DRM BHOPAL का जवाब: हमने तो ट्रेन को केवल 7 मिनट लेट किया है, 140 मिनट पहले से ही थी

Updesh Awasthee
भोपाल, 5 नवंबर 2026:
आम आदमी नहीं समझ पाएगा लेकिन मैनेजमेंट के लोग ठीक प्रकार से समझते हैं कि यदि ऐसा कोई जवाब वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दिया जाता तो इस जवाब के कारण उनकी सेवा मुक्ति पर विचार किया जाने लगता। दरअसल, डीआरएम भोपाल हैवी ट्रैफिक लोड संभालने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। वह रेलवे ट्रैक पर ट्रैफिक लोड को एक्ट आफ गॉड की तरह बता रहे हैं। 

भोपाल रेल मंडल में पिछले एक महीने से ट्रेनें लेट चल रही हैं?

रेलवे का हिसाब किताब एक बार फिर पहले की तरह कचरा होता जा रहा है। यात्रियों की सुविधा के नाम पर किराए में मनमानी वृद्धि की, सब्सिडी खत्म कर दी, रेलवे स्टेशन की फ्री फैसेलिटीज को पेड (प्राइवेट) कर दिया, इस सब के बावजूद नतीजा यह है की ट्रेन आज भी टाइम पर नहीं आती। जबकि रेल मंत्रालय को पता है कि, लोग रेलवे स्टेशन पर पर्यटन के लिए नहीं आते। फेस्टिवल सीजन में यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (X) पर यात्री पिनाकी रंजन (@PinakiRanjanMu4) ने शिकायत दर्ज कराते हुए रेलवे सेवा (@RailwaySeva) और रेल मंत्रालय (@RailMinIndia) को टैग किया। यात्री ने बताया कि भोपाल से धनबाद जाने वाली ट्रेन संख्या 11631 बीना जंक्शन पर चल रहे इंटरलॉकिंग कार्य के कारण देरी से चल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले एक महीने से ट्रेनें लेट चल रही हैं, ऐसे में त्योहार के समय लोग अपने घर कैसे पहुंचेंगे। 

डीआरएम भोपाल का जवाब

यात्री की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए रेलवे सेवा (@RailwaySeva) ने मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों (@Bhopaldivision) को भेज दिया। मामले पर डीआरएम भोपाल (@BhopalDivision) ने जवाब देते हुए बताया कि ट्रेन संख्या 11632 जबलपुर मंडल से ही 140 मिनट की देरी से प्राप्त हुई थी। इसके अतिरिक्त, भोपाल मंडल में भारी ट्रेन ट्रैफिक होने के कारण देरी में 7 मिनट का और इजाफा हो गया। 

डीआरएम भोपाल: गैर जिम्मेदार

डीआरएम भोपाल ने जिस प्रकार से जवाब दिया है, पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना है। ऐसा लग रहा है जैसे डीआरएम भोपाल ने यात्री से कहा कि भाई साहब आप तो पहले से ही घायल होकर आए हैं, हमने तो बस एक घूंसा मारा है। यदि आप मरणासन्न हो गए तो इसमें हमारी कोई गलती नहीं है। या फिर शायद डीआरएम भोपाल यह कहना चाहते हैं कि, डीआरएम जबलपुर ने आपको 140 मिनट लेट किया, उनकी शिकायत करो। हमने तो सिर्फ 7 मिनट लेट किया है, हमारी शिकायत क्यों कर रहे हो।

यात्री ने अपनी शिकायत में बताया है कि "पिछले एक महीने से ट्रेनें लेट चल रही हैं"। डीआरएम भोपाल ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने अपने जवाब में स्वीकार किया है कि वह भारी ट्रेन ट्रैफिक को मैनेज करने में सक्षम नहीं है। उनके मैनेजमेंट फेल्योर के कारण ट्रेन 7 मिनट लेट हो गई, और गजब की बात, डीआरएम जैसा सीनियर ऑफिसर कह रहा है कि ट्रेन पहले से ही 140 मिनट लेट थी, हमने तो केवल 7 मिनट की देरी की है। मतलब इस दलील का कोई लॉजिक बनता है? यदि ट्रेन देरी से आएगी तो आप उसकी देरी में इजाफा कर देंगे और इसके लिए आप स्वयं को जिम्मेदार भी नहीं मानते। 

रेल मंत्रालय को समाधान नहीं सिर्फ जवाब चाहिए?

यहां बड़ा सवाल रेल मंत्रालय से भी बनता है। उनको यात्रियों की समस्या का समाधान चाहिए या फिर केवल जवाब चाहिए। इस मामले में स्पष्ट होता है कि पिछले एक महीने से समस्या बनी हुई है और सॉल्व नहीं हो रही है। इस मामले में यह भी स्पष्ट होता है कि डीआरएम जबलपुर भी हैवी ट्रेन ट्रैफिक कंट्रोल करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। इसका मतलब हुआ कि डीआरएम के पद शायद गलत व्यक्ति की नियुक्ति हो गई है। या फिर जो व्यक्ति डीआरएम को नियुक्त करता है, वही गलत है?
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