कर माफ़ी योजनाये कसौटी पर खरी नहीं

Sunday, May 21, 2017

राकेश दुबे@प्रतिदिन। सरकार का कहना है कि नोटबंदी के चलते 91 लाख नए लोग कर दायरे में आ गए हैं। यह अहम उपलब्धि है क्योंकि वर्ष 2015-16 में 370 लाख लोगों ने आयकर रिटर्न भरा था और यह आंकड़ा सीधे एक चौथाई का इजाफा करता है। इसके अलावा सरकार ने नोटबंदी के बाद जो खोज और सर्वेक्षण अभियान चलाए उनकी बदौलत करीब 23,144 करोड़ रुपये मूल्य की अघोषित आय सामने आई। सरकार पहले ही 18 लाख लोगों को चिन्हित कर चुकी है जिनका नकद लेनदेन उनके कर प्रोफाइल से मेल नहीं खाता। 

ऐसे करीब 10 लाख लोगों ने बिना आयकर कार्यालय गए ही अपनी ऑनलाइन प्रतिक्रिया दे दी है। इससे पता चलता है कि कैसे इस पूरी कवायद में तकनीक का जमकर इस्तेमाल किया गया और मानव हस्तक्षेप कम रहा। कम मानव हस्तक्षेप का अर्थ था भ्रष्टाचार की संभावना में कमी और प्रताडऩा में भी कमी। आयकर रिटर्न की ई-फाइलिंग में 22 फीसदी की बढ़ोतरी और करदाताओं को स्थायी खाता क्रमांक (पैन) के रोजाना आवंटन की तादाद के बढ़कर 200,000 हो जाने के बीच यह प्रतीत होता है कि देश में कर दायरे में खासा सुधार हो रहा है और कर व्यवस्था में सुधार भी कुछ रूप में सामने है।

बहरहाल, इन उपलब्धियों का आकलन इस संदर्भ में करने की आवश्यकता है कि आयकर मशीनरी ने बीते कुछ वर्ष में कैसा प्रदर्शन किया है। कर दायरे में शामिल किए गए लोगों का अद्यतन आंकड़ा वर्ष 2012-13 का है। उस वक्त 48 लाख लोगों को कर दायरे में शामिल किया गया था। इससे पहले वर्ष 2011-12 में 36  लाख लोग कर दायरे में आए थे। कर विशेषज्ञ कहते हैं कि कर दायरे में जुडऩे वाले नए व्यक्तियों की तादाद का सही आकलन तभी हो पाएगा जबकि वर्ष 2015-16 तक के आंकड़े भी उपलब्ध हों। इसी प्रकार कर रिटर्न की ई-फाइलिंग में भी इजाफा हुआ है लेकिन इसकी सालाना वृद्धि बीते कुछ वर्ष में धीमी हुई है जिसे समझा जा सकता है। 

वर्ष 2015-16 में यह 27 फीसदी थी और 2016-17 में 22 फीसदी रह गई। यह भी माना जाना चाहिए कि लोगों को एक निश्चित कर चुकाकर अपनी अघोषित आय घोषित करने का अवसर देने के मामले में सरकार का रिकॉर्ड बहुत अधिक बेहतर नहीं रहा है। दूसरी बात, ऐसी योजना गत एक साल में ही सामने लाई गई है। ऐसी पहली योजना गत वर्ष सितंबर में समाप्त हुई। उसके अधीन 55,000 करोड़ रुपये की अघोषित आय सामने आई। इस राशि की घोषणा करने वालों को तीन किस्तों में 45 फीसदी कर चुकाना पड़ा। दूसरी योजना से महज 4600 करोड़ रुपये सामने आए। यह इस बात का स्पष्ट संदेश था कि कर माफी की योजनाएं काला धन सामने लाने के वादे पर खरी नहीं उतर सकी हैं। अगर सरकार यह समझ जाए तो बेेहतर होगा कि ऐसी माफी योजनाएं लोगों में कर अनुपालन से दूरी बनाने की प्रेरणा पैदा करती हैं क्योंकि उनको लगता है कि भविष्य में उनको भी ऐसी माफी मिल सकती है।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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