भोपाल, 2 नवंबर 2026: पिछले तूफान ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में समय से पहले सर्दी शुरू कर दी और अब दूसरा चक्रवर्ती तूफान (Cyclone Murasu) आ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने सूचना दी है कि मध्य प्रदेश के 23 जिलों में इस तूफान का सीधा असर दिखाई देगा। लोग जब अपने घरों में सफाई कर रहे हैं, पुताई कर रहे हैं, फेस्टिवल की शॉपिंग चल रही है, मौसम विभाग के अनुसार आंधी के साथ बारिश की संभावना है।
दूसरे तूफान से मध्य प्रदेश के 29 जिले प्रभावित
मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात 'मुरासु' के आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट (नेल्लोर और नरसापुर के बीच) की ओर बढ़ने के बाद इसकी नमी मध्य भारत की हवाओं में घुल गई है। इसका सीधा असर मध्य प्रदेश के पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों पर पड़ रहा है। विशेष रूप से:-
जबलपुर संभाग: जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बालाघाट, मंडला,डिंडोरी।
इंदौर संभाग: अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन।
रीवा संभाग: रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर।
में तेज आंधी और बारिश की संभावना है। इसके अलावा शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा इत्यादि जिलों में बेमौसम बारिश और आंधी का दौर देखने को मिलेगा।
आम नागरिक और किसानों पर इसका क्या असर होगा?
इस अचानक बदले मौसम का सबसे बड़ा प्रभाव राज्य के किसानों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। एक ओर जहां खेतों और कृषि उपज मंडियों में खुले में रखी धान व सोयाबीन की कटी हुई फसलों के भीगने का खतरा पैदा हो गया है, वहीं दूसरी ओर रबी की फसल (गेहूं, चना और सरसों) की बुवाई कर रहे किसानों को भी अपनी समय-सारिणी में बदलाव करना पड़ सकता है। इसके अलावा, दिन के तापमान में अचानक गिरावट और हवा में नमी बढ़ने से मौसमी बीमारियों (जैसे सर्दी, खांसी और वायरल बुखार) का जोखिम बढ़ जाएगा। सबसे बड़ा नुकसान फेस्टिवल की दुकानदारों को होगा। उन्होंने लाखों रुपए इन्वेस्ट करके अपनी दुकान में माल भरा है और मौसम के इस परिवर्तन का सीधा असर दुकानदारी पर दिखाई देगा। यदि आतिशबाजी का स्टॉक पानी में भीग गया तो सब बर्बाद हो जाएगा।
मध्य प्रदेश के किस जिले में कैसा मौसम रहेगा
जबलपुर संभाग: महाकौशल अंचल के जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट और डिंडौरी जिलों में बादलों का घना डेरा रहेगा। यहां कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।
रीवा संभाग: विंध्य क्षेत्र के रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज और मैहर जिलों में बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं का सीधा प्रवेश हो रहा है। यहां 5 नवंबर तक रुक-रुक कर बौछारें पड़ने और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है।
इंदौर संभाग: पश्चिमी मध्य प्रदेश के इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर और खंडवा जिलों में भी इस सिस्टम की नमी पहुंच रही है। यहां आसमान में बादल छाए रहेंगे और छिटपुट स्थानों पर तेज हवा के साथ बूंदाबांदी या हल्की बारिश हो सकती है।
शहडोल संभाग: पूर्वी मध्य प्रदेश के शहडोल, अनूपपुर और उमरिया जिलों में चक्रवात का असर काफी स्पष्ट रहेगा। यहां न केवल बारिश के आसार हैं, बल्कि दिन के तापमान में भी दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
नर्मदापुरम संभाग: नर्मदापुरम (होशंगाबाद), बैतूल और हरदा जिलों में विशेषकर दक्षिणी हवाओं के प्रभाव से बादल छाने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। पचमढ़ी जैसे पहाड़ी इलाके में ठंडक और अधिक बढ़ जाएगी।
मध्य प्रदेश मौसम का पूर्वानुमान: 5 नवंबर तक के लिए
3 नवंबर: पूर्वी मध्य प्रदेश के रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के जिलों में बादलों की आवाजाही तेज होगी। दोपहर बाद कई इलाकों में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और हल्की बारिश की शुरुआत हो सकती है।
4 नवंबर: नमी का प्रवाह मध्य और पश्चिमी हिस्सों की ओर बढ़ेगा। जबलपुर और रीवा के साथ-साथ नर्मदापुरम और इंदौर संभाग के दक्षिणी जिलों (जैसे बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर और खरगोन) में बूंदाबांदी और गरज-चमक की गतिविधियां सबसे अधिक सक्रिय रहेंगी।
5 नवंबर: सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगेगा, लेकिन पूर्वी और दक्षिणी जिलों में छिटपुट बौछारें जारी रह सकती हैं। आसमान में धुंध और बादल बने रहेंगे।
मध्य प्रदेश मौसम का पूर्वानुमान: 6 नवंबर के बाद
जैसे ही 5 नवंबर के बाद आसमान से बादल छंटेंगे और उत्तर भारत के पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाओं का रास्ता साफ होगा, मध्य प्रदेश के न्यूनतम तापमान (रात के पारे) में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की तेज गिरावट आएगी और पूरे प्रदेश में कड़ाके की ठंड की वास्तविक शुरुआत हो जाएगी।
तापमान का गणित: दिन में ठंडक, लेकिन रात का पारा क्यों बढ़ जाता है?
