मप्र में लाखों किसान ठगे गए केसीसी के नाम पर

Updesh Awasthee
प्रमोद त्रिवेदी। किसानों के हित के लिए दिया जाने वाला किसान क्रेडिट कार्ड ही किसानों से ठगी का जरिया बन गया है। ठगी भी एक के साथ नहीं, बल्कि सैकड़ों किसानों के साथ हुई। सागर और रायसेन संभाग की प्रमुख बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) खाते से बीमा कंपनी चोला मंडलम के खाते में किसान की बिना अनुमति रुपए ट्रांसफर कर दिए। यह आर्थिक अपराध है जो बैंक प्रबंधकों ने किया। स्पष्ठ रूप से ठगी का मामला है। अमानत में खयानत का अपराध है। जिसकी रकम करोड़ों में हो सकती है। 

किसान समझता रहा कि उसके खाते से फसल बीमा की रकम काटी जा रही है, जबकि बैंक ने स्वास्थ्य बीमा के नाम से रुपए काट लिए। बैंक और बीमा कंपनी के घोटाला गठजोड़ से किसानों को दोहरा नुकसान हुआ।

एक- फसल की बर्बादी पर उसे मुआवजा नहीं मिला।
दूसरा-चोला बीमा के नाम पर किसान के रुपए तो काट लिए, लेकिन उससे स्वास्थ्य बीमा फार्म पर हस्ताक्षर ही नहीं करवाए। अत: किसान को स्वास्थ्य बीमा के बारे में पता ही नहीं चला। वो जरूरत पड़ने पर क्लेम ही नहीं कर पाया। 

मतलब, बीमा कंपनी रुपए डकार गई और किसान ठगा गया। इस पर चोला कंपनी के संभागीय मैनेजर हरीश वर्मा से सवाल किए, तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। चोला कंपनी के चैन्नई हेड ऑफिस को भेजे गए मेल का भी जवाब नहीं आया। वहीं सेंट्रल बैंक के संभागीय मैनेजर केसीसी खाते से किसानों के पैसा कटने पर सही जवाब नहीं दे सके। 

सेंट्रल बैंक और चोला मंडलम कंपनी का ये गठजोड़ 2012 से चल रहा था। केसीसी खाते से किसान साल में एक बार राशि निकालता है और एक बार जमा करता है। ऐसे में पासबुक की एंट्री भी साल-दो साल में एक बार करवाता है।

काटी गई रकम के सामने कभी बीमा तो कभी इंश्योरेंस लिखा होता था। किसान समझते यह फसल का इंश्योरेंस है जब​कि असर में यह हेल्थ इंश्योरेंस हो गया था। कई किसानों को तो एंट्री भी समझ नहीं आती। इसी का फायदा बैंक और चोला बीमा कंपनी ने उठाया। इस साल फसल बर्बाद होने पर जब किसान सेंट्रल बैंक पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनको फसल बीमा का रुपया नहीं मिलेगा।

धनीराम गुप्ता, प्रीतम सिंह, भरत लाल जैसे कुछ पढ़े-लिखे किसानों ने जब बीमा राशि खाते से कटने की बात कही, तो बैंक ने बताया कि आपका तो स्वास्थ्य बीमा हुआ है। किसानों ने शिकायत की धमकी दी तो इनको बैंक ने वो रुपए भी लौटा दिए, जो 4 साल पहले स्वास्थ्य बीमा के नाम से काटे गए थे। इसके बाद सागर जिले के तकरीबन 80 फीसदी किसानों के साथ ठगी होने का पता चला। 

कई जिलों में हो सकता है पर्दाफाश 
सागर जिले की लगभग सभी ब्रांचों में इस तरह के प्रमाण मिले। इसी दौरान रायसेन जिले के पड़रिया राजाधार गांव के किसान संजय विश्वकर्मा ने बताया कि उनके पिता प्रीतम विश्वकर्मा के केसीसी खाते से दो बार राशि काटी गई है। उन्होंने बेगमगंज ब्रांच में शिकायत की तो 6660 रुपए उनके खाते में जमा कर दिए गए। इससे पता चलता है कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी किसानों से ठगी हुई है।
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