भोपाल, 23 अगस्त 2026: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS)-6 में महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स BMI (शरीर द्रव्यमान सूचकांक) प्रकाशित किया गया है। इंदौर, की महिलाओं में ओवरवेट या मोटापे का अनुपात काफी ज्यादा है। इसके अलावा भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर और रीवा की महिलाओं में भी मोटापा/ओवरवेट, सामान्य से काफी अधिक है।
मध्य प्रदेश में 15-49 वर्ष की महिलाओं में ओवरवेट/मोटापे की दर 22.2% है। जबकि इंदौर 37.8% के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद भोपाल 36.6%, होशंगाबाद 31.4%, जबलपुर 29.6% और रीवा 29.3% हैं। मतलब उपरोक्त पांचो जिलों की महिलाएं, मध्य प्रदेश की अन्य महिलाओं की तुलना में कहीं ज्यादा मोटापा/ओवरवेट का शिकार हैं। मध्य प्रदेश शासन के स्वास्थ्य विभाग के लिए यह चैलेंज है कि, सामान्य से अधिक ओवरवेट/ मोटापा वाले जिलों में इसके कारण का पता करें और इससे पहले की स्थिति गंभीर हो जाए, उसको नियंत्रण में लिया जाए।
इंदौर की हालत सबसे गंभीर
इस मामले में इंदौर की हालत काफी गंभीर है। पिछले साल राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS)-5 में इंदौर की महिलाओं में ओवरवेट/मोटापा 19% था और लेटेस्ट रिपोर्ट NFHS-6 में बढ़कर 37.8% हो गया है। यह महिलाओं के मोटापे में केवल वृद्धि नहीं है बल्कि खतरनाक वृद्धि है। यदि तत्काल कोई एक्शन नहीं लिया तो हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे और यह बात इंदौर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
महिलाओं को मोटापा/ओवरवेट से क्या नुकसान होता है
भोपाल की फेमस वेट-मैनेजमेंट कंसल्टेंट डॉ. पूजा सिंह का कहना है कि मोटापा कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ाता है, खासकर महिलाओं में प्रजनन और हार्मोनल कारणों से कुछ समस्याएँ अधिक होती हैं।
मेटाबॉलिक और हृदय संबंधी रोग: टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक, फैटी लिवर। पेट का मोटापा (abdominal obesity, कमर का घेरा >80 सेमी) विशेष रूप से खतरनाक है।
प्रजनन स्वास्थ्य: अनियमित मासिक धर्म, PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम), बांझपन, गर्भावस्था में जेस्टेशनल डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर/प्री-एक्लेम्पसिया, गर्भपात, स्टिलबर्थ, सी-सेक्शन का जोखिम बढ़ना।
अन्य समस्याएँ: स्तन और गर्भाशय के कैंसर का जोखिम, जोड़ों का दर्द, यूरिनरी इनकंटिनेंस, स्लीप एपनिया, थकान और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ (डिप्रेशन, तनाव)।
दीर्घकाल में जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है और कई पुरानी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
महिलाओं में मोटापा/ओवरवेट का कारण क्या हो सकता है
डॉ. पूजा सिंह के अनुसार महिलाओं में मोटापा/ओवरवेट आमतौर पर कई कारकों का मिश्रण होता है:
खान-पान: ज्यादा कैलोरी, रिफाइंड अनाज, प्रोसेस्ड/अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, शुगर और फैट युक्त आहार; प्रोटीन और फाइबर की कमी। घर में महिलाओं को अक्सर कम प्रोटीन मिलना भी एक कारण बताया जाता है।
शारीरिक गतिविधि की कमी: बैठे-बैठे काम, कम व्यायाम, घरेलू जिम्मेदारियों के कारण समय की कमी।
हार्मोनल कारण: PCOS, थायरॉइड (हाइपोथायरॉइडिज्म), गर्भावस्था के बाद वजन न घटना, रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के बाद एस्ट्रोजन में कमी से पेट के आसपास चर्बी बढ़ना।
अन्य: जेनेटिक्स/पारिवारिक इतिहास, क्रोनिक स्ट्रेस (कॉर्टिसोल बढ़ना), कम नींद, कुछ दवाएँ, शहरी जीवनशैली और आर्थिक स्थिति (शहरी/अमीर वर्ग में अधिक)।
मोटापा/ओवरवेट से बचने के लिए महिलाओं को क्या करना चाहिए
माइक्रोबायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी में एकेडमिक बैकग्राउंड रखने वाली डॉ. सिंह ने नैनोबायोटेक्नोलॉजी में PhD की है। बायोलॉजिकल और मेटाबोलिक प्रक्रियाओं की उनकी वैज्ञानिक समझ ही वेट-मैनेजमेंट के प्रति उनके नज़रिए का आधार है। वेट-मैनेजमेंट की एक स्पेशलाइज़्ड प्रैक्टिस वेटवंडर (Weightwonder) की को-फ़ाउंडर हैं। अपने एक्सपीरियंस के आधार पर डॉक्टर पूजा का कहना है कि, बचाव और नियंत्रण मुख्य रूप से जीवनशैली में बदलाव से संभव है। स्पेशलिस्ट की सलाह लेकर व्यक्तिगत योजना बनाएँ:
संतुलित आहार: सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज, दालें, प्रोटीन (दाल, दूध/दही, अंडा, मछली/चिकन अगर खाते हों) बढ़ाएँ। प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय, ज्यादा तेल/चीनी कम करें। पोर्शन कंट्रोल रखें; जरूरत अनुसार 1200-1500 कैलोरी (व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार) का लक्ष्य रख सकते हैं। फाइबर 25-40 ग्राम/दिन लें।
नियमित व्यायाम: सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम व्यायाम (तेज चलना, योग, साइक्लिंग) + सप्ताह में 2-3 बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (मसल मास बनाए रखने के लिए)।
रोजाना 30-45 मिनट गतिविधि लक्ष्य रखें। घरेलू कामों को भी सक्रिय बनाएँ।
अन्य आदतें: अच्छी नींद (7-8 घंटे), तनाव प्रबंधन (मेडिटेशन, योग)।
वजन, कमर का घेरा और ब्लड शुगर नियमित मॉनिटर करें।
गर्भावस्था से पहले और बाद में वजन नियंत्रित रखें।
शराब/स्मोकिंग से बचें।
महत्वपूर्ण सलाह: यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह नहीं। यदि ओवरवेट हैं या कोई लक्षण हैं तो वेट-मैनेजमेंट कंसल्टेंट, स्पेशलिस्ट डॉक्टर अथवा गायनेकोलॉजिस्ट से जाँच करवाएँ। PCOS या थायरॉइड जैसी स्थितियों में बिना किसी सलाह के अपने शरीर पर किया गया प्रयोग खतरनाक हो सकता है। छोटे-छोटे स्थायी बदलाव लंबे समय में बेहतर परिणाम देते हैं। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर जोखिम काफी कम किया जा सकता है।


