जबलपुर, 2 नवंबर 2026: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष-विधायक हेमंत खण्डेलवाल, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल 2 नवंबर को जबलपुर में निकाली गई 'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' पदयात्रा में शामिल हुए। उन्होंने जबलपुर के शहीद स्मारक गोल बाजार में उमड़े जनसैलाब को संबोधित भी किया। तीनों नेताओं ने मिलकर जबलपुर की जनता को राहुल गांधी और कांग्रेस की असलियत से रूबरू करवाया।
जो सुभाषचंद्र बोस के नहीं हुए, वह किसी के भी सगे नहीं हो सकते: डॉ मोहन यादव
इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह वही कांग्रेस पार्टी है जो नेताजी सुभाषचंद्र बोस की सगी नहीं हुई। जबलपुर में ही कांग्रेस के चुनाव में विजयी होने के बाद जवाहरलाल नेहरू को नेता घोषित किया गया था। जो नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नहीं हुए, वह कांग्रेस नेता किसी के भी सगे नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी न्याय की बात करते हैं, उनकी दादी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को नहीं माना और सत्ता में बने रहने के लिए देश में आपातकाल लगाकर लोकतंत्र का गला घोंटा था। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश और देश की जनता यह पूरी तरह जानती है कि कांग्रेस पार्टी देश की सत्ता संभालने लायक नहीं बची है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान में देश के 80 प्रतिशत क्षेत्र में कांग्रेस समाप्त हो चुकी है। जिन 20 प्रतिशत क्षेत्र में कांग्रेस कुछ बची भी है, वह भी आने वाले चुनावों में समाप्त हो जाएगी।
जबलपुर में उमड़े जनसैलाब ने बता दिया कि लोकतंत्र का गला घोंटने वाली कांग्रेस पार्टी का वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में पूरे देश से सफाया हो जाएगा। लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस को पहले अपने इतिहास में झांकना चाहिए। जिस पार्टी ने देश पर आपातकाल थोपकर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का काम किया, उसे आज लोकतंत्र पर उपदेश देने का नैतिक अधिकार नहीं है। जबलपुर की जनता कांग्रेस की राजनैतिक बेईमानी और उसके इतिहास को भली-भांति जानती है।
कांग्रेस चुनाव में हारने के बाद कभी ईवीएम, कभी चुनाव आयोग और कभी एसआईआर को लेकर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने पर लोकतंत्र की जीत और हारने पर संस्थाओं पर आरोप लगाना कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा बन गया है। उन्होंने कहा कि देश की न्यायपालिका लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला है और जबलपुर की धरती न्याय के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है।
कांग्रेस में प्रधानमंत्री पद एक परिवार तक सीमित रखने की मानसिकता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यादव ने कहा कि कांग्रेस में प्रधानमंत्री का पद भी एक परिवार तक सीमित रखने की मानसिकता रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस धारणा को बदलते हुए एक सामान्य गरीब परिवार से आने वाले व्यक्ति के लिए देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का रास्ता प्रशस्त किया है। आज देश की जनता परिवारवाद नहीं, बल्कि काम और नेतृत्व के आधार पर निर्णय ले रही है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का मान-सम्मान दुनिया में बढ़ा है। देश विकास, सुशासन और आत्मनिर्भरता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। कांग्रेस को जनता के इस विश्वास और जनादेश का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। आज बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि जनता लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व के प्रति अपना विश्वास व्यक्त कर रही है।
देश में अराजकता फैलाने का प्रयास: केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल
केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि राहुल गांधी लोकतांत्रिक संस्थाओं को धमकाकर देश में अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी और उसके नेता अपनी साख खो चुके हैं, इसलिए संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं। लोकतंत्र को बचाने और अराजकता फैलाने वालों को सबक सिखाने के लिए जनता आगे आए। पदयात्रा में जिस उत्साह और बड़ी संख्या में जनता की सहभागिता देखने को मिली है, वह इस बात का प्रमाण है कि देश की जनता लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 6 अक्टूबर को राहुल गांधी और उनके कुछ विपक्षी दलों के सांसद चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे। चुनाव आयोग ने उनसे पूछा कि आप कितने लोग मिलना चाहते हैं और आपका ज्ञापन क्या है? आप प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम दे दीजिए, आपसे मुलाकात की जाएगी। लेकिन उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम नहीं दिए और इसके बाद अराजकता फैलाने के लिए सड़क पर उतर गए।
उन्होंने कहा कि आपने वह पूरा दृश्य देखा होगा कि किस तरह धक्का-मुक्की हुई। यह सब अराजकता का ही उदाहरण है। विपक्षी दलों के 10 लोग राष्ट्रपति से मिले। राष्ट्रपति ने उनसे कहा कि आप जो आरोप लगा रहे हैं, उसके प्रमाण प्रस्तुत कीजिए। लेकिन वे कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि यह पहली बार हुआ कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत जी को सामने आकर इस विषय पर अपनी बात रखनी पड़ी। 11 अक्टूबर की रात और 12 अक्टूबर 2026 को उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में कोई भी व्यक्ति याचिका के माध्यम से अपनी बात रख सकता है। हम याचिकाओं को सुनते हैं। यदि आपको याचिका लगानी है तो लगाइए, हम सुनेंगे। लेकिन इस तरह कुछ करने और धमकाने वाली भाषा का हम समर्थन नहीं करते।
भारत को अस्थिर करने की कोशिश: हेमंत खण्डेलवाल
वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करने वाले राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को यह मालूम होना चाहिए कि कांग्रेस के शासनकाल में कई बार एसआईआर हुआ है। भाजपा के शासनकाल में एक बार पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी और दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में ही एसआईआर हुआ है। इसके अलावा आजादी के बाद जितने भी एसआईआर देश में हुए हैं, सभी कांग्रेस के शासनकाल में हुए हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी सबसे अधिक चुनाव हारने के मामले में विश्व के सबसे बड़े नेता बन गए हैं।
विदेशी ताकतों से धन से लेकर भारत को अस्थित करने की कोशिश करने वालों को जनता बेनकाब करे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा किसी एक दल की नहीं, हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। जबलपुर की धरती पर हजारों की संख्या में नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि देश की जनता लोकतंत्र विरोधी ताकतों और अराजकता फैलाने वाली राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी। कांग्रेस और राहुल गांधी एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं, जबकि यह प्रक्रिया कांग्रेस के शासनकाल में पहले कई बार हो चुकी है। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी देश को बताए कि वह मतदाता सूची के शुद्धिकरण का विरोध क्यों कर रही है?
क्या कांग्रेस चाहती है कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में बने रहें, मृत व्यक्तियों के नाम नहीं हटाए जाएं और एक ही व्यक्ति के नाम पर कई जगह मतदान की स्थिति बनी रहे? उन्होंने कहा कि चुनाव में लगातार पराजय का सामना कर रहे राहुल गांधी लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक विफलता छिपाने का प्रयास कर रहे हैं। चुनाव में हारने पर कभी ईवीएम, कभी चुनाव आयोग और कभी एसआईआर को निशाना बनाना कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा बन गया है। लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था बेहद आवश्यक है।
इन स्थानों से निकली पदयात्रा, हुआ भव्य स्वागत
‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ‘ विशाल पदयात्रा शहीद स्मारक गोल बाजार से प्रारंभ होकर श्याम टॉकीज, सुपर मार्केट, लार्डगंज चौक, धमण्डी चौक, बड़ा फुहारा, खजांची चौक, अंधेरदेव, तुलाराम चौक, करमचंद चौक, बगलामुखी मंदिर, मालवीय चौक से शहीद स्मारक होते हुए पुनः गोल बाजार पहुंचकर समापन हुआ। यात्रा के ढाई किलोमीटर के मार्ग में 80 स्वागत मंच लगाए गए। इसमें समाजों, स्वयंसेवी संगठनों, खेल संगठन के पदाधिकारियों ने पुष्पवर्षा कर पदयात्रा का स्वागत किया। हजारों की संख्या में अधिवक्ता, व्यापारी, महिलाओं ने हाथों में तिरंगा ध्वज लेकर देशभक्ति के नारों के साथ लोकतंत्र की रक्षा के लिए पदयात्रा में शामिल हुए।
रिपोर्ट: आलोक शर्मा।