भोपाल, 11 अक्टूबर 2026: मध्यप्रदेश की कर्मचारी हितैषी मोहन सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार इन दिनों एक के बाद एक कर्मचारी विरोधी आदेश जारी करवा रहे हैं। यह आरोप मध्यप्रदेश शासकीय महाविद्यालयीन (उच्च शिक्षा) जनभागीदारी कर्मचारी संघ द्वारा लगाया है।
कर्मचारी विरोधी केविएट दाखिल करवा रहे हैं
जनभागीदारी कर्मचारी संघ ने बताया कि, 30 सितम्बर 2026 को आयुक्त उच्च शिक्षा ने आदेश जारी कर समस्त क्षेत्रीय अतरिक्त संचालकों को सुप्रीम कोर्ट में शासकीय महाविद्यालयों में जनभागीदारी सहित अन्य निधियों से वेतन पाने वाले 13 दैनिक वेतन भोगियों के विरुद्ध केविएट दायर करने आदेश जारी किए हैं। तथा 6 अक्टूबर 2026 को पुनः एक और आदेश जारी कर शासकीय महाविद्यालयों में जनभागीदारी सहित अन्य निधियों से वेतन पाने वाले दैनिक वेतन भोगियों को स्थाई कर्मी का लाभ नहीं दिए जाने हेतु रिट अपील क्रमांक 1674/2026 में पारित आदेश के संबंध में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में केविएट दायर करने के निर्देश जारी किए हैं।
डॉ. मोहन यादव ने जारी कराए थे स्थाई कर्मी करने के आदेश
जनभागीदारी कर्मचारी संघ के अनुसार शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रहे डॉ. मोहन यादव ने शासकीय महाविद्यालयों में जनभागीदारी सहित अन्य निधियों से वेतन पाने वाले दैनिक वेतन भोगियों को स्थाई कर्मी योजना से लाभान्वित करने के आदेश 9 मई 2023 एवं 5 अक्टूबर 2023 को सामान्य प्रशासन विभाग से 2 बार अभिमत लिए जाने के उपरांत तत्कालीन अपर मुख्य सचिव एवं आयुक्त के अनुमोदन उपरांत आदेश जारी किये गये थे। डॉ मोहन यादव ने कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों को अपने सोशल मीडिया के माध्यम से स्थाई कर्मी आदेश जारी करने की बधाई भी दी गईं थी।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने डॉ मोहन यादव के आदेश निरस्त किए
जनभागीदारी कर्मचारी संघ का कहना है कि, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के अनुमोदन उपरांत उच्च शिक्षा विभाग भोपाल ने 24 अक्टूबर 2025 को 2 वर्ष बाद स्थाई कर्मी योजना से लाभान्वित करने के आदेश 9 मई 2023 एवं 5 अक्टूबर 2023 को निरस्त कर दिए।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने आदेश निरस्त किया
जनभागीदारी कर्मचारी संघ का कहना है कि, मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ग्वालियर की समन्वय पीठ ने उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय के 24 अक्टूबर 2025 के आदेश को निरस्त कर शासकीय महाविद्यालयों में जनभागीदारी सहित अन्य निधियों से वेतन पाने वाले दैनिक वेतन भोगियों को स्थाई कर्मी योजना से लाभान्वित करने के आदेश 9 मई 2023 एवं 5 अक्टूबर 2023 को पुनः प्रभावी कर दिया है।
क्या है मध्यप्रदेश सरकार की स्थाई कर्मी योजना
तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट के रामनरेश रावत विरूद्ध अश्विनी राय एवं अन्य मामले में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से हलफनामा प्रस्तुत कर मध्यप्रदेश के ऐसे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को जो नियमितिकरण से वंचित हैं ऐसे दैनिक वेतन भोगियों को 1 सितंबर 2016 तक बिना किसी नियुक्ति प्रिक्रिया, बिना किसी स्वीकृत पद के श्रमायुक्त द्वारा जारी न्यूनतम मजदूरी से बेहतर मजदूरी देने के उद्देश्य स्थाई कर्मी योजना लागू की गई थी।
आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा को नहीं हैं स्थाई कर्मी योजना की जानकारी
जनभागीदारी कर्मचारी संघ का कहना है कि, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा के कार्यालय से हाईकोर्ट में कर्मचारियों के विरुद्ध में प्रस्तुत करने हेतु बिंदु जारी किए गए हैं जिसमें उल्लेख किया जाता है कि यह कर्मचारी स्वीकृत पद के विरुद्ध नहीं हैं तथा मजदूरी मद से कार्यरत दैनिक वेतन भोगी नहीं हैं। इसलिए इन्हें स्थाई कर्मी योजना का लाभ नहीं दिया जाए।
किंतु स्थाई कर्मी योजना में स्वीकृत पद की कोई बाध्यता नहीं है। केवल अंशकालीन, संविदा और आउटसोर्सिंग के माध्यम में नियुक्त कर्मचारियों पर यह योजना लागू नहीं है।
चूंकि स्थाई कर्मी एक योजना है ना कि नियमितिकरण।
हाई कोर्ट ने तीन याचिकाओं में स्थाई कर्मी घोषित करने के आदेश दिए
जनभागीदारी कर्मचारी संघ का कहना है कि, मध्यप्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर के मुख्य न्यायाधीश की युगलपीठ के समक्ष तीन अलग-अलग प्रकरणों में रिट अपील 1232/2023, रिट अपील 1887/2023 एवं रिट अपील 1882/2024 में शासकीय महाविद्यालयों में जनभागीदारी सहित अन्य निधियों से वेतन पाने वाले दैनिक वेतन भोगियों को स्थाई कर्मी योजना से लाभान्वित करने के अंतिम आदेश जारी किए जा चुके थे।
परन्तु मुख्य न्यायाधीश की युगलपीठ के आदेश को उच्च शिक्षा विभाग ने फिर से चुनौती दी गईं जिसमें मध्यप्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग हार गया और फैसला पुनः कर्मचारी के पक्ष में रहा।
परन्तु फिर भी उच्च शिक्षा विभाग ने हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया तो कर्मचारियों को अवमानना याचिका क्रमांक 30312/2025 दायर करनी पड़ी और हाई कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद लगभग 10 लाख के एरियर्स का भुगतान कर्मचारी को करना पड़ा।
