रतीराम श्रीवास/टीकमगढ। प्रदेश मे शिक्षा विभाग मे एक ही प्रजाति थी शिक्षक। शिक्षक जाति मे अन्य प्रजातियों को जन्म देने वाला कोई और नही है। प्रदेश का पहले छात्र बनकर शिक्षक से ज्ञान अर्जित करके राजनीति का बादशाह बनकर प्रदेश का मुखिया बन गया वो प्रदेश मे कांग्रेस का पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जिन्होन शिक्षक जाति मे अन्य संस्कार का विलय करके अनेक प्रजातियो को जन्म देकर एक महाजाल मे बुन दिया जिसमे फॅसकर शिक्षक परिवार खून के आॅसू रो रहा है।
एक चार्चा के दौरान लोगो के सुझाव लोग कहते हे। कि ये समझ मे नही आ रहा हे। कि शिक्षा बिभाग मे अध्यापको मे खटर पटर क्यो हो रही हे। क्या गुनाह क्या किया अध्यापको ने कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इतनी बडी सजा दी। और कोई समझ नही पाया लोग कहते हे। कि शिक्षा बिभाग मे पहले एक ही पद था शिक्षक,लेकिन शिक्षक पद मे दिग्विजय सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान अनेक प्रजातियो को जन्म दिया हे। जैसे गुरु जी, शिक्षाकर्मी,स्यमंसेवी, शिक्षिका दीदी,संविदा शिक्षक, शिक्षाकर्मी वर्ग 1,2,3,पढना बढना आन्दोलन,और सभी का वेतनमान रखा 500,750,900, स्वयंसेवियो को गुरुदक्षिणा तक सीमित करके इतिश्री कर ली प्रदेश मे बेरोजगारी चर्मसीमा पर थी। इसीलिये बेरोजगार दिग्विजय सिंह के जाल मंे फॅस गये। जबकि राज्य मे अन्य बिभागो मे ऐसी असमानता नही दिखाई देती हे। जबकि बच्चे देश का भबिष्य हे। और शिक्षक राष्ट्र का निर्माता हे। फिर शिक्षक परिवार के साथ नइंसाफी क्यो हो रही हे। मानाकि दिग्विजय सिंह ने शिक्षक परिवार का आर्थिक शोषण किया हे। अब वर्तमान मे भारती जनता पार्टी के लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह तो विवकेशील बुद्धजीव हे। उन्हे तो आखिर इस असमानता को मिटा देना चााहिये। राजनीतिक गलियारो मे चार्चा हे। कि शिक्षक परिवार मे अन्य प्रजातियो को जन्म देने के कारण ही काग्रेस का सूफडा साफ हुआ हे। और जब तक दिग्गी राजा काग्रेस मे बने रहते हे। तब तक काग्रेस का राजनीतिक पतन होता रहेगा।

