News with knowledge: यात्री ने आसमान में उड़ रही फ्लाइट का इमरजेंसी डोर लॉक खोल दिया, जानिए कानून और फिजिक्स

Updesh Awasthee
मुंबई, 3 नवंबर 2026:
भारत की राजधानी दिल्ली से बाजीराव पेशवा के शहर पुणे के लिए रवाना हुई एक फ्लाइट जब आसमान में 35000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रही थी तब एक यात्री ने इमरजेंसी डोर लॉक ओपन कर दिया। उसको तत्काल हिरासत में लिया गया और मुकदमा दर्ज किया गया। आपके लिए जानना यह जरूरी है कि, इस तरह की हरकत करने से कानून की किन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाता है। ताकि सनद रहे और भविष्य में कोई ऐसी या इस तरह की दूसरी घटना ना करें:- 

Indigo फ्लाइट नंबर 6E 6884 की घटना

विमानन अधिकारियों और पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना इंडिगो की उड़ान संख्या 6E 6884 में घटी। यह विमान नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पुणे के लिए रवाना हुआ था। विमान में 19D नंबर सीट पर 33 वर्षीय यात्री गौरव सत्येंद्र रौतेला बैठे हुए थे। यह सीट विमान के आपातकालीन निकास के ठीक पास स्थित थी। उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद, जब विमान आसमान में ऊंचाई पकड़ रहा था, तभी 35000 फीट की ऊंचाई पर अचानक कॉकपिट और यात्री केबिन में चेतावनी अलार्म की तेज आवाज गूंजने लगी। अलार्म बजते ही तैनात फ्लाइट अटेंडेंट्स तुरंत उस दिशा में दौड़े। वहां देखा गया कि सीट संख्या 19D पर बैठे गौरव सत्येंद्र रौतेला ने इमरजेंसी एग्जिट डोर के हैंडल पर लगे सुरक्षा कवर (लीवर प्रोटेक्शन फ्लैप) को हटाकर उसे छूने और खोलने की कोशिश की थी। क्रू मेंबर्स ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को तुरंत संभाला और यात्री को कड़ी चेतावनी देकर अपनी निगरानी में ले लिया। 

गौरव ने कहा: मैं तो बस देख रहा था, इस बटन से क्या होता है

पुणे हवाई अड्डे पर विमान की सुरक्षित लैंडिंग के तुरंत बाद, इंडिगो के सुरक्षा अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया। विमान से उतरते ही आरोपी यात्री गौरव रौतेला को हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ के दौरान उसने दावा किया कि उसने यह सब जानबूझकर या दुर्भावना से नहीं किया था, बल्कि वह केवल उत्सुकता (कौतूहल) के कारण उस लीवर और उसके लाल सुरक्षा कवर को देख रहा था। उसका कहना था कि उसे यह अंदाजा नहीं था कि उस छोटे से प्लास्टिक कवर को छूने भर से पूरे विमान में अलार्म बज जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय हो जाएगी।

क्या गौरव का बयान माफी के योग्य है?

भारतीय न्याय संहिता एवं भारत के सभी कानून इस सिद्धांत पर आधारित है कि, भारत के सभी नागरिकों को नियमों की जानकारी है। कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि मुझे किसी नियम अथवा कानून की जानकारी नहीं थी इसलिए मैंने अपराध कर दिया। सिक्योरिटी कवर पर "इमरजेंसी" लिखा हुआ था। जब यात्रियों को आपातकाल की स्थिति में जीवन की रक्षा के उपाय बताए जाते हैं तब भी यह बताया जाता है कि इमरजेंसी डोर कहां पर है। इसलिए यह नहीं माना जा सकता कि यात्री को इमरजेंसी द्वारा के बारे में नहीं पता था। 

इस तरह की गलती करने पर क्या कार्रवाई होती है

पुणे एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में इंडिगो क्रू की औपचारिक शिकायत के आधार पर आरोपी यात्री के खिलाफ गंभीर कानूनी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है:
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125: यह धारा दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले किसी भी उतावलेपन या लापरवाही भरे कृत्य के लिए लगाई जाती है। यह धारा ऐसी सभी गतिविधियों पर लगाई जाती है जहां अज्ञानता के कारण ही सही लेकिन किसी व्यक्ति की लापरवाही अथवा उतावलेपन के कारण, किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन को खतरा उत्पन्न हो गया हो। इसके तहत 3 महीने जेल की सजा का प्रावधान है।
विमान अधिनियम (Aircraft Act, 1934 एवं संशोधित नियम): विमान की उड़ान सुरक्षा से खिलवाड़ करने, अनधिकृत उपकरणों से छेड़छाड़ करने और केबिन क्रू के अनिवार्य सुरक्षा निर्देशों का उल्लंघन करने के तहत गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई शुरू की गई है।
नो-फ्लाई लिस्ट की संभावना: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के नियमों के अनुसार, इस तरह की हरकत को अनियंत्रित यात्री व्यवहार (Unruly Passenger Behavior) की श्रेणी में रखा जाता है। एयरलाइन की आंतरिक समिति की जांच के बाद आरोपी यात्री पर 3 महीने से लेकर आजीवन हवाई यात्रा प्रतिबंध (नो-फ्लाई लिस्ट) लगाया जा सकता है। 

नॉलेज: क्या आसमान में उड़ती फ्लाइट का इमरजेंसी गेट ऐसे खोला जा सकता है

इस घटना के बाद जिज्ञासु व्यक्तियों एवं फिजिक्स के विद्यार्थियों के मन में सवाल उठता है कि यदि यात्री लीवर को खींच देता, तो क्या विमान का दरवाजा बीच हवा में खुल जाता? विमानन विज्ञान और एयरोडायनामिक्स के अनुसार, उड़ते हुए कमर्शियल विमान के दरवाजे को इंसान की शारीरिक ताकत से खोलना असंभव है। हवाई जहाज का केबिन एक बड़े प्रेशर कुकर की तरह होता है। जब विमान 30,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ता है, तो बाहर हवा का दबाव बहुत कम होता है, जबकि केबिन के अंदर यात्रियों की सांस लेने की सुविधा के लिए कृत्रिम रूप से उच्च वायुदाब (केबिन प्रेशराइजेशन) बनाए रखा जाता है। विमान के अधिकांश आपातकालीन दरवाजे 'प्लग डोर' (Plug Door) डिजाइन पर बने होते हैं। अंदर का भारी दबाव दरवाजे को बाहर की ओर कसकर दबाए रखता है। इसे खोलने के लिए कई टन के दबाव के विरुद्ध खींचना पड़ता है, जो किसी भी इंसान के बस की बात नहीं है। फिर भी, लीवर से छेड़छाड़ करने पर सेंसर खराब हो सकते हैं या लैंडिंग के वक्त दरवाजा अनियंत्रित हो सकता है, जिससे भीषण हादसा संभव है। रिपोर्ट: सचिन प्रजापति।

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