लीजिए शुरू हो गई GST की चोरी, दूध और घी को अलग-अलग कर दिया, 12% GST जेब में

इंदौर। जीएसटी को लागू हुए अभी एक महीना ही हुआ है और कारोबारियों ने जीएसटी की चोरी का रास्ता निकाल लिया। ये टैक्स चोरी डेयरी संचालक कर रहे हैं। संचालकों ने बड़ी ही सफाई के साथ दूध और घी के लिए अलग अलग फर्म बना लीं। दूध जीएसटी मुक्त है अत: रजिस्ट्रेशन की जरूरत ही नहीं। अब केवल घी के कारोबार का रजिस्ट्रेशन कराया। कारोबार घटकर 20 लाख से कम हो गया। ग्राहकों से जीएसटी की वसूली धड़ल्ले से की जा रही है। दुकानों पर नोट लगा दिया है 'देशहित में जीएसटी का भुगतान करें' और 20 लाख से कम कारोबार होने के कारण सरकार को टैक्स का भुगतान करने की जरूरत ही नहीं है। हो गया ना डबल मुनाफा। 

1 जुलाई से लागू जीएसटी में घी पर 12 प्रतिशत दर से टैक्स लगाया गया है, जबकि दूध को टैक्स फ्री श्रेणी में रखा गया है। जीएसटी के साथ ही बाजार में घी की कीमतें 20 से 40 रुपए प्रति किलो तक बढ़ गई हैं। यह बढ़ोतरी पैक्ड सहित खुले में बेच रहे डेयरी वालों ने भी की है। जबकि दूध को टैक्स फ्री का हवाला देते हुए डेयरी वाले न तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन ले रहे हैं, न सरकार को टैक्स चुका रहे हैं।

रजिस्ट्रेशन तो सबको लेना होगा
वरिष्ठ कर सलाहकार आरएस गोयल के मुताबिक जीएसटी में ऐसे व्यापारियों को रजिस्ट्रेशन से छूट है, जो सिर्फ टैक्समुक्त वस्तुओं का व्यापार कर रहे हैं। दूध इसमें शामिल हैं, इसलिए डेयरी वाले रजिस्ट्रेशन नहीं ले रहे। हालांकि व्यापारी जीएसटी में आने वाली एक भी वस्तु बेचता है तो उसे रजिस्ट्रेशन लेना पड़ेगा। उसके टर्नओवर की गणना में टैक्स फ्री और टैक्स वाली दोनों वस्तुओं का कारोबार शामिल होगा। इस तरह दूध वाला घी बेच रहा है तो उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन लेकर कर चुकाना होगा।

फॉर्मूले में फायदा
डेयरी वालों ने रजिस्ट्रेशन लेना तो दूर, जीएसटी से बचने के लिए दूध का कारोबार करने वाली फर्म का मालिक ही अलग कर दिया। घी जैसी अन्य टैक्स वाली चीजों को अलग फर्म बनाकर बिक्री दिखाई जा रही है। इस तरह घी के कारोबार का आंकड़ा 20 लाख से कम रहता है और व्यापारी जीएसटी रजिस्ट्रेशन के दायरे में नहीं आता। इस तरह टैक्स के नाम पर घी की कीमत बढ़ाकर लिया गया पैसा भी उसकी जेब में जा रहा है।

मुनाफाखोरी पर मौन
जीएसटी के साथ ही मुनाफाखोरी रोकने का कानून भी लागू किया गया है। हालांकि घी पर मुनाफा कमा रहे डेयरी संचालक फिलहाल इससे बेअसर हैं। दरअसल, संबंधित विभागों को अभी पता नहीं है कि इस पर अमल और कार्रवाई कैसे की जाए। सालभर पहले नमकीन की बढ़ी कीमतों पर अंकुश लगाने वाला प्रशासन घी पर मौन है। इस मामले में कलेक्टर निशांत वरवड़े का कहना है कि फिलहाल घी की कीमतों के बारे में कोई विचार नहीं किया गया है।
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