इसलिए बिफल हो जाते हैं अध्यापकों के आंदोलन

Updesh Awasthee
अरविंद रावल। मित्रो कोई भी लड़ाई जीतने के लिए एकता और विश्वास की जरूरत होती हे। अध्यापकों की लड़ाई इसलिए विफल हो जाती हे की हम न तो एकजुट हैं और न ही हमे एकदूसरे के प्रति विश्वास है। हम सरकार से लड़ने की बजाय अपनी ऊर्जा अपनों को ही दोषारोपण देने और नीचे गिराने में ज्यादा लगाते हैं। हम कितने भी संग़ठन बना लें लेकिन उससे अध्यापकों की समस्याये क्या हल होने वाली हैं बल्कि जितने ज्यादा हम टुकड़ो में बिखरते जायेगे उतनी ही ज्यादा मुश्किलें आने वाली हैं क्योंकि हम टुकड़ो में बंटकर एकजुट कभी नही हो सकते हे और न कभी अपनी मांगे सरकार से मनवा सकते हे । अध्यापको के बड़े बड़े आंदोलन हुए हे लेकिन एकता और विश्वास के अभाव के चलते हम अब तक सफल नही हुए हे।

हमारी लड़ाई सरकार से हे उनके नीति नियंताओं से लेकिन यह बड़े दुःख का विषय हे कि हैं उनसे लड़ने की बजाय अपने लोगोे आपस में ही लड़ रहे हे। इतिहास साक्षी हे की जब जब भी अध्यापको ने सरकार से लड़ाई लड़ी हे सरकार ने दमनकारी रुख ही अपनाया हे। इसके लिए क्या हम अपने साथियो को दोष देगे ? या अपने नेतृत्व को ? या सरकार के रवये को ? लेकिन हमारे साथी हताश होकर आज जब अपनों को ही कोसते हे तो बड़ा दुख होता हे। अध्यापको की विडम्बना देखिये की जब भी कोई प्रदेशस्तर का आंदोलन होता हे एक नये संग़ठन को जन्म दे जाता हे। सरकारे तो चाहती ही हे की अध्यापक टुकड़ो में बिखरते रहे और आपस में लड़ते रहे लेकिन यह हम अध्यापक सविदा और गुरूजी साथियो को सोचना चाहिए की हमे क्या करना चाहिए। हमारा कुनबा हर साल बढ़ता जा रहा हे । हम चार लाख अध्यापक होकर भी लाचार बने हुए हे तो यह केवल हमारी कमजोरी हे। जब तक हम एकजुट होकर कुछ करेगे नही तब तक यू ही शासन का दमन चलता रहेगा।

हम आज भी एकजुट होकर सरकार से लड़ सकते हे और अपनी मांगे मनवा भी सकते हे। हमारी बाजुओ में आज भी वही जोश और जज्बा कायम हे । हम आज भी अपने सारे संघठनो के नेताओ को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास कर रहे हे लेकिन अति महत्वकांक्षा के चलते हमारे अपने ही लोग अध्यापको के देवता बनने का वहम पाले हुए हे। कुछ अपने ही लोग सभी को एक जाजम पर बेठना देखना पसन्द नही करते हे। मेरा प्रयास अब भी यही हे कि सारे गीले शिकवे भुलाकर मुरली, मनोहर, ब्रजेश और भरत को एक साथ एक मंच पर लाकर पूरी एकजुटता और विश्वास के साथ अध्यापको की मांगो का शासन से निराकरण करवाया जाय। 

साथियो मेरा आप सभी से निवेदन है कि बेवजह की अनगर्ल बयानबाज़ी करने से बचे और सभी अपने अपने संग़ठन के ब्लॉक जिला व् प्रदेशस्तर के नेताओ को एकजुट होने हेतु प्रयास करे। मुझे उम्मीद ही नही पूरा यकीन है कि हमारा प्रयास सफल होगा और हम एकजुटता के बल पर अपनी लड़ाई जीत कर ही रहेगे। साथियो में यह विश्वास दिलाता हु कि एकजुटता का प्रयास यदि हम सभी निस्वार्थ रूप से करेगे तो हमे सफलता जल्द मिलेगी।
अरविन्द रावल

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