महंगी शिक्षा को सस्ता और मूल्यवान कैसे बनाएं: RSS का सर्वे

Updesh Awasthee
भोपाल। बड़े दिनों बाद आरएसएस सही पटरी पर काम करती दिखाई दे रही है। आरक्षण नीति पर पुनर्विचार का संदेश देने के बाद अब शिक्षा माफिया के खिलाफ आरएसएस ने जमीनी कार्रवाई शुरू कर दी है। संघ इन दिनों सर्वे करा रहा है कि प्राइवेट स्कूलों की महंगी शिक्षा को सस्ता और मूल्यवान कैसे बनाया जाए। इस सर्वे में पालकों एवं शिक्षकों को शामिल किया जा रहा है। यदि समाज की सभी विचारधारा वाले लोगों को इस सर्वे में शामिल कर लिया गया तो निश्चित रूप से बेहतरीन सुझाव सामने आएंगे। 

संघ ने अपने अनुषांगिक संगठन विद्याभारती को इस संबंध में सर्वे करने का काम सौंपा है। वहीं बनवासी कल्याण परिषद आदिवासी जिलों में इस सर्वे में सहयोग करेगी। सर्वे में शिक्षकों और पालकों को एक प्रोफार्मा देकर उनसे शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दस सवालों पर जबाब मांगा जा रहा है। संघ पालकों और अभिभावकों के सर्वे में आए तथ्यों के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार करेगी। इस पर केन्द्रीय सभा में चर्चा के बाद इसे केन्द्र सरकार के मानव संसाधन विभाग को सौंपा जाएगा ताकि नई शिक्षा नीति को तैयार करने में इन सुझावों को शामिल कराया जा सके।

पालकों से पूछे सवाल
शिक्षा व्यवस्था लगातार महंगी होती जा रही है। शिक्षा पर हो रहे अनाप-शनाप खर्च को कैसे रोका जाए।
खर्च बढ़ने के साथ बस्तों का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। इसे कम कैसे किया जा सकता है।
आपका बच्चा कितने बजे सोकर उठता है, कितने बजे सोता है। सोने और उठने का आदर्श समय आप क्या मानते हैं।
बच्चा कितने घंटे टीवी के सामने गुजारता है। वह टीवी पर किन प्रोग्रामों को देखता है।
बच्चा प्रतिदिन खेल मैदान जाता है या नहीं। जाता है तो वहां कितना वक्त गुजारता है।
बच्चों को पढ़ाई में मजबूत रखने के लिए ट्यूशन और कोचिंग क्या जरूरी है। बच्चों को दो साल में स्कूल भेजना क्या सही है, उसे कितनी उम्र में स्कूल भेजना चाहिए।
फास्ट फूड आपकी नजर में क्या बच्चों के लिए फायदेमंद हैं।
बच्चों में संस्कार विकसित हों इसके लिए क्या करना चाहिए। आप प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में चाहते हैं या अंग्रेजी में।

शिक्षकों से मांगे इन बिंदुओं पर सुझाव
भारत की शिक्षा पद्धति कैसी होनी चाहिए। वैश्विक, भारतीय या पश्चिमी।
भारत में शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रवादी बनाने के लिए क्या किया जा सकता है।
क्या शिक्षा का लक्ष्य महज डिग्री हासिल करना नहीं रह गया है। व्यक्तित्व विकास में इसकी भूमिका कैसे बढ़ाई जा सकती है।
वर्तमान में शिक्षा अंको पर आधारित होकर रह गई है। इसमें बदलाव के लिए क्या किया जाना चाहिए।
शिक्षा संस्थानों में हो रहे अनुसंधानों से क्या आप संतुष्ट हैं। इसमें क्या बदलाव हो सकते हैं।
क्या भारतीय शिक्षा वैश्विक समस्याओं का समाधान करती है।
शिक्षा व्यवस्था में पश्चिम का प्रभाव क्या बढ़ रहा है। इसे कैसे कम करके हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकते हैं।

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