EVM: आयोग को चुनौती और अब आयोग की चुनौती

Thursday, April 13, 2017

राकेश दुबे@प्रतिदिन। अजीब बात है कांग्रेस और उसके साथ 12 दल राष्ट्रपति से मिलने से पहले ईवीएम में छेड़छाड़ को मुख्य मुद्दा बना रहे थे, राष्ट्रपति के सामने यह गौण और अन्य मुद्दे मुख्य हो गये। अब कांग्रेस के ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोप को उनकी पार्टी के ही सीएम अमरिंदर सिंह ने नकार दिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर ने कहा है कि अगर ऐसा होता तो वह पंजाब में सत्ता में नहीं आ पाते। अमरिंदर ने कांग्रेस के स्टैंड के इतर कहा, 'अगर ईवीएम में छेड़छाड़ होती तो मैं यहां सीएम की सीट पर नहीं बैठा होता बल्कि अकाली दल का कोई नेता यहां होता।' बता दें कि वीरप्पा मोइली के बाद अमरिंदर ईवीएम के पक्ष में बोलने वाले कांग्रेस के दूसरे नेता हैं।

इस बीच इस गर्म मुद्दे पर चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और विशेषग्यों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि आइए एवं ईवीएम हैक कीजिए तथा दिखाइए कि इन मशीनॉ कैसे  से छेड़छाड़ की जा सकती है।आयोग ने कहा है कि यह चुनौती मई के पहले हफ्ते में होगी तथा दस दिनों तक चलेगी।

पिछली बार 2009 में ऐसा ही कार्यक्रम हुआ था जब देश के विभिन्न हिस्सों से 100 ईवीएम मशीनें विग्यान भवन में रखी गयी थीं। तब भी आयोग ने दावा किया था कि कोई भी इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन हैक नहीं कर पाया। जब दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप नेता अरविंद केजरीवाल ईवीएम संबंधी शिकायत के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी से मिले थे तब उनसे कहा गया था कि आयोग ऐसी चुनौती पेश करने की योजना बना रहा है।

इस बार इस कार्यक्रम का स्थल आयोग मुख्यालय निर्वाचन सदन होगा। ईवीएम पर आयोग की तकनीकी विशेषग्य समिति चुनौती संबंधी बिंदु तय करेगी तथा उसका ब्यौरा अगले कुछ दिनों में सार्वजनिक कर दिया जाएगा।इस बात की प्रबल संभावना है कि उत्तर प्रदेश चुनाव में इस्तेमाल में लायी गयी मशीनें चुनौती के लिए लायी जाएं। बसपा ने आरोप लगाया था कि छेड़छाड़ से गुजरी मशीनों ने भाजपा को चुनाव जिताने में मदद पहुंचायी। वैसे भी नियमों के अनुसार इन मशीनों को ४०  दिनों तक स्ट्रांग रूम से निकाला नहीं जा सकता है और इस अवधि के अंदर पीडि़त व्यक्ति संबंधित उच्च न्यायालय में चुनावी याचिका दायर कर सकता है। यह अवधि इस महीने बाद में खत्म हो जाएगी।

सवाल यह है कि यह बवाल किसलिए सिर्फ इसलिए कि एक दल वो भी भाजपा कैसे जीती। इसे दिल्ली की वर्तमान सरकार की उस जीत पर रख कर उठाना चाहिए। जब दिल्ली में आप को छोड़ सबका सूपड़ा साफ हो गया था। किसी मशीन में खामी हो सकती है, पद्धति गलत हो सकती है, पर हमेशा और हर जगह ऐसा ही हो यह कैसे संभव है। देखिये ! कौन चुनौती स्वीकारता है। हारने के बाद सब ऐसे ही कहते है, भाजपा भी कहती थी। एक बार पद्धति पर भी विचार जरूरी है।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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