राकेश दुबे@प्रतिदिन। आज 26 जनवरी है| दिल भारी है, शहीदों के प्रति कृतज्ञता से और देश में आत्महत्या करते किसानों की संख्या को गिनकर| केंद्र से लेकर राज्य तक सारी सरकार जिस किसान पर अपना स्नेह बरसाने का ढोंग करती हैं वे निरंतर आत्महत्या कर रहे हैं|
वर्तमान केंद्र सरकार के इस छोटे से कार्यकाल में 4600 किसान आत्महत्या कर चुके हैं| सरकार के आंकड़ों के अनुसार 4600 किसानों ने खुदकुशी कर ली। 46 हजार से 69 हजार तक किसानों ने खुदकुशी की कोशिश की। पुलिस का कहना है 10 से 12 खुदकुशी की कोशिश में एक किसान की मौत हुई है। किसानों की आत्महत्या पर काम करने वाले एनजीओ 'स्नेहा' का कहना है कि 15 खुदकुशी की कोशिश में एक किसान की मौत हुई है।
विकास कि जिस बयार को सरकार बनने के पूर्व पंख दिए गये थे, वह सिर्फ प्रचार माध्यमों में दिख रही है| गाँव में तो उसका एक झोंका तक नहीं दिख रहा है| आत्महत्या के यह आंकड़े सरकारी हैं| सरकार यह समझा नहीं पा रही है कि उसका विकास का अजेंडा गाँव तक क्यों नहीं पहुंच सका| 28 फरवरी को आने वाला केन्द्रीय बजट कटौतियों से भरा होने की सम्भावना है| मध्यप्रदेश सरकार बजट तो तेल निकालने वाला रहेगा| वैसे भी अभी मध्यप्रदेश में पेट्रोल डीजल देश में सबसे महंगा है|
इस काल खंड में दो लाख किसानों ने खेती छोड़ दी। पिछले 20 सालों से हर दिन 2 हजार किसान खेती छोड़ रहे हैं। किसान और खेत में काम करने वाले लोग इसे छोड़ दूसरे पेशे को अपना रहे हैं। 1991 और 2001 की जनगणना के अनुसार 7.2 मिलियन किसानों ने खेती छोड़ दी। 20 सालों में 20 मिलियन किसानों ने खेती छोड़ दी और यह सिलसिला मोदी सरकार में ज्यादा तेज गति से जारी है।
“जय जवान- जय किसान” के साथ भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी ने “जय विज्ञान” जोड़ा था और मोदी जी ने उसमें एक नया टुकड़ा “जय मेहमान” जोड़ दिया है| मेहमाननवाज़ी कीजिये, पर खर्च पर नियन्त्रण के उपाय सुझाने के लिए बनाये गये जालान आयोग कि भी सुनिए| जालान आयोग ने सरकारी घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.6 प्रतिशत रखने की सिफारिश की है, जिसका अर्थ है 66 हजार करोड़ की कटौती अर्थात कई योजनाओं में कटौती|
जब घर में हो दाने तभी जाये भुनाने की सलाह के साथ, सबके लिए गणतंत्र दिवस शुभ हो|
लेखक श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क 9425022703
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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