भोपाल समाचार, 6 नवंबर 2026: मध्य प्रदेश की मोहन सरकार द्वारा नए एकीकृत भूमि विकास एवं भवन प्रोत्साहन नियम-2026 के ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसके तहत मध्य प्रदेश में 18 प्रकार के कंस्ट्रक्शन एवं रिपेयरिंग के काम के लिए किसी भी प्रकार की परमिशन की जरूरत नहीं रहेगी। नगर निगम अथवा नगर पालिका के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यदि आपने फीस भर दी है तो आपकी फीस की रसीदी ही परमिशन मानी जाएगी।
चक्कर का चक्कर खत्म: फीस जमा करते ही बिल्डिंग परमिशन मिल जाएगी
मध्य प्रदेश में अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरी प्रशासनिक पहल सामने आई है। मोहन सरकार के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने भवन निर्माण की मंजूरी से जुड़ी जटिल और समय लेने वाली प्रक्रियाओं को खत्म करने के लिए 'मध्यप्रदेश एकीकृत भूमि विकास एवं भवन प्रोत्साहन नियम-2026' का विस्तृत ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस नए ड्राफ्ट के लागू होते ही 2152 वर्गफीट (200 वर्गमीटर) तक के भूखंडों पर मकान बनाने के लिए नगर निगम, नगरपालिका या नगर परिषद कार्यालयों के चक्कर काटने और महीनों तक फाइलों के आगे बढ़ने का इंतजार करने की मजबूरी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। नागरिक अब केवल ऑनलाइन शुल्क का भुगतान कर और एक निर्धारित स्वघोषणा पत्र (सेल्फ-डिक्लेरेशन) अपलोड कर तत्काल वैध निर्माण अनुमति प्राप्त कर सकेंगे।
मध्यप्रदेश एकीकृत भूमि विकास एवं भवन प्रोत्साहन नियम-2026 की समीक्षा
प्रस्तावित नियमों के प्रारूप को अंतिम रूप देने से पहले तकनीकी और प्रशासनिक समीक्षा के लिए विभिन्न विशेषज्ञ संस्थाओं और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के प्रतिनिधियों के साथ साझा किया गया है। सुझावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस बड़े नीतिगत सुधार का सीधा उद्देश्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देना, लालफीताशाही पर अंकुश लगाना और आम नागरिकों को बिचौलियों व कथित अवैध वसूली के जाल से मुक्ति दिलाना है।
नए ड्राफ्ट के सबसे बड़े बदलाव: किस आकार के प्लॉट पर क्या बदलेगा नियम
नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा तैयार किए गए इस पॉलिसी डॉक्युमेंट में रेजिडेंशियल प्लॉट्स को साइज और कंपलेक्सिटी के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, ताकि स्मॉल एंड मिडिल क्लास प्लॉट धारकों को सीधे तौर पर त्वरित राहत दी जा सके:
2152 वर्गफीट तक की बिल्डिंग परमिशन का ऑटो अप्रूवल
यह श्रेणी आम मध्यमवर्गीय परिवारों की सबसे बड़ी आबादी को कवर करती है। इस आकार तक के स्वतंत्र मकान के निर्माण के लिए अब किसी अधिकारी के हस्ताक्षर या भौतिक जांच की अग्रिम प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। तय सरकारी विकास शुल्क ऑनलाइन जमा करने और मानकों के अनुरूप निर्माण की शपथ देने पर सिस्टम द्वारा 'स्वतः अनुमति' (ऑटो-अप्रूवल) जारी कर दी जाएगी।
2153 से 3229 वर्गफीट (300 वर्गमीटर) तक के प्लॉट - आर्किटेक्ट्स
इस मध्यम आकार के भूखंडों के लिए सरकार ने अधिकृत आर्किटेक्ट्स पर भरोसा जताया है। 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले पंजीकृत आर्किटेक्ट सीधे नक्शे की तकनीकी जांच कर उसे स्वीकृत कर सकेंगे। इसके लिए भी नागरिकों को नगर निकाय के कार्यालय में आवेदन अटकाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
