अपैक्स बैंक के दागियों को सस्पेंड क्यों नहीं कर रहे रजिस्ट्रार

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भोपाल। ऋण नियमों को दरकिनार करके आईएएस रमेश थेटे की पत्नी मंदा थेटे को ऋण स्वीकृत करने और फिर एकमुश्त समझौता करके अपेक्स बैंक को 40 लाख रुपए का चूना लगाने के आरोपियों को निलंबित करने और पद से हटाने के लिए अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक आरएस गर्ग और आयुक्त, सहकारिता एवं पंजीयक मनीष श्रीवास्तव को स्मरण पत्र लिखा है।

दूसरी ओर, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय नियमों और अधिकार नहीं होने का हवाला देकर टाल-मटोल की जा रही है। गौरतलब होगा कि एकमुश्त समझौता में नियमों की धज्जियां उड़ने और अपेक्स बैंक को 40 लाख रुपए का चूना लगने पर लोकायुक्त ने एफआईआर दर्ज करके 28 जून, 2013 को विशेष सत्र न्यायालय भोपाल में चालान पेश कर दिया है। इसमें बैंक अध्यक्ष भंवरसिंह शेखावत, तत्कालीन प्रबंध संचालक सुशील कुमार मिश्रा, अरविंद सिंह सेंगर, आरबी बट्टी, बर्खास्त उपमहाप्रबंधक केशव देशपांडे, विधि सलाहकार शांतिलाल लोढा, ओमप्रकाश पाटीदार, लेखाधिकारी हरिशंकर मिश्रा, श्रीमती मंदा थेटे एवं रमेश थेटे को आरोपी बनाया गया है।

चालान में पेश कर दिए जाने के बाद लोकायुक्त कार्यालय ने आरोपियों को निलंबित करने और पद से हटाने के बारे में 29 जून,13 को ही लिखा था। बावजूद इसके आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी। शासन ने तो बैंक के तत्कालीन प्रबंध संचालक आरबी बट्टी को सस्पेंड कर दिया, लेकिन प्रबध्न ने आज तक एक भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। ऐसे में चालान पेश होने के बाद भी निलंबन करके पद से नहीं हटाने को गंभीरता से लेते हुए लोकायुक्त ने बैंक प्रबंधन के साथ आयुक्त, सहकारिता को 16 जुलाई, 2013 को स्मरण पत्र लिखा है।
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