MP लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में पदोन्नति में बड़ी लापरवाही: कर्मचारी आक्रोशित

Updesh Awasthee
भोपाल, 3 अगस्त 2026:
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के विद्युत यांत्रिकी संकाय में पदोन्नति को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। राज्य सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, प्रशासनिक लापरवाही के कारण तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के सैकड़ों कर्मचारी पदोन्नति के लाभ से वंचित हैं। ताजा घटनाक्रम में, मुख्य अभियंता एल.एन. मालवीया पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने अधीनस्थ कर्मचारियों के गोपनीय प्रतिवेदन (CR) अनावश्यक रूप से रोक कर रखे और समय पर छानबीन समिति को उपलब्ध नहीं कराए। 

प्रशासनिक लापरवाही और पदोन्नति में भेदभाव 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभाग के प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों (मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री और सहायक यंत्री) की पदोन्नति के आदेश शासन द्वारा पिछले माह ही जारी किए जा चुके हैं। इसके उलट, निचले पदधारी जैसे उपयंत्री, सहायक ग्रेड-2, और अन्य तकनीकी व गैर-तकनीकी संवर्गों के कर्मचारी अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। 

राज्य शासकीय कर्मचारी अधिकार संरक्षण संघ के जिला अध्यक्ष प्रणब खरे और अन्य पदाधिकारियों का आरोप है कि मुख्य अभियंता मालवीया ने लापरवाही बरतते हुए प्रभार सौंपकर लंबी छुट्टी पर चले गए, जिससे पदोन्नति प्रक्रिया बाधित हुई।

30 जुलाई को आनन-फानन में भेजी गई फाइलें 

छानबीन चयन समिति की कार्यवाही की अवधि समाप्त होने के बाद, विभाग ने आनन-फानन में कदम उठाए हैं। मुख्य अभियंता के प्रभार में कार्यरत अधीक्षण यंत्री भारत भूषण चौधरी द्वारा 30 जुलाई 2026 को लगभग 273 गोपनीय प्रतिवेदन प्रमुख अभियंता कार्यालय को भेजे गए हैं। इन पत्रों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिवेदन भेजे गए हैं:
  • जबलपुर क्षेत्र: सबसे अधिक 102 गोपनीय प्रतिवेदन।
  • इंदौर क्षेत्र: 41 प्रतिवेदन।
  • ग्वालियर क्षेत्र: 38 प्रतिवेदन।
  • भोपाल क्षेत्र: 35 प्रतिवेदन।
  • उज्जैन क्षेत्र: 30 प्रतिवेदन।
  • रीवा क्षेत्र: 27 प्रतिवेदन।
इन प्रतिवेदनों में वर्ष 2017-18 और 2018-19 तक के पुराने रिकॉर्ड शामिल हैं, जो अब तक लंबित रखे गए थे।
कर्मचारी संगठनों की मांग कर्मचारी संगठन ने इस पूरे मामले को लेकर विभाग के प्रमुख सचिव सचिन सिन्हा और प्रमुख अभियंता संजय कुमार अंधमान से हस्तक्षेप की मांग की है। 

उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
शासनादेशों की अवहेलना करने और सी.आर. रोकने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए हर छह महीने में 'शून्य लंबित प्रतिवेदन' का प्रमाण-पत्र अनिवार्य किया जाए।
शेष बचे कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया तत्काल पूरी की जाए। 

वर्तमान में, विभाग के भीतर इस प्रशासनिक विफलता को लेकर कर्मचारियों में व्यापक रोष और असंतोष व्याप्त है।

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!