मौसम के इस बदलाव में एक दिलचस्प वैज्ञानिक पहलू यह है कि जब भी बेमौसम बादल छाते हैं, तो दिन में ठंडक महसूस होती है, लेकिन रात का तापमान अचानक थोड़ा बढ़ जाता है (यानी रात में उतनी ठंड नहीं लगती जितनी साफ आसमान में लगती है)।
तूफान के कारण मौसम के डिस्टरबेंस से प्रभावित किसानों के लिए सलाह
जिन किसानों की धान, सोयाबीन या मक्का की फसल कटकर खेतों के खलिहान में या कृषि उपज मंडियों में खुले में रखी है, वे तुरंत उसे सुरक्षित शेड के नीचे पहुंचाएं या मजबूत वाटरप्रूफ तिरपाल से ढक दें। फड़ के चारों ओर पानी की निकासी के लिए छोटी नाली जरूर बनाएं ताकि नीचे से नमी अनाज तक न पहुंचे।
अगले तीन दिनों तक (5 नवंबर तक) खड़ी फसलों या सब्जियों में किसी भी प्रकार के कीटनाशक दवाओं का छिड़काव न करें, क्योंकि बारिश होने पर दवा धुल जाएगी और आर्थिक नुकसान होगा।
जो किसान गेहूं, चना, मसूर या सरसों की बुवाई करने जा रहे हैं, वे हल्की बारिश होने की स्थिति में खेत की मिट्टी में प्राकृतिक नमी (बतर) का आकलन कर लें। इससे पलेवा (बुवाई से पहले की सिंचाई) का खर्च भी बच सकता है, लेकिन ज्यादा गीली मिट्टी में बीज डालने से बचें।
आम नागरिकों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा टिप्स
मौसम विभाग ने गरज-चमक (Thunderstorm and Lightning) की चेतावनी दी है। यदि आप खेत में या बाहर काम कर रहे हैं और अचानक काले बादल घिर आएं व बिजली चमकने लगे, तो कभी भी किसी बड़े पेड़, बिजली के खंभे या खुले टिन शेड के नीचे खड़े न हों। तुरंत किसी पक्के मकान के भीतर शरण लें।
दिन में हल्की उमस और शाम को अचानक ठंडी हवा चलने से बच्चों और बुजुर्गों को सर्दी-जुकाम या वायरल संक्रमण होने का खतरा सबसे अधिक होता है। सुबह और देर शाम बाहर निकलते समय हल्के गर्म कपड़े पहनें और गुनगुने पानी का सेवन करें।
महीनों बाद होने वाली पहली हल्की बारिश या बूंदाबांदी से सड़कों पर जमी धूल और गाड़ियों का तेल मिलकर सड़क को बेहद फिसलन भरा (Slippery) बना देते हैं। इसलिए दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक बारिश की शुरुआत में गति धीमी रखें और सुरक्षित दूरी बनाकर चलें।
कुल मिलाकर, चक्रवात 'मुरासु' मध्य प्रदेश से विदा लेते मानसून और दस्तक देती सर्दी के बीच एक अस्थायी बदलाव लेकर आया है। प्रशासन और मौसम केंद्र लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों से बचें और अपने जिले के स्थानीय मौसम बुलेटिन के अनुसार ही यात्रा व खेती के कार्यों की योजना बनाएं।

