वो मुझे वैश्या बुलाते थे, यह महिलाओं के सम्मान की लड़ाई थी

लंदन। श्रेया उकिल ने दो साल की लड़ाई के बाद आखिरकार विप्रो मैनेजमेंट के खिलाफ केस जीत लिया है। लंदन के ट्रिब्यूनल ने अपने ऑर्डर में कहा- ' इस बात के सबूत हैं कि कंपनी की सीनियर लीडरशिप ने विक्टिव को जेंडर के आधार पर भेदभाव किया। बता दें कि श्रेया ने 2015 में कंपनी पर केस दर्ज किया था। साथ ही 10 करोड़ हर्जाना देने की मांग की थी। उधर, विप्रो का कहना है कि कोर्ट ने कंपनी के फेवर में डिसीजन सुनाया है। 

उकिल ने दावा किया है कि ट्रिब्यूनल ने पाया कि विप्रो लीडरशिर टीम ने उसे परेशान किया। साथ ही जेंडर के आधार पर भेदभाव किया। वहीं, उसे कंपनी के दूसरे इम्प्लॉईज के समान सैलरी नहीं दी। कोर्ट अब अगले महीने हर्जाना के बारे में फैसला सुनाएगा। उधर, विप्रो ने एक चैनल को बताया कि कोर्ट ने कंपनी के फेवर में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कंपनी के उस डिसीजन को बरकरार रखा है जिसमें उसे नौकरी से निकाला गया था।

कौन है श्रेया
श्रेया 2014 तक विप्रो के यूरोप सेल्स डिपार्टमेंट में हेड थी। इसके पहले श्रेया बेंगलुरू में काम करती थी। 2010 में उसका ट्रांसफर लंदन कर दिया गया था। 2014 तक वह कंपनी में 10 साल तक सर्विस दे चुकी थी। एक ही पोस्ट पर काम करने के बाद उसे दूसरे इम्प्लॉईज की तुलना में कम सैलरी दी जाती थी। बॉडी और आउटफिट को लेकर भद्दे कमेंट किए जाते। ऑफिस के कुछ कलीग्स 'श्रिल', 'शैलो' और 'अनयूरोपियन' के साथ 'बिच' कहकर बुलाते थे।

अफेयर के लिए मजबूर किया
श्रेया ने आरोप लगाया था कि कंपनी के सीनियर अफसर मनोज पुंजा ने अपने साथ अफेयर के लिए मजबूर किया। वे मेरी बॉडी और आउटफिट को लेकर मुझ पर भद्दे कमेंट करते। मुझे यूरोप में काम करने के लिए जाने नहीं दिया जाता था। कंपनी के एक अफसर ने मनोज पुंजा के साथ सेक्स रिलेशन बनाने के लिए फोर्स भी किया गया।

जीते के बाद, श्रेया ने कहा- यह लड़ाई सम्मान और बराबरी की थी
मुझे उम्मीद है कि इस जजमेंट के बाद, कंपनियां महिला कर्मचारियों को लेकर उनके व्यवहार पर फिर से गौर करेंगी, और यह तय करेंगी कि उन्हें (महिलाओं) फेयर और बराबरी मिले।
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