दीपावली भारत का सबसे बड़ा त्यौहार है, जिसे गृहस्थ, सन्यासी, राजा, फकीर और कारोबारी सभी एक साथ मिलकर मानते हैं। सभी अपने-अपने विधि विधान से पूजा पाठ करते हैं। सभी के दीपावली पूजन के मुहूर्त अलग होते हैं। यहां आपको घर, दुकान, ऑफिस और कारखाना इत्यादि में दीपावली पूजन के मुहूर्त बताए गए हैं, जो सभी वर्गों के लिए भी है। हम यहां पर विद्यार्थी, बेरोजगार, गृहस्थ, सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी, उद्योगपति एवं व्यापारी, राजनेता, प्रोफेशनल्स (डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, शिक्षक, पत्रकार एवं अन्य सभी प्रकार के सेवा कार्य) और आध्यात्मिक साधकों के लिए मुहूर्त टाइम बता रहे हैं:-
1. विद्यार्थियों के लिए दीपावली पूजा का मुहूर्त
मुख्य पूजा मुहूर्त: शाम 6:03 से 8:01 बजे - वृषभ लग्न
लक्ष्मी-गणेश की पारिवारिक पूजा इसी समय करें।
विशेष विद्या-साधना का समय
अमृत/शुभ काल में दिन के समय पुस्तक, लेखनी और अध्ययन सामग्री का पूजन करें। स्थानीय पंचांग गणना में दोपहर 1:26/1:27 से लगभग 2:50 बजे शुभ चौघड़िया है।
विशेष विधान: मुख्य पूजा में गणेशजी के बाद सरस्वती का स्मरण करें और अपनी पुस्तक या लेखनी को पूजा-स्थान पर रखें।
2. बेरोजगार अभ्यर्थियों के लिए दीपावली पूजा का मुहूर्त
मुख्य दीपावली पूजा: 6:03–8:01 PM - वृषभ लग्न
विशेष कर्म-संकल्प का समय
दिन में शुभ चौघड़िया, लगभग 1:26/1:27–2:50 PM, में आवेदन-पत्र, परीक्षा सामग्री या अपने कौशल से संबंधित वस्तु का पूजन/संकल्प करें।
विशेष विधान
मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजा में यह संकल्प रखें:
“मम योग्यता-अनुरूपं धर्मसम्मतं कर्मोपार्जनं अवसरप्राप्तिश्च भवतु।”
अर्थात् योग्यता के अनुरूप उचित कार्य और अवसर की प्राप्ति हो।
3. गृहस्थ एवं परिवार सहित पूजा करने वालों के लिए दीपावली पूजा का मुहूर्त
सर्वश्रेष्ठ समय: शाम 6:03 से रात्रि 8:01 बजे
यही इस वर्ग के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त है, क्योंकि: अमावस्या + प्रदोषकाल + स्थिर वृषभ लग्न का संयोग मिलता है।
- 5:30–6:00: परिवार की तैयारी और दीप प्रज्वलन।
- 6:03–6:20: संकल्प एवं गणेश पूजन।
- 6:20–7:15: लक्ष्मी पूजन।
- 7:15–7:40: कुबेर/बहियों/गृह-समृद्धि का पूजन।
- 7:40–8:01: आरती और प्रसाद।
परिवार के लिए पूरा मुहूर्त 6:03–8:01 उपयोग करना उचित है।
4. सरकारी कर्मचारी एवं अधिकारी वर्ग दीपावली पूजा का मुहूर्त
मुख्य पूजा मुहूर्त: 6:03–8:01 PM - वृषभ लग्न
विशेष कार्य-संकल्प: शाम 6:03 बजे पूजा प्रारंभ करते समय कार्यालयीन डायरी, लेखनी या अपने कर्तव्य का प्रतीक रखें।
आपके लिए अलग लग्न-मुहूर्त की शास्त्रीय आवश्यकता नहीं है। दीपावली का मुख्य विधान समान रहेगा।
विशेष संकल्प: पद-प्रतिष्ठा से अधिक कर्तव्य, निष्पक्षता और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
