझाईश दी जाये। इन निर्देशों का पालन नहीं करने वाली शालाओं की मान्यता तत्काल निरस्त करने हेतु कार्यवाही की जाये। सी.बी.एस.ई/आई.सी.एस.ई. अथवा अन्य बोर्ड से संबंधित शालाओं द्वारा यदि स्कूल बसों की सुरक्षा से संबंधित उपर्युक्त निर्देशों का पालन नहीं करने पर उनकी संबद्धता के लिये राज्य शासन द्वारा जारी किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की कार्यवाही की जाये।

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