MPRRDA अधिकारी के ड्राइवर के घर से मिले 3.02 करोड़ लावारिस, किसी ने क्लेम नहीं किया

Updesh Awasthee
भोपाल, 17 अगस्त 2026:
मध्य प्रदेश के सागर में एक ड्राइवर के घर से मिले 3.02 करोड़ रुपए को पुलिस ने लावारिस रकम के रूप में दर्ज करके, जप्त कर लिया है। ड्राइवर ने बताया था कि, यह पैसा उनके साहब का है। जो भोपाल में रहते हैं और MP Rural Road Development Authority के बड़े अधिकारी हैं, लेकिन जब पत्रकारों ने भोपाल में अधिकारी से से पूछा तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। मतलब सबको समझ में आ रहा है लेकिन देखना यह है कि सागर पुलिस और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इन लावारिस नोटों के मालिक का पता कैसे लगती है। 

दरअसल सागर के टैक्सी ड्राइवर सौरभ अहिरवार ने सोशल मीडिया पर रिवाल्वर के साथ अपनी फोटो पोस्ट कर दी थी। पुलिस ने चेक किया तो उसके नाम से कोई लाइसेंस नहीं था। इसके बाद पुलिस ने अवैध हथियार जप्त करने के लिए सौरभ के घर की तलाशी ली। पुलिस ने सौरभ के घर दबिश देकर सर्चिंग की तो एक अलमारी मिली। परिवार के लोगों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें अलमारी में दस्तावेज रखे होने की जानकारी दी गई थी। अलमारी के दरवाजे पर टेप लगा हुआ था। जब पुलिस ने अलमारी खुलवाई तो अंदर बैग रखे मिले, जिनमें बड़ी मात्रा में नकद राशि थी। रकम इतनी ज्यादा थी कि नोटों की गिनती के लिए मशीन मंगानी पड़ी। गिनती पूरी होने के बाद पुलिस ने करीब 3.2 करोड़ रुपए जब्त किए। पुलिस ने अलमारी की चाबी के बारे में भी पूछताछ की। घर में चाबी नहीं मिली। परिवार के अनुसार नई अलमारी रिश्तेदार लेकर आए थे। उन्होंने उसमें बैग रखा और अलमारी लॉक करके चाबी अपने साथ ले गए थे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अलमारी का लॉक खुलवाया। 

पूछताछ में परिवार के लोगों ने पुलिस को बताया कि यह पैसा सौरभ के मौसा का है। उनके अनुसार रमेश अपनी पत्नी के साथ पैसा लेकर सागर आए थे और अलमारी में रखकर चले गए। परिवार के लोगों का कहना था कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि अलमारी में इतनी बड़ी रकम रखी है। हालांकि, मौसा ने रकम को अपना मानने से इनकार किया है। ऐसे में अब जांच का अहम बिंदु यही है कि रकम वास्तव में किसकी है और सौरभ के घर तक कैसे पहुंची। 

कार्रवाई के समय घर में सौरभ की दादी भी मौजूद थीं। पुलिस की पूछताछ में उन्होंने रिश्तेदार के बारे में बताया कि वे भोपाल में बड़े अधिकारी रहे हैं और रकम उनकी है। दादी शनिचरी इलाके में रहती हैं, लेकिन कार्रवाई के समय तिली स्थित घर में थीं। हालांकि, रकम को लेकर दादी के बयान और रिश्तेदार अधिकारी के इनकार के बाद मामले में रकम के वास्तविक मालिक की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। 

पीडब्ल्यूडी से रिटायर्ड इंजीनियर और संविदा पर एमपीआरआरडीए के वरिष्ठ अधिकारी ने का कहना है कि जिन लोगों ने उनका नाम लिया है, वे उनके दूर के तीन-चार पीढ़ी पुराने रिश्तेदार हैं। उन्होंने कहा कि उनके बारे में कही गई बातें निराधार हैं और जब्त हुई रकम उनकी नहीं है। उनका इस पैसे से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि उनका नाम इस मामले में क्यों लिया जा रहा है।
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