3229 वर्गफीट से बड़े प्लॉट पर कमर्शियल बिल्डिंग: ऑनलाइन विंडो सिस्टम
बड़े आवासीय परिसरों, बहुमंजिला इमारतों और व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए नियमित प्रक्रिया के तहत निर्धारित समयावधि में ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम से स्वीकृति दी जाएगी।
18 प्रकार के निर्माण व मरम्मत कार्य बिना किसी मंजूरी के किए जा सकेंगे
अब तक के नियमों में एक बड़ी विसंगति यह है कि यदि किसी व्यक्ति को अपने पहले से बने मकान में खिड़की बदलनी हो, बाउंड्रीवॉल बनानी हो या प्लास्टर करवाना हो, तो नगर निगम मथुरा नगर पालिका की अनुमति की जरूरत होती है। बिना अनुमति के यदि मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाए या फिर डिजाइन में कोई चेंज कर दिया जाए तो कई बार नोटिस आ जाता है और काम रोकना पड़ता है। नए ड्राफ्ट ने इस मनमानी पर पूरी तरह ताला लगा दिया है। ड्राफ्ट में स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि मकान मालिक को 18 तरह के सामान्य व गैर-संरचनात्मक (नॉन-स्ट्रक्चरल) निर्माण और नवीनीकरण कार्यों के लिए किसी भी निकाय से कोई पूर्व अनुमति या शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होगी।
- मकान के चारों ओर सुरक्षा बाउंड्रीवॉल और प्रवेश द्वार (मेन गेट) का निर्माण।
- खुली छत या परिसर में धूप-बारिश से बचाव के लिए अस्थाई हल्का शेड डालना।
- कमरे की मौजूदा खिड़कियां, दरवाजे या वेंटिलेटर बदलना अथवा उनकी जगह में सामान्य फेरबदल।
- मकान के भीतर गैर-लोडबेयरिंग पार्टीशन दीवार खड़ी करके कमरों का आंतरिक विभाजन करना।
- फर्श की पुरानी टाइल्स, संगमरमर या कोटा स्टोन बदलना और नया फर्श बिछाना।
- आंतरिक व बाहरी दीवारों का प्लास्टर, रंगाई-पुताई, वॉटरप्रूफिंग और पीओपी कार्य।
- घरेलू सीवरेज लाइन, सोक पिट, सेप्टिक टैंक या रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण व मरम्मत।
- किचन स्लैब बदलना, मॉड्यूलर किचन की फिटिंग और बाथरूम सैनिटरी उपकरणों का नवीनीकरण।
- छत पर पानी की टंकी, सौर ऊर्जा पैनल (सोलर रूफटॉप) और सुरक्षा रेलिंग लगाना।
- फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में बड़ी राहत: पार्किंग, बेसमेंट और बालकनी दायरे से बाहर
भवन निर्माण नियमों में सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी पहलू फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) होता है, जो यह निर्धारित करता है कि किसी भूखंड के कुल क्षेत्रफल के अनुपात में कितना कुल कवर्ड एरिया (निर्मित क्षेत्र) बनाया जा सकता है। पुराने नियमों में बालकनी, पार्किंग शेड और बेसमेंट को भी एफएआर में गिने जाने के कारण लोगों को रहने के लिए कम कमरा मिलता था या फिर वे नियमों का उल्लंघन करने को विवश होते थे।
नए ड्राफ्ट में एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) के नियमों को व्यावहारिक और नागरिक-हितैषी बनाया गया है। तय शर्तों के अधीन अब बेसमेंट, वाहनों की पार्किंग का स्थान और खुली बालकनी को एफएआर की कुल गणना से बाहर (फ्री फ्रॉम एफएआर) रखा जाएगा। इसका सीधा लाभ यह होगा कि आम नागरिक अपने आवंटित प्लॉट पर बेहतर व हवादार मकान बना सकेंगे और उन्हें पार्किंग या बालकनी बनाने के बदले अपने कमरों का आकार छोटा नहीं करना पड़ेगा।
ग्रीन बिल्डिंग बनाने पर मिलेगा अतिरिक्त निर्माण क्षेत्र
