फरार आतंकियों को पनाहगार बन गया है मध्यप्रदेश: दिग्विजय सिंह

shailendra gupta
इंदौर: समझौता एक्सप्रेस बम कांड के आरोपी राजेंदर चौधरी उर्फ समुंदर सिंह को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के मध्यप्रदेश से गिरफ्तार किये जाने के बाद सियासत गरमा गयी है. कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासित सूबे में फरार आतंकवादियों को शरण दी जा रही है.

दिग्विजय ने आज यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘एनआईए के समुंदर को मध्यप्रदेश से धर दबोचने से फिर साबित हो गया है कि राज्य में आतंकवादियों को शरण दी जा रही है. प्रदेश में भाजपा के शासन में ऐसे लोग खुलेआम रह रहे हैं.’’कांग्रेस महासचिव ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस फरार आतंकवादियों को नहीं पकड पा रही है, जबकि इन्हें गिरफ्तार करने में एनआईए को कामयाबी मिल रही है.

उन्होंने उज्जैन जिले के नागदा क्षेत्र से कल रात समुंदर की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘पांच लाख रुपये का यह इनामी आतंकवादी खुलेआम नागदा में रह रहा था. ऐसे में प्रदेश सरकार को इस सवाल का जवाब देना चाहिये कि उज्जैन पुलिस क्या कर रही थी.’’

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘किसी आतंकवादी को छिपाना भी एक अपराध है. इसलिये जांच के बाद उस क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिये, जिस इलाके में समुंदर छिपा हुआ था.’’समुंदर पर वर्ष 2007 के दौरान समझौता एक्सप्रेस में बम लगाकर भीषण धमाकों को अंजाम देने का आरोप है. दिग्विजय ने यह आरोप भी लगाया कि दक्षिणपंथी अतिवादियों की कथित भूमिका वाले अलग.अलग भीषण बम कांडों में मोस्ट वांटेड रामचंद्र कलसांगरा उर्फ रामजी और संदीप डांगे भी मध्यप्रदेश में ही छिपे हैं और प्रदेश पुलिस को पता है कि ये दोनों दहशतगर्द कहां हैं. रामजी और डांगे समझौता एक्सप्रेस बम कांड के भी आरोपी हैं.

दिग्विजय ने कहा, ‘‘मध्यप्रदेश पुलिस इन दोनों आतंकवादियों को छिपाये हुए है.’’ उधर, मध्यप्रदेश पुलिस ने कांग्रेस महासचिव के संगीन आरोपों पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नंदन दुबे ने यहां कहा, ‘‘यह (समझौता एक्सप्रेस बम कांड) एक संवेदनशील मामला है. मेरा इस विषय में फिलहाल टीका.टिप्पणी करना ठीक नहीं है, क्योंकि एनआईए इस मामले की जांच कर रही है.’’

दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस में हरियाणा के पानीपत के पास 18 फरवरी 2007 को भीषण बम धमाके हुए थे. इन धमाकों और इनके बाद रेल के डिब्बों में लगी आग से भारत और पाकिस्तान के 68 लोगों की मौत हो गयी थी, जबकि करीब 12 मुसाफिर जख्मी हुए थे.

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