भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में सोशल मीडिया पर अफवाह और गलत जानकारी फैलाने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई के प्रावधान किए गए हैं। नए कानून में "इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों" को विशेष रूप से शामिल किया गया है ताकि साइबर अपराधों और डिजिटल अफवाहों पर प्रभावी लगाम लगाई जा सके। इसके मुख्य प्रावधान और सजा का विवरण नीचे दिया गया है:
1. सार्वजनिक शरारत के लिए वक्तव्य (धारा 353)
यह सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने के विरुद्ध सबसे प्रमुख धारा है। इसके तहत निम्नलिखित कृत्य अपराध माने जाते हैं:
सार्वजनिक शांति भंग करना: यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ऐसी झूठी जानकारी, अफवाह या रिपोर्ट प्रकाशित या प्रसारित करता है, जिससे जनता में भय या अलार्म पैदा हो और लोग राज्य या सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध करने के लिए प्रेरित हों।
समूहों के बीच शत्रुता पैदा करना: धारा 353(2) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ऐसी अफवाह या 'अलार्मिंग न्यूज़' फैलाता है जिससे धर्म, जाति या भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच घृणा या वैमनस्य पैदा हो।
सजा: इन अपराधों के लिए तीन वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
अपवाद: यदि किसी व्यक्ति के पास यह विश्वास करने का उचित आधार है कि वह जानकारी सच है और उसने उसे नेक नीयती (good faith) से साझा किया है, तो वह इस धारा के तहत अपराधी नहीं माना जाएगा।
2. राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता को खतरा (धारा 197)
नए कानून में एक महत्वपूर्ण उप-धारा 197(1)(d) जोड़ी गई है, जो विशेष रूप से भ्रामक सूचनाओं से संबंधित है:
अपराध: यदि कोई व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ऐसी गलत या भ्रामक जानकारी साझा करता है जिससे भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता या सुरक्षा खतरे में पड़ती हो।
सजा: इसके लिए तीन वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
3. आपराधिक डराना-धमकाना (धारा 351)
यदि अफवाहों के माध्यम से किसी विशिष्ट व्यक्ति की प्रतिष्ठा या शरीर को नुकसान पहुँचाने की धमकी दी जाती है:
डिजिटल माध्यम: इस धारा में अब "किसी भी माध्यम" (डिजिटल माध्यम सहित) शब्द जोड़े गए हैं।
सजा: सामान्य धमकी के लिए दो वर्ष तक की जेल या जुर्माना हो सकता है।
4. मानहानि (धारा 356)
यदि सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाह किसी की प्रतिष्ठा को गिराने के उद्देश्य से है:
प्रावधान: धारा 356(1) में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को स्पष्ट रूप से कवर किया गया है।
सजा: अपराधी को दो वर्ष तक का कारावास, जुर्माना, या सामुदायिक सेवा (Community Service) की सजा दी जा सकती है।
निष्कर्ष: भारतीय न्याय संहिता ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने को एक गंभीर श्रेणी में रखा है। विशेष रूप से धारा 353 और धारा 197 अधिकारियों को उन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने की शक्ति देती हैं जो डिजिटल माध्यमों का उपयोग समाज में अस्थिरता पैदा करने या देश की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए करते हैं। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी (पत्रकार एवं विधि सलाहकार)। Date: 3 aug 2026.

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