भोपाल। कड़की के दिनों में शिवराज सिंह की राजनीति चमकाने वाले भोपाल के पॉवरफुल सरकारी ठेकेदार दिलीप सूर्यवंशी, उनकी पतिन मीना सूर्यवंशी एवं विंध्याचल एक्सप्रेस कंपनी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेन्द्र त्रिपाठी के खिलाफ न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी रीवा ने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 8 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए हैं। श्री सूर्यवंशी दिलीप बिल्डकॉन के मालिक भी हैं।
मामला रीवा का है। उक्त मामले में आरोपियों को 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है व मामला गैरजमानती है। मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी सम्भावित है। मामला जनहित में अधिवक्ता संतोष सिंह ने परिवादी के रूप में दायर किया है। प्रकरण की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता शिवेन्द्र उपाध्याय ने किया।
The Story of Shivraj Singh Chouhan and Dilip Suryavanshi
शिवराज सिंह चौहान और दिलीप सूर्यवंशी की कहानी सत्ता और व्यापार के एक गहरे और प्रभावशाली तालमेल की दास्तां है। इनके संबंधों की जड़ें काफी पुरानी हैं और यह महज व्यावसायिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत भी हैं।
शिवराज सिंह और दिलीप सूर्यवंशी की कहानी के मुख्य बिंदु:
पुरानी मित्रता और पारिवारिक संबंध:
शिवराज सिंह चौहान और दिलीप सूर्यवंशी स्कूल और कॉलेज के दिनों के दोस्त हैं। चौहान ने एक बार भावुक होकर याद किया था कि जब वे भोपाल में पढ़ाई कर रहे थे, तब सूर्यवंशी की माँ उन्हें अपने बेटे की तरह खाना खिलाती थीं। Shivraj Singh Chouhan and Dilip Suryavanshi relationship की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1991 में साधना सिंह से चौहान की शादी कराने में सूर्यवंशी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक उदय में दिलीप सूर्यवंशी की भूमिका:
स्रोतों के अनुसार, सूर्यवंशी ने नवंबर 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर को हटाकर शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाने के अभियान को न केवल निर्देशित किया, बल्कि उसे वित्तपोषित (finance) भी किया था। इस तरह वे political influence of Dilip Suryavanshi in Madhya Pradesh के एक प्रमुख केंद्र बन गए।
Dilip Buildcon growth under Shivraj Singh government
1988 में छोटे आवासीय प्रोजेक्ट्स और पेट्रोल पंपों से शुरुआत करने वाली कंपनी दिलीप बिल्डकॉन ने 2000 में सड़क निर्माण में कदम रखा। 2003 में भाजपा की सरकार आने के बाद कंपनी की प्रगति अविश्वसनीय रही। Dilip Buildcon growth under BJP government का प्रमाण यह है कि 2004-05 में कंपनी का टर्नओवर जो मात्र 13 करोड़ रुपये था, वह 2012 तक बढ़कर 1,000 करोड़ रुपये हो गया। वित्तीय वर्ष 2016 तक यह 4,000 करोड़ रुपये के पार पहुँच गया।
2012 के आयकर छापे और विवाद:
जून 2012 में Income tax raids on Dilip Suryavanshi 2012 के दौरान उनके ठिकानों से लगभग 1,000 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति जब्त की गई थी। इन छापों में कुछ ऐसी गोपनीय सरकारी फाइलें भी मिली थीं, जो केवल मंत्रियों और नौकरशाहों के पास होनी चाहिए थीं, जिनमें अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग का विवरण था।
सत्ता का गलियारा: सूर्यवंशी के रसूख का आलम यह था कि उनके कार्यालय और फार्महाउस के बाहर लाल बत्ती वाली गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहती थीं। नौकरशाह उनके यहाँ डिनर के निमंत्रण को सम्मान के पदक की तरह मानते थे। हालांकि बाद के वर्षों में विवादों से बचने के लिए दोनों ने सार्वजनिक रूप से मिलने से परहेज करना शुरू कर दिया।
Suryavanshi-Chouhan business political nexus
Suryavanshi-Chouhan business political nexus की तुलना कभी-कभी मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह के संबंधों से की जाती है। आज दिलीप बिल्डकॉन देश की सबसे बड़ी सड़क निर्माण कंपनियों में से एक है, जिसके पास 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के वर्क ऑर्डर हैं। सूर्यवंशी के साम्राज्य में अस्पताल, कॉलेज और कई अन्य कंपनियाँ भी शामिल हैं।

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