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के इस ड्राफ्ट में केवल कंक्रीट के विस्तार पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी आर्थिक व व्यावहारिक प्रोत्साहन से जोड़ा गया है। यदि कोई बिल्डर या भवन स्वामी अपनी इमारत को निर्धारित मानकों के अनुसार 'ग्रीन बिल्डिंग' (हरित भवन) के रूप में विकसित करता है, तो उसे बेस एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) पर 3 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक का अतिरिक्त एफएआर इंसेंटिव के रूप में दिया जाएगा।
ग्रीन बिल्डिंग के अंतर्गत सौर ऊर्जा का उपयोग, प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन की प्रचुर व्यवस्था, ऊर्जा दक्ष उपकरण, सीवेज ट्रीटमेंट और शून्य अपशिष्ट जल निकासी (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इस प्रोत्साहन से शहरों में ऊर्जा की खपत घटेगी और पर्यावरण अनुकूल निर्माण को स्वतः बढ़ावा मिलेगा।
छोटे शहरों में भी हाईराइज इमारतों का रास्ता साफ
मध्यप्रदेश के टियर-2 और टियर-3 शहर जैसे ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, रीवा और रतलाम में बढ़ती आबादी और जमीन की सीमित उपलब्धता को देखते हुए हाईराइज इमारतों के नियमों को उदार बनाया गया है। अब बहुमंजिला इमारतों की अनुमति केवल शहर की श्रेणी पर नहीं, बल्कि भूखंड के सामने उपलब्ध सड़क की चौड़ाई और प्लॉट के कुल क्षेत्रफल पर आधारित होगी। इससे छोटे शहरों में भी सुनियोजित हाईराइज आवासीय परिसरों और व्यावसायिक केंद्रों के निर्माण में तेजी आएगी।
मिक्स लैंड यूज़ के प्रावधान
इसके साथ ही 'मिश्रित भूमि उपयोग' (मिक्स लैंड यूज़) के प्रावधानों को मास्टर प्लान के तहत विस्तार दिया गया है। इसके तहत आवासीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग तय सीमा और नियमों के भीतर अपने घर के एक हिस्से में क्लीनिक, वकालत का दफ्तर, सीए फर्म, ट्यूशन सेंटर, ब्यूटी पार्लर या रोजमर्रा की जरूरतों की छोटी किराना दुकान संचालित कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें भारी-भरकम व्यावसायिक लैंड-यूज़ कन्वर्जन की जटिल औपचारिकताओं से नहीं जूझना पड़ेगा।
आग से बचाव (फायर सेफ्टी), भूकंपरोधी ढांचे और संरचनात्मक स्थिरता (स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी) के मूल नियमों में कोई ढील नहीं दी गई है।
पब्लिक और रियल एस्टेट सेक्टर पर क्या होगा असर
मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम न केवल आम नागरिक के जीवन को सुगम बनाएगा, बल्कि राज्य की शहरी अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा। अब तक छोटे मकान की अनुमति लेने में महीनों का समय और हजारों रुपये का अतिरिक्त खर्च अनौपचारिक तरीकों में चला जाता था। स्वतः अनुमति मिलने से निर्माण कार्य तय समय पर शुरू हो सकेंगे, जिससे निर्माण सामग्री (सीमेंट, सरिया, ईंट, रेत) के व्यापार में तेजी आएगी और लाखों दिहाड़ी श्रमिकों, राजमिस्त्रियों व कारीगरों को नियमित रोजगार मिलेगा।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सभी हितधारकों के सुझावों को शामिल करने के उपरांत इस नीति को अंतिम रूप देकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। यह सुधार मध्यप्रदेश के शहरी प्रशासन के इतिहास में नागरिक सशक्तिकरण और न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन (मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस) की दिशा में एक युगांतरकारी कदम साबित होने जा रहा है। रिपोर्ट: ललित मुद्गल।

