दीपावली में ये गलती भूलकर भी न करें

Sunday, October 15, 2017

दीपावली त्यौहार का जुनून सर चढ़कर बोलने लगा है। बाजार सज गये है। घर की साफ सफाई जोरों पर है। इस महापर्व की महाजिम्मेदारी घराडियो अर्थात घर की महिलाओं पर है। कुछ पुरुष तो इन महिलायों पर घर की सारी जिम्मेदारी छोड़कर निश्चित बैठे रहते है लेकिन आपको यह ध्यान रखना पड़ेगा यह त्योहार ग्रहलक्ष्मियों का है। दीपावली पर्व महालक्ष्मी का पर्व है इसमे साफसफाई, उज्जवलता, घर को व्यवस्थित सजाने पर विशेष जोर दिया जाता है यह सब कार्य करने का वरदान भगवान ने ग्रहलक्ष्मी अर्थात घर की महिलाओं को दिया है। लाल किताब के अनुसार महालक्ष्मी का कारक ग्रह *शुक्र* होता है। ज्योतिष शास्त्र मॆ स्त्रीत्व (नारीत्व) का कारक इसी ग्रह को माना गय़ा है। ग्रहलक्ष्मी पर इसी ग्रह का प्रभाव होता है। घर व्यापार के कामकाज के चक्कर मॆ कुछ लोग ग्रहलक्ष्मी की ओर ध्यान देना भूल जाते हैं। फलस्वरूप ग्रह कार्य के बोझ तले हमे इस पर्व के मूल को भूल जाते है।

क्या करें
इस पर्व के प्रारम्भ से ही अपनी ग्रहलक्ष्मी को कोई ऐसी इच्छा हो जो घर के लिये आवश्यक हो तो उसे अवश्य पूर्ण करें। ग्रहलक्ष्मी के सौंदर्य तथा दीपावली पर्व के दौरान उसकी वेशभूषा पर खास ध्यान दें। कितनी भी व्यस्तता हो उसके मन मॆ क्या चल रहा है इसकी थाह लेते रहे। आपका यही व्यवहार घर की लक्ष्मी को प्रसन्न रखेगा। फलस्वरूप घर की लक्ष्मी प्रसन्न रहेगी और उसकी यही प्रसन्नता आपको धनधान्य से पूर्ण करेगी। इसके अलावा आपका मंत्र जाप पूजा पाठ, ग्रह सजावट जैसे उपाय दूसरे नंबर पर आते है हम यूं कह सकते है की घराडि (ग्रहलक्ष्मी) प्रसन्न तो महालक्ष्मी प्रसन्न।

और क्या करें
ग्रह लक्ष्मी नवीन वस्त्र पहने, अपनी सजावट पर ध्यान दें, इसका मतलब महँगे वस्त्र और पार्लर के महँगे सौन्दर्य से कदापि नही।
तुलसी पूजन का विशेष ध्यान दें, कार्तिकमास मॆ महालक्ष्मी और तुलसी का विशेष महत्व होने से भगवान नारायण मनुष्य पर कृपा करते है।

यह पर्व एक तरह से मजदूर और कर्मठ लोगों का है शुक्र की राशि मॆ शनि ग्रह उच्च राशि मॆ होता है। शनि ग्रह और महालक्ष्मी का मां बेटे जैसा सम्बंध है। जहां श्रम सजावट और कर्मों की दिव्यता वास करती है वहां लक्ष्मी को वास करना पड़ता है। इस पूरे मास मॆ कामकाज मॆ वृद्धि होने के कारण सभी जगह लक्ष्मी धन का प्रवाह होता है जिससे सभी मजदूर औऱ कर्मठ लोगों को काम और पैसा मिलता है। जिससे शनिदेव प्रसन्न रहते है। इस पर्व पर अपने अधीन कार्य कर रहे मजदूरों को उपहार देकर प्रसन्न रखे, उनकी शुभकामनाओं से आपका काम बडेगा।

गुरुसेवा
भृगु मुनि ने जब भगवान विष्णु के हृदय मॆ पद प्रहार किया था उस समय माता लक्ष्मी ने रुष्ट होकर ब्राम्हण तथा मुनियों को श्राप दे दिया था। बदले मॆ भ्रुगु ने भी लक्ष्मी माता को श्राप दे दिया था। इस झगडे का समाधान भगवान विष्णु ने इस तरह से किया की जहा ब्राह्मण मंत्रोच्चार तथा वेदपाठ कर आशीर्वाद देंगे वहां गृहस्थ द्वारा उन्हे जो दक्षिणा दी जायेगी उसके बदले मॆ ब्राह्मणों के आशीर्वाद से लक्ष्मी को वहां आना पड़ेगा। इसीलिये किसी भी ब्राह्मण को दक्षिणा अवश्य दें।

इस पर भी ध्यान दें
दीपावली महाआमावस की रात है। इसीलिये इसके पाँच दिन पहले और बाद बाल खुले रखकर न घूमें। सड़क पर नीबू या किसी प्रकार का टोटके को न रोंदे। सम्भलकर चलें, किसी के दिये हुए प्रसाद मॆ से चुटकी भर निकालकर बाहर फेंक दें, और सुनसान खंडहर, तालाब, घने वन जंगल की ओर घूमने न जायें।

निष्कर्ष
उपरोक्त सभी का निष्कर्ष यह है की आपको ब्राह्मण, ग्रहलक्ष्मी और अपने घर मॆ कार्य करने वाले मजदूर पर विशेष ध्यान देंगे तो निश्चित रूप से आपके धनवृद्धि होगी। कुछ लोग सोचते है की हम खुद ही ब्रह्मण बनकर उनके जैसे कार्य कर लक्ष्मी को प्रसन्न कर लेंगे ऐसा कदापि न करें।
*प.चंद्रशेखर नेमा"हिमांशु"*
9893280184,7000460931

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