1500 कर्मचारियों को जानवरों की तरह जोत रहा है वनविभाग

Updesh Awasthee
भोपाल। मप्र में वनविभाग में कार्यरत 1500 कर्मचारियों की स्थिति किसी बैल से कम नहीं है जिसे सिर्फ दो जून की रोटी के बदले हल में जोत दिया जाता है और उसकी क्षमता रहते तक काम कराया जाता है। मप्र में श्रम कानून हैं परंतु शायद वनविभाग को छोड़कर। इसीलिए यहां श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन किया जाता है ओर एक एक दुकान से हफ्ता वसूली करने वाले श्रम अधिकारी कभी इस विभाग पर कोई कार्रवाई नहीं करते। 

पढ़िए यह खुलाखत : 

प्रति,
माननीय शिवराजसिंह चौहान महोदय जी,
मुख्य मंत्री, मध्य प्रदेश शासन
भोपाल

द्वाराः- श्रीमान विधायक महोदय जी, विधान सभा क्षेत्र सिवनी, केवलारी
विषयः- वन विभाग में कार्यरत 1500 से अधिक आपरेटर्स का आर्थिक एवं मानसिक शोषण रोकने एवं नियमितिकरण करने के संबंध में।

महोदय जी,
विषयांतर्गत निवेदन है कि, वर्तमान में वन विभाग का सारा कार्य पूर्ण रूप से कम्प्यूटराईज हो चुका है। इसमें 15 से अधिक आनलाईन साफ्टवेयर संचालित है जिन्हें प्रत्येक दिवस तथा कुछ का माह के अंत में अपडेट करना पड़ता है। इस हेतु विभाग द्वारा स्वयं का सर्वर स्थापित किया गया है। जिसके लिये विभाग भी बनाया गया है, आई.टी. शाखा जहां से पूरे प्रदेश से प्राप्त डाटा का आंकलन किया जाता है। वर्तमान में विभाग का पूरा कार्य कम्प्यूटर पर निर्भर है, पूरे प्रदेश में तत्कल डाटा का आदान प्रदान/जानकारिया सभी कम्प्यूटर के माध्यम से नियमित मुख्यालय का प्रदान की जा रही हैं। इस हेतु विभाग कम्प्यूटर तथा सह उपकरणों पर करोड़ो रूपये खर्च करता है। जिसका भरपूर फायदा विभाग को मिलता भी है। विभाग ने अपने सभी कार्यालय मुख्यलय, सर्किल कार्यालय, डिवीजन कार्यालय, सब डिवीजन कार्यालय, रेंज कार्यालय, काष्ठागार कार्यालय, अभ्याहरण, नेशनलपार्क आदि सभी स्थानों पर कम्प्यूटर क्रय करा दिये गये है।

पूरे प्रदेश में सूचनाओं का आदान प्रदान अधिकारी स्वयं नहीं करते इसे चलाने हेतु आपरेटर्स की आवश्यकता होती है। जिसकी पूर्ति करने हेतु प्रत्येक कार्यालय का प्रमुख अपने स्तर पर आपरेटर्स नियुक्त कर लेता था। आपरेटर्स को भुगतान घण्टों के तर्ज पर किया जाता है। जो जैसे विदिशा डिवीजन में 47 रूपये  घण्टा, सिहोर डिवीजन में 35 रू घण्टा जबकि सभी कार्यालयों में कार्य एक सामन ही होता है। आपरेटर्स का भुगतान डिवीजन कार्यालय करता है, वर्तमान में 25 विंग कार्यालय 61, सर्किल कार्यालय 88, डिवीजन कार्यालय 179, सब डिवीजन कार्यालय 523, रेंज कार्यालय, काष्ठगार कार्यालय है जिनमें लगभग 1500 से अधिक कम्प्यूटर आपरेटर्स कार्य करते है। जिन्हें कार्य करते हुये कई वर्ष हो चुके है। कई तो 15 वर्ष से भी अधिक समय से विभाग को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे है तथा ओवर एज हो चुके है न ही इनकी भविष्य निधी काटी जाती है।

भुगतान दर का निर्धारण सभी सर्किल प्रमुख्य अधिकारियों के द्वारा अपने सर्किल स्तर पर किया जाता है जो कि पूरे प्रदेश में अलग-अलग होता है। जो कि घण्टों के हिसाब से दिया जाता है। जबकि श्रमविभाग के किसी भी हेड में घण्टों की दर निर्धारित नहीं है। सर्किल प्रमुख्य स्व विवेक से ही उक्त् दर का निर्धारण करता है। अप्रैल 2014 में श्रमि विभाग द्वारा कम्प्यूटर आपरेटर्स का एक हेड बना दिया गया है। जिसमें किसी फर्म में कार्यरत आपरेटर्स को 9335 की दर से भुगतान दिया जाना निर्धारित किया गया था। जिसे बदल कर वर्तमान में श्रमविभाग द्वारा अक्टूबर 2014 में 9735 कर दिया गया। परन्तु विभाग इसे मानने को तैयार ही नहीं है।

महोदय जी सभी आपरेटर्स को पूर्ण कार्यालयीन समय में बैठकर कार्य लिया जाता है, अवकाश में भी अधिकाश कार्य कराया जाता है। वेतन घण्टों की दर से दी जाती है, निर्धारित अधिकतम घण्टों से अधिक का मानदेय नहीं दिया जाता है। जब कि कार्य पूरे कार्यालय समय में कराया जाता है, 250 से 300 घण्टे तक कराया जाता है। जिसे लागू कराने हेतु हमने विभाग के आला अधिकारी माननीय अनिल ओबेराय जी पीसीसीएफ वन विभाग मध्य प्रदेश माननीय वन मंत्री को भी शिकायत की, परंतु आज दिवस तक हमारा शोषण नहीं रोका गया।
प्रार्थी
समस्त वन विभाग कम्प्यूटर आपेरटर्स
मध्य प्रदेश

भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
फेसबुक पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!