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प्रधानमंत्री जी, भ्रष्टाचार के मामलों में भी वीआईपी संस्कृति खत्म कर दो

केके मिश्रा। लालबत्ती की वीआईपी संस्कृति आगामी 01 मई से समाप्त करने के निर्णय का स्वागत (हालांकि देश में इस निर्णय की अगुवाई पंजाब के मुख्यमंत्री अमरेंद्रसिंह-म.प्र.में नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह कर चुके हैं) करते हुए कहा केंद्र के इस निर्णय से ‘‘आम और खास’’ के बीच अंतर की खाई खत्म होगी, पर बात इससे समाप्त नहीं, शुरू हो गई है। 

असली मुद्दा तो देश को दीमक की तरह खोखला कर रहे भ्रष्टाचार, कदाचरण और विभिन्न अपराधों से जुड़ा है, जहाँ इससे जुडी छोटी मछलियाँ तो जाल में फंस रही हैं, किन्तु करोड़ों-अरबों रूपयों का भ्रष्टाचार करने वाले बड़े मगरमच्छ मात्र लोकसेवक या संवैधानिक पदों पर काबिज रहने के साथ सिर्फ और सिर्फ इसलिए बचे हुए हैं कि वे संवैधानिक पदों पर आसीन हैं और कानून उनके विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति की इजाजत नहीं देता है, प्रधानमंत्री जी, यह दुर्भाग्यपूर्ण बड़ी विसंगति भी तो वीआईपी संस्कृति और आम व खास के बीच एक बड़ा कानूनी  अभिशाप है।

समूचे देश में जारी यह बड़ी भूल है या विसंगति, चाहे वह किसी से भी हुई हो, तत्काल समाप्त होनी चाहिए। बड़े भ्रष्टों को लेकर प्राप्त इस संवैधानिक संरक्षण के कारण देश को खोखला कर रहे ऐसे कई बड़े मगरमच्छ आज अपनी ईमानदारी की चादर से ढंके हुए हैं? हाल ही में इस गंभीर विसंगति से लाभान्वित होने वालों में म.प्र. के दिवंगत राज्यपाल रामनरेश यादव, जो खुद, अपने पुत्रों, ओएसडी सहित आरोपित थे, आज राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह भी इसके प्रमाण हैं। प्रधानमंत्री जी कृपापूर्वक आप ‘‘न खाऊंगा-न खाने दूंगा’’ के देश को दिए गए वचन को लेकर इस महत्वपूर्ण विषय पर भी ध्यान देंगे, यदि कुछ करेंगे तो देश खोखला होने से बच सकेगा।
लेखक केके मिश्रा मप्र प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता हैं।