पंचायत विभाग में वेतन विसंगति दूर करने के लिए ज्ञापन सौंपा

Updesh Awasthee
भोपाल। मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रमेश थेटे को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संचालित योजनाओं जैसे मनरेगा, निर्मल भारत अभियान, मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम, जलग्रहण मिशन, डीआरडीए, आजीविका मिशन, मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधीकरण आदि परियोजनाओं में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को दिये गये छठवें वेतनमान की वेतन विसंगति को दूर करने के लिए ज्ञापन सौंपा ।   

पंचायत एवं ग्रामीण विकास की विभिन्न परियोजनाओं में कार्य करने वाले लगभग एक लाख संविदा कर्मचारियों का वेतन निर्धारण पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का विकास आयुक्त कार्यालय करता है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 31 मई 2013 को संविदा पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को छठवें वेतनमान के आधार पर वेतन देने के लिए वेतन नर्धारण वित्त विभाग के छठवें वेतनमान के जारी आदेश दिनांक 28 फरवरी 2009 के आधार पर कर दिया गया  लेकिन वित्त विभाग ने 20 अगस्त 2009 को एक और आदेश छठवा वेतनमान को निर्धारित करने लिए निकाला था जो कि 28 फरवरी को निकाले गये आदेश का संशोधन था। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने नियमित कर्मचारियों का छठवें वेतनमान का निर्धारण तो 20 अगस्त 2009 वाले आदेश से किया और संविदा कर्मचारियों का वेतन निर्धारण 28 फरवरी 2009 से कर दिया जिससे मनरेगा सहित विभिन्न परियोजनाओं में काम करने वाले संविदा कर्मचारियों को हजारों रूपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अलावा अन्य विभागों जैसे स्कूल शिक्षा विभाग में संविदा पर कार्य करने वाले संविदा कर्मचारियों का वेतन निर्धारण वित्त विभाग के संशोधित आदेश 20 अगस्त 2009 के आधार पर किया गया है उनको नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन प्रदान किया जा रहा है। 

विभाग के जिन पदों को आर्थिक नुकसान हो रहा है वह हैं डाटा एन्ट्रीआपरेटर, लेखापाल, सहायक ग्रेड - 3 सीनयिर डाटा मैनेजर, सहायक परियोजना अधिकारी वरिष्ठ अनुवादक, सहायक कार्यक्रम अधिकारी आदि । पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रमेश थेटे ने परीक्षण कर वेतन विसंगति दूर करने की कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है। 

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