श्री कालिञ्जर नीलकण्ठ महादेव महात्म्य कथा - Kalinjar Neelkanth Mahadev Mahatmya Katha Story

Updesh Awasthee
आज मैं आपको उस परम पावन कथा का श्रवण कराता हूँ, जो कालिंजर के अधिष्ठाता देवता नीलकंठ महादेव की है, जो प्राचीन काल से ही भक्तों के लिए सिद्धपीठ रहा है। इस पावन क्षेत्र का वर्णन पुराणों में भी मिलता है, जिसे नववीं शताब्दी से भी प्राचीन और समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला स्थल माना गया है। यह स्थान केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि एक ऐसा सिद्धपीठ है जहाँ स्वयं भगवान शिव ने 'काल' (मृत्यु) पर विजय प्राप्त की थी, इसी कारण इसे 'कालिंजर' (अर्थात् काल को जर्जर करने वाला) कहा जाता है। इस कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य के दुःख, दारिद्र्य और अकाल मृत्यु का भय मिट जाता है। जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करेगा, वह अंत में शिवलोक को प्राप्त होगा। आइए, अब श्रद्धापूर्वक प्रथम अध्याय का श्रवण करते हैं। 

प्रथम अध्याय
हे श्रद्धालुओ! प्राचीन काल की एक अत्यंत पावन कथा सुनाता हूँ, जो काल के भय को हरने वाली है। सत्ययुग में जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया, तब उसमें से भयंकर 'कालकूट' विष प्रकट हुआ। उस विष की ज्वाला से चराचर जगत जलने लगा। तब समस्त देवों की प्रार्थना पर करुणासागर भगवान शिव ने उस विष को पी लिया। विष के प्रभाव से महादेव का कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। 

विष की तीव्र जलन को शांत करने के लिए महादेव विंध्याचल की श्रेणियों में स्थित इस रमणीक पर्वत पर पधारे। यहाँ उन्होंने कठिन तपस्या और योग साधना द्वारा उस विष के प्रभाव को जर्जर (नष्ट) कर दिया। विष पर विजय पाने और मृत्यु (काल) को जीतने के कारण ही, महादेव का नाम महाकाल और इस दिव्य पर्वत का नाम 'कालिंजर' (काल को जीतने वाला) पड़ा। जो भक्त इस कथा को सुनता है, वह अकाल मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है।
॥इति श्री नीलकंठ महादेव कथायां प्रथमोध्यायः॥

द्वितीय अध्याय: 
हे शिव भक्त! अब इस परम सिद्धपीठ के मंदिर की महिमा सुनो। कालिंजर के अभेद्य किले के पश्चिमी भाग में, एक विशाल चट्टान को काटकर महादेव का दिव्य मंदिर बनाया गया है। इस मंदिर के गर्भगृह में नीले-काले पत्थर का एक अद्भुत एकमुखी शिवलिंग स्थापित है, जिसकी ऊँचाई लगभग साढ़े चार फीट है और जिस पर सुंदर चाँदी के नेत्र सुशोभित हैं। इस शिवलिंग की सबसे बड़ी महिमा यह है कि यहाँ स्वयं प्रकृति महादेव का अभिषेक करती है। शिवलिंग के ऊपर स्थित 'स्वर्गारोहण कुंड' से निरंतर जल की बूंदें रिसती रहती हैं, जिससे महादेव का कंठ सदैव नम रहता है। बुंदेलखंड जैसे सूखे क्षेत्र में भी यह जल स्रोत कभी नहीं सूखता, जो साक्षात ईश्वरीय चमत्कार है। जो मनुष्य इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन करता है, उसके जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं।
॥इति श्री नीलकंठ महादेव कथायां द्वितीयोध्यायः॥ 

तृतीय अध्याय
अब आगे की कथा श्रवण करो। मंदिर परिसर के समीप ही महादेव के रौद्र रूप काल भैरव की एक विशाल प्रतिमा चट्टान पर उकेरी गई है। लगभग 24 फीट ऊँची इस भव्य मूर्ति की अठारह भुजाएँ हैं और वे नरमुंडों की माला धारण किए हुए हैं। मंदिर तक जाने वाली सीