यूपी के स्कूलों में भैंस पालेंगे अध्यापक

Updesh Awasthee
भोपाल। खबर उरूई (जालौन) से ब्रेक हुई है। यूपी सरकार ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है लेकिन खंडन भी नहीं किया है। खबर यह है कि बच्चों को मिड-डे मील के साथ दूध देने की योजना के तहत यूपी में प्रत्येक प्राइमरी स्कूल में एक भैंस पाली जाएगी। जिसकी देखभाल स्वभाविक रूप से स्कूल प्रबंधन के पास होगी। 

भैंस पालन के लिए बाकायदा सहायक अध्यापक को रखरखाव व दूध दुहने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। योजना के तहत 25 बच्चाें पर एक भैंस पाली जाएगी। स्कूल बंद होने के बाद भैंस की देखभाल के लिए संविदा पर एक कर्मचारी तैनात किया जाएगा, जिसकी नियुक्ति की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होगी।

अगर सरकार ने जल्द फैसला लिया तो जुलाई से शिक्षा सत्र शुरू होने पर यह योजना क्रियान्वित हो जाएगी। उधर, शिक्षा महकमे के बड़े अफसरों को अंदेशा है कि शिक्षक इस योजना का विरोध कर सकते हैं। इसके चलते आला अधिकारी योजना के क्रियान्वयन के बाबत पूछने पर गोलमोल जवाब दे रहे हैं।

केन्द्र की ओर से आदेशित किया गया है कि मिड-डे मली के तहत बच्चों को दूध भी दिया जाए। इस योजना के तहत मिड-डे मील के साथ ही बच्चे को एक गिलास दूध दिया जाएगा। अब सवाल यह उठता है कि यदि दूध बाजार से लिया गया तो मिलावट होगी और बवाल मचेगा। योजना सरकार के लिए संकट बन जाएगी और वोट खटाई में चले जाएंगे। दूध में मिलावट न हो इसके लिए सरकार ने एक मसौदा तय करने की सोची है, जिसके तहत विद्यालय में बच्चों की संख्या के अनुपात में भैंस पालने की बात सामने आ रही है।

चर्चा है कि 25 बच्चों पर एक भैंस पालने की योजना बन रही है। इसके लिए बाकायदा सहायक अध्यापक को प्रशिक्षण देने की भी योजना है। सहायक अध्यापकों को भैंस के रखरखाव व दूध दुहने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। चारा पानी का इंतजाम भी शिक्षक को करना होगा, जिसका बजट मुहैया कराया जाएगा।

यही नहीं विद्यालय बंद होने के बाद भैंस की देखभाल के लिए एक संविदा कर्मी की तैनाती भी की जाएगी, जिसके चयन की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होगी। संविदा कर्मचारी को एक हजार रुपये मानदेय देने की योजना है। 

विद्यालयों में बच्चों को मिड-डे मील के साथ दूध देने की योजना बनी है। इसके लिए भैंस भी पालनी पड़ सकती है, लेकिन उनकी देखभाल कौन करेगा, यह अभी तय नहीं है।
अजीत कुमार सिंह
बेसिक शिक्षाधिकारी

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