भोपाल, 11 अक्टूबर 2026: मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में कांड हो गया। दुनिया भर में पर्यावरण और प्रदूषण का अध्ययन करके जनता को सुरक्षित करने के लिए सरकार को सुझाव देने वाले संस्थान में विद्यार्थियों के पोषण को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता नहीं है। दूषित भोजन खाने से हॉस्टल के कई विद्यार्थी बीमार हो गए। इनमें से 40 की तबीयत ज्यादा खराब हो गई जिन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
खाना और पानी दोनों ही दूषित
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MANIT) में भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार रात हॉस्टल नंबर-10 के सीडी ब्लॉक में मेस का खाना खाने के बाद करीब 40 विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ गई। बीमार विद्यार्थियों में उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसे लक्षण सामने आए। इसके बाद सभी को उपचार के लिए शारदा अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना से हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के बीच चिंता का माहौल बन गया है।
कैरेक्टर की टीम खाना पूर्ति कर रही है
घटना की जानकारी मिलने के बाद शनिवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम संबंधित मेस पहुंची। अधिकारियों ने भोजन तैयार करने की प्रक्रिया, खाद्य पदार्थों के भंडारण और साफ-सफाई की व्यवस्था का निरीक्षण किया। भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिए कुल सात नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं। इनमें उड़द दाल, मूंगफली दाना और मोटी सेवई के तीन विधिक नमूने शामिल हैं। इसके अलावा चना दाल, छोला, चावल और अरहर दाल के चार सर्विलांस नमूने लिए गए हैं।
बिना लाइसेंस के मेस संचालित, कलेक्टर की टीम ने कभी चेक ही नहीं किया
जांच के दौरान मेस के बिना लाइसेंस संचालित होने और अन्य खामियों की जानकारी सामने आई है। लाइसेंस की जांच करना कलेक्टर की टीम में शामिल खाद्य अधिकारियों की जिम्मेदारी है, लेकिन कलेक्टर की टीम ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। जबकि भोपाल शहर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम हर रोज कोई ना कोई कार्रवाई करती है। देखने में आता है कि ज्यादातर कार्रवाइयां या तो किसी नेता के कहने पर, की जाती है या फिर ऐसे व्यापारियों क्या की जाती है जहां से मोटी रिश्वत मिलने की गुंजाइश हो। रिकॉर्ड उठा कर देख लीजिए, कलेक्टर की टीम ने प्रेस नोट में जिन रेस्टोरेंट को ग्राहकों के जीवन से खिलवाड़ करने वाला बताया था, रिपोर्ट में उनका क्लीन चिट दी गई। NIT जैसी संस्थाओं से रिश्वत मिलने की गुंजाइश नहीं होती, इसलिए यहां पर कलेक्टर की टीम जांच भी नहीं करती।
तीन महीने पहले भी बीमार हुए थे विद्यार्थी
मैनिट में विद्यार्थियों के मेस का भोजन करने के बाद बीमार पड़ने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 17 जुलाई 2026 को हॉस्टल नंबर-9 और 11 की मेस में खाना खाने के बाद कई विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ गई थी। उस समय भी खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने निरीक्षण किया था और जांच के लिए नमूने लिए थे। हालांकि, पिछली घटना के बाद नमूनों की रिपोर्ट आने पर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक न तो जांच रिपोर्ट सामने आई है और न ही किसी कार्रवाई की पुष्टि हुई है।
अप्रैल 2025 में भी बीमार पड़े थे 15 छात्र
मैनिट की मेस में भोजन की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। 13 अप्रैल 2025 को हॉस्टल नंबर-4 की मेस का खाना खाने के बाद करीब 15 विद्यार्थी बीमार हो गए थे। उस मामले में भी जांच के दौरान अनियमितताएं पाई गई थीं। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने संस्थान की मेस व्यवस्था, खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि ताजा मामले में नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

