नईदिल्ली। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नईदिल्ली में जिस प्रकार की सक्रियता गुरुवार शाम से लेकर शुक्रवार शाम तक दिखाई, उसके केवल और केवल एक ही मायने समझे जा सकते हैं और वो ये कि एक बार फिर शिवराज ने मोदी से मुकाबला करने की रणनीति पर काम किया।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजग को मजबूत बनाने का उपक्रम प्रदर्शित किया। कानूनी लड़ाई के जरिए गुजरात से शेर लेने में सफल रहने के बाद उनकी रणनीति नरेंद्र मोदी को राजनीतिक मोर्चे पर पटखनी देने की है। शिवराज ने दिनभर अपनी राजनैतिक चहलकदमी पार्टी के उन्हीं आला नेताओं के इर्दगिर्द रही जोकि राजग प्लस की वकालत करते रहे हैं।
दिल्ली में उनकी इस सक्रियता ने मोदी खेमे की बेचैनी बढ़ा दी है। राजग के संयोजक शरद यादव से उनकी मुलाकात को दूर के राजनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। कुछ दिनों पूर्व वे गठबंधन के एक अन्य सहयोगी शिवसेना के मुखिया उद्धव ठाकरे से मुंबई जाकर मुलाकात कर चुके हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मोदी को पीएम प्रत्याशी बनाए जाने के सार्वजनिक विरोध के बावजूद जदयू अध्यक्ष शरद यादव से शिवराज की मुलाकात को राजग में उनकी स्वीकार्यता बढ़ाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
जबकि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी गठबंधन के बजाय भाजपा के बलबूते 2014 की जंग जीतने के पक्षधर हैं। लालकृष्ण आडवाणी को पीएम पद का बेहतर प्रत्याशी करार देने के बाद पहली दफे दिल्ली आए शिवराज का नेताओं से मिलने का सिलसिला शुक्रवार को यहां दिनभर चला। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद शिवराज ने कहा कि शिष्टाचार भेंट करने आया था, इसके रजनीतिक मायने नहीं निकालने चाहिये।
शिवराज ने प्रदेश की राजनीति को लेकर भी राज्य भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के साथ लंबी मंत्रणा की है। उन्होंने करीब दो घंटें सूबे की राजनीति पर माथापच्ची की।