
राजभवन के बाहर मीडिया से ये बोले नीतीश
हमने गठबंधन धर्म का पालन किया। बुनियादी ढांचे का विकास हुआ, चुनाव में जो वादे किए, उस दिशा में काम करने की कोशिश की। हर जिले में योजनाओं का क्रियान्वयन करने की कोशिश की। शराबबंदी कर सामाजिक परिवर्तन की कोशिश की। इस माहौल में मेरे लिए काम करना और नेतृत्व संभालना संभव नहीं है। हमने किसी का इस्तीफा नहीं मांगा। लालू जी से भी बात होती रही है। हमने यही कहा कि जो भी आरोप लगे उन पर सिर्फ सफाई की बात कही। हमने राहुल जी से भी बात की। यह संकट नहीं है, अपने आप ला गया है। हमने इंतजार किया, लेकिन जब लगा कि वे इस स्थिति में कुछ नहीं कर रहे हैं तो मैंने अंतरात्मा की आवाज पर फैसला किया।
नीतीश बोले, मैंने खुद रास्ता छोड़ा
नोटबंदी का मसला आया तो हमने उसका समर्थन किया। हमने उस वक्त साफ कहा था कि बेनामी संपत्ति पर कार्रवाई होनी चाहिए। धन संपत्ति गलत तरीके से अर्जित करना क्या प्रवृत्ति है। हम इस तरह की बात करते रहे, मेरा रास्ता यह रहा। कई गठबंधन और विपक्षी एकता के लिए प्रयास करते रहे, लेकिन विपक्षी एकता का कोई एजेंडा होना चाहिए।
अभी राष्ट्रपति महोदय के चुनाव के वक्त पर हमने कहा कि वो बिहार के गर्वनर रहे और अच्छा काम किया। ऐसी परिस्थिति में जब यह वातावरण बन गया तो मुझे लगा कि सोच का दायरा अलग है। सिर्फ रिएक्टिव एजेंडा से काम चलने वाला नहीं है। हम अगर स्टैंड नहीं लेंगे तो यह बिहार की जनता के लिहाज से गलत होगा, ऐसी स्थिति में मैंने तय किया कि मैं सरकार नहीं चलाऊंगा। अब कोई रास्ता नहीं है तो विवाद नहीं करूंगा, इसी के चलते मैंने खुद ही रास्ता छोड़ दिया।