राकेश दुबे@प्रतिदिन। देश के नौ राज्यों के नागरिक भोजन अधिकार कानून से वंचित हैं । केंद्र सरकार द्वारा बार-बार चेताए जाने के बावजूद गुजरात समेत कुछ राज्यों की सरकारों ने अपने यहां इस महत्त्वपूर्ण कानून को लागू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यही वजह है कि अब सर्वोच्च न्यायालय को खुद आगे आना पड़ा है।कानून को लागू करने में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सख्त लफ्जों में कहा है कि क्या गुजरात भारत का हिस्सा नहीं है? क्या संसद का बनाया कानून गुजरात पर लागू नहीं होता? सूखाग्रस्त राज्यों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, मनरेगा, मध्याह्न भोजन जैसी गरीब हितेषी योजनाओं पर अमल में ढिलाई से खफा न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल के खंडपीठ ने सवाल उठाया कि क्या कोई राज्य सरकार इस तरह संसद से पारित कानून को लागू करने से इनकार कर सकती है? जाहिर है, अदालत के सभी सवाल और चिंताएं वाजिब हैं। इन राज्यों में वंचित तबकों को कुपोषण और भुखमरी से निजात दिलाने के लिए इस कानून का अमल में आना बेहद जरूरी है।
यह कोई पहली बार नहीं है जब सर्वोच्च न्यायालय ने समाज कल्याण से संबंधित मनरेगा, खाद्य सुरक्षा कानून और मध्याह्न भोजन योजनाओं के कार्यान्वयन के बारे में केंद्र सरकार से जवाब तलब किया हो। इससे पहले भी, पिछले महीने की अठारह तारीख को केंद्र से अदालत ने जानना चाहा था कि जिन राज्यों में यह कानून लागू नहीं हुआ है, क्या वहां प्रभावितों को न्यूनतम आवश्यक रोजगार और आहार मुहैया उपलब्ध कराया जा रहा है? जाहिर है, अदालत के बार-बार आगाह किए जाने के बाद भी जब सरकार नहीं जागी, तब जाकर अदालत को सख्त रुख अख्तियार करना पड़ा। खासतौर पर अदालत, गुजरात सरकार के रवैये से ज्यादा खफा थी। अदालत का कहना था कि ‘खाद्य सुरक्षा कानून, पूरे भारत के लिए है और गुजरात है कि इसका कार्यान्वयन नहीं कर रहा है। कल कोई कह सकता है कि वह आपराधिक दंड संहिता, भारतीय दंड संहिता और साक्ष्य अधिनियम को लागू नहीं करेगा।’
सर्वोच्च न्यायालय एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, ओड़िशा, झारखंड, बिहार, हरियाणा और चंडीगढ़ सूखा प्रभावित हैं, लेकिन इनमें से आधे राज्यों मसलन बिहार, गुजरात और हरियाणा ने अपने आप को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया है। वहीं उत्तर प्रदेश ने अपने कुछ इलाकों को ही सूखाग्रस्त घोषित किया है। इन राज्यों में सक्षम प्राधिकारी समुचित राहत उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।
- श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
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