भोपाल, 6 अक्टूबर 2026: शहर के करोंद क्षेत्र में स्थित SRISHTI HOSPITAL KAROND BHOPAL के संचालक श्री राजकुमार सूर्यवंशी और उनकी टीम के खिलाफ EOW द्वारा आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। उनके ऊपर शासन से धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, दस्तावेजों की कूट रचना इत्यादि का आरोप है।
अस्पताल संचालक इस बात का फायदा उठाते हैं
उल्लेखनीय की आयुष्मान योजना के तहत भारत के निर्धन नागरिकों को 5 लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त मिलता है। वह किसी भी प्राइवेट अस्पताल में अपना इलाज करवा सकते हैं और उनके इलाज पर जो भी पैसा खर्च होता है सरकार, सीधे अस्पताल को पेमेंट कर देती है। इस प्रकार निर्धन नागरिकों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिल जाती है। एक तरफ से देखने में यह बहुत अच्छी योजना है लेकिन दूसरी तरफ इसमें भ्रष्टाचार की गजब गुंजाइश है। अस्पताल, इंफ्रास्ट्रक्चर, सुविधा, स्टाफ इत्यादि में भी काफी गड़बड़ी की जाती है। लोगों को केवल यूनिफॉर्म दिखाई देती है, सर्टिफिकेट चेक करना पब्लिक को नहीं आता। अस्पताल संचालक इस बात का फायदा उठाते हैं। सृष्टि अस्पताल वाले सूर्यवंशी साहब भी शायद ऐसा ही कुछ कर रहे थे। फिर किसी ने शिकायत कर दी।
45 कर्मचारियों के पास सिर्फ एक मोबाइल?
EOW के अनुसार जांच में पाया गया है कि, अस्पताल के पास प्रशिक्षित स्टाफ ही नहीं था। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के अलावा पैथोलॉजिस्ट भी नहीं था। 15 कर्मचारियों के नाम 45 जगह दर्ज कर दिए थे। कर सबके नाम के आगे एक ही मोबाइल नंबर लिखा था और यह मोबाइल नंबर श्री राजकुमार सूर्यवंशी के नाम पर है।
महिला पैथोलॉजिस्ट को ही नहीं पता उसके नाम पर क्या हो गया
सूची में जिस महिला पैथोलॉजिस्ट का नाम चार बार दर्ज है, वह एक मेडिकल कॉलेज में नौकरी करती हैं। उन्होंने जांच में बताया कि वह इस अस्पताल में कभी काम पर नहीं किया, न कोई दस्तावेज दिया और न नाम के उपयोग की सहमति दी। अस्पताल ने अपने डिपार्टमेंट ऑफ पैथोलॉजी के नाम से जांच रिपोर्ट जारी की, जिन पर एक एमडी पैथोलॉजिस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और सील लगी थी। महिला पैथोलॉजिस्ट ने जांच में बताया कि रिपोर्टों पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इस फर्जी हस्ताक्षर वाली कई रिपोर्टें उन मरीजों की हैं जिनका इलाज आयुष्मान योजना के तहत दिखाया गया।
राजकुमार सूर्यवंशी सृष्टि हॉस्पिटल वालों के खिलाफ किन धाराओं में मामला
- धारा 318-4: संपत्ति सौंपने के लिए बेईमानी से उकसाना - सजा 7 साल जेल।
- धारा 336-3: धोखाधड़ी के इरादे से किया गया जालसाज़ी का काम - सजा 7 साल जेल।
- धारा 340-2: जाली दस्तावेज/इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली बताकर इस्तेमाल करना - सजा 7 साल जेल।
- धारा 61-2: अपराध के लिए षड्यंत्र करना। इसमें जिस प्रकार का अपराध किया जाता है उसके अनुसार सदा का निर्धारण न्यायालय द्वारा किया जाता है।
स्पेशल नोट: यहां ध्यान देना जरूरी है कि भारतीय न्याय संहिता 2023 के अनुसार अपराध में शामिल सभी लोगों को बराबर का भागीदार माना जाता है। मतलब यदि यह सब राज में किसी व्यक्ति ने फर्जी डॉक्यूमेंट की फोटोकॉपी भी करवाई है, तो वह भी उतना ही बड़ा अपराधी है, जितना कि अपराध की साजिश रचना वाला और अपराध से फायदा उठाने वाला। ---- समाप्त ----

