INDIA को दो बड़े खतरे आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन

Tuesday, August 8, 2017

राकेश दुबे@प्रतिदिन। अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान ‘प्यू’ की नई स्टडी के अनुसार आज की तारीख में  जलवायु परिवर्तन और आई एस आई एस विश्व में सबसे बड़े खतरे के रूप में उभरकर आए हैं। 38 देशों में किए गए सर्वेक्षण में सभी मुल्कों ने इन्हें अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। अलग-अलग इलाकों के हिसाब से इन दोनों में से कुछ को ज्यादा तो कुछ को कम खतरनाक बताया गया। जैसे यूरोप, मध्यपूर्व, एशिया और अमेरिका के लोगों ने आईएसआईएस को सबसे बड़ा संकट बताया, तो लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के देशों ने जलवायु परिवर्तन को सबसे बड़ा संकट माना। भारतीय इन दोनों को ही सबसे बड़ा संकट मानते हैं। इनके बाद वे चीन को खतरे के रूप में देखते हैं।

अध्ययन में शामिल दुनिया के दूसरे देशों के लोगों ने भी चीन के बढ़ते प्रभाव को खतरा माना है। साउथ कोरिया में 83 फीसदी और वियतनाम में 80 फीसदी लोगों ने चीन को बड़ा खतरा माना है। साइबर हमले को भी कई देशों ने खतरा माना है। यह अध्ययन आज के विश्व के मिजाज को सामने लाता है। सचाई यह है कि पिछले कुछ समय से दुनिया लगातार बड़े आतंकी हमले झेल रही है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2015 के मुताबिक़ साल 2014 में दुनिया में 13,463 आतंकवादी वारदातें हुई जो पिछले वर्ष से 35 फीसदी अधिक थीं। इन दुर्भाग्यपूर्ण हमलों में जो लोग मारे गए, उनमे 78 फीसदी इराक, नाइजीरिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और सीरिया के थे। हाल तक यह लग रहा था कि आईएसआईएस के आगे पूरी दुनिया असहाय हो चुकी है। हालांकि अब उसकी कमर तोड़ दी गई है, लेकिन अनेक देशों में उसका जाल अब भी फैला हुआ है। इस संगठन के अलावा और भी कई ग्रुप अलग-अलग मुल्कों में सक्रिय हैं।

आतंकवाद का खतरा बरकरार है। इसके अलावा दुनिया के लोग महसूस कर रहे हैं कि किस तरह जलवायु परिवर्तन ने उनके जीवन पर गहरा असर डाला है। अनेक वैज्ञानिकों ने जिस तरह की आशंकाएं व्यक्त की हैं, उससे लोग चिंतित हैं। आज मौसम का मिजाज काफी बदल गया है। कहीं रिकॉर्ड बारिश हो रही है तो कहीं भयंकर सूखा पड़ रहा है। उत्तरी अमेरिका,उत्तरी यूरोप और उत्तरी एशिया के कुछ हिस्सों में बारिश बढ़ रही है जबकि भूमध्य और दक्षिण अफ्रीका में सूखे की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उच्चतम तापमान में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं, गर्म दिनों की संख्या बढ़ती जा रही है जबकि ठंडे दिन और ठंडी रातें बहुत कम हो गई हैं। जिन लोगों ने इसके दुष्परिणामों को अभी प्रत्यक्ष रूप से महसूस नहीं किया है, वे भी इस खतरे को बखूबी समझ रहे हैं। यह सर्वेक्षण दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों को आईना दिखाता है। उन्हें आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे के खिलाफ साझा अभियान को और तेज करना होगा।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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