5. व्यापारी एवं कारोबारी वर्ग दीपावली पूजा का मुहूर्त
व्यापारी वर्ग के लिए दो स्तर उपयोगी हैं:
(A) मुख्य लक्ष्मी-पूजा: 6:03–8:01 PM - वृषभ स्थिर लग्न
व्यवसाय की स्थिरता और गृह/प्रतिष्ठान की समृद्धि के लिए यही प्रमुख समय है।
(B) बही-खाता या व्यावसायिक संकल्प
स्थानीय गणना में अमावस्या के दौरान शुभ/अमृत चौघड़िया भी उपलब्ध हैं:
- 11:28 AM–12:03 PM - अमृत
- 1:26/1:27 PM–2:50/2:51 PM - शुभ
- 5:37/5:38 PM–7:13 PM - शुभ
- 7:13 PM–8:50 PM - अमृत
विशेष अनुशंसा: यदि परंपरा में बही-खाता पूजन है, तो मुख्य लक्ष्मी पूजा वृषभ लग्न में करें; अलग से लेखा-संकल्प दिन के शुभ चौघड़िया में किया जा सकता है।
6. राजनेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता दीपावली पूजा का मुहूर्त
मुख्य पूजा: 6:03–8:01 PM
विशेष साधना/संकल्प: सूर्यास्त के बाद, मुख्य पूजा के आरंभ में जनसेवा और लोकहित का संकल्प करें।
सर्वोत्तम संयोजन: वृषभ लग्न में लक्ष्मी-गणेश पूजा + दीपदान/दान/सेवा का कार्य।
7. डॉक्टर, शिक्षक, पत्रकार एवं सेवा-कार्य से जुड़े लोग दीपावली पूजा का मुहूर्त
मुख्य पूजा: 6:03–8:01 PM
विशेष उपासना: अपने पेशे के प्रतीक (जैसे पुस्तक, लेखनी या सेवा-साधन) को पूजा के बाद प्रणाम करें।
शिक्षक: विद्या और सद्बुद्धि का संकल्प।
डॉक्टर: करुणा और सही निर्णय का संकल्प।
पत्रकार: सत्य और विवेक का संकल्प।
सेवा-कार्यकर्ता: निष्काम सेवा का संकल्प।
8. गृहस्थ-साधक के लिए दीपावली पूजा का मुहूर्त
6:03–8:01 PM : वृषभ लग्न में सामान्य दीपावली पूजा।
ध्यान और रात्रि-साधना के लिए: निशीथ काल: लगभग 11:38 PM–12:30 AM
इसके बाद सिंह लग्न लगभग 12:31 AM–2:43 AM तक है। यह समय कुछ विशिष्ट रात्रि-उपासना और तांत्रिक/शाक्त परंपराओं में महत्वपूर्ण हो सकता है। सामान्य साधक को अपनी गुरु-परंपरा के बिना विशेष तांत्रिक अनुष्ठान नहीं करना चाहिए।
ध्यानाभिलाषी के लिए सुरक्षित और सरल विधान: निशीथ काल में शांत ध्यान, अपने गुरु-मंत्र का जप या इष्टदेव का स्मरण।
दीपावली पूजा के लिए जरूरी सामग्रियां
लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, लक्ष्मी जी को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, लाल कपड़ा, सप्तधान्य, गुलाल, लौंग, अगरबत्ती, हल्दी, अर्घ्य पात्र, फूलों की माला और खुले फूल, सुपारी, सिंदूर, इत्र, इलायची, कपूर, केसर, सीताफल, कमलगट्टे, कुशा, कुंकु, साबुत धनिया (जिसे धनतेरस पर खरीदा हो), खील-बताशे, गंगाजल, देसी घी, चंदन, चांदी का सिक्का, अक्षत, दही, दीपक, दूध, लौंग लगा पान, दूब घास, गेहूं, धूप बत्ती, मिठाई, पंचमेवा, पंच पल्लव (गूलर, गांव, आम, पाकर और बड़ के पत्ते), तेल, मौली, रूई, पांच यज्ञोपवीत (धागा), रोली, लाल कपड़ा, चीनी, शहद, नारियल और हल्दी की गांठ। प्रस्तुति: श्यामला ज्योतिष पीठ, भोपाल।

