बीस भुजा देवी: जो 20 भुजाएं गिन ले, उसके सारे मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं

Thursday, September 21, 2017

भोपाल शहर से लगभग दौ किलोमीटर दूर गुना जिला मुख्यालय से 8 किमी दूर बजरंगगढ़ की ऊंची पहाड़ी पर बीस भुजा देवी का प्यारा दरबार सजा है। पहाड़ों पर विराजीं मां बीसभुजा देवी मंदिर पर गुरुवार से नौ दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम शुरू होंगे। मां बीसभुजा की महिमा है कि मां बीसभुजा भक्तों को तीन रूप में दर्शन देती हैं। सुबह कन्या, दोपहर में युवा और संध्या के समय प्रौढ़ (वृद्धा) के रूप में नजर आती हैं। ऐसी मान्यता है माँ की बीस भुजा है। मां बीसभुजा की 20 भुजाओं वाली प्रतिमा की आज तक कोई पूरी 20 भुजा नहीं गिन सका है।

जिस भक्त पर माँ की कृपा होती है, उसी को बीसों भुजा गिनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। शारदीय नवरात्र और चैत्र नवरात्र में पड़ने वाले दुर्गा अष्टमी के दौरान इस मंदिर में परंपरागत धार्मिक संस्कार और मेले का आयोजन किया जाता है। मंदिर परिसर में लगने वाला यह मेला 9 दिन तक चलता है। इतना ही नहीं, साल के इस समय में यहां विशेष पूजा और अभिषेक का आयोजन भी किया जाता है। दुर्गा अष्टमी के मौके पर आयोजित होने वाले इस मेले के दौरान यहां पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा हो जाता है

उन्होंने बताया कि मां बीसभुजा देवी मंदिर अति प्राचीन हैं। इस मंदिर की किसी के द्वारा स्थापना नहीं की गई है। सैकड़ों वर्ष पहले बांस के वृक्षों से देवी की प्रतिमा प्रकट हुईं। यह मंदिर एक छोटी सी पहाड़ी की चोटी पर बना है। मंदिर में दुर्गा की 20 हाथों वाली प्रतिमा स्थापित है। यहां तीन विशाल दीप स्तंभ है, जिन पर नवरात्रियों के समय सैकड़ो दीपक जलाये जाते है दूर से यह ‘दीप स्तंभ’ बेहद खूबसूरत दिखाई देते है मंदिर के चारो ओर छोटी छोटी और भी पहाड़िया है जिससे यह स्थान बारिश के मौसम में बेहद खूबसूरत लगने लगता है, मंदिर के थोड़ी ही दूर से गुजरती हुई नदी इस स्थल को और भी सुन्दर बना देती है पहले माँ बीस भुजा देवी एक छोटे से मंदिर में स्थापित थी। धीरे-धीरे जीर्णोद्वार करते हुए भव्य मंदिर का निर्माणकराया गया। 

सिद्धदेवी स्थल के समीप ही हनुमान मंदिर है, इस कारण यह तपोस्थली भी है। यहां कई संतों ने तपस्या की है। मान्यता है प्रसिद्ध बीसभुजा देवी मंदिर की प्रसिद्धि के चलते कई भक्त अपनी अनेक मनोकामना लेकर आते हैं और उनकी प्रार्थना मां के द्वारा पूरी की जाती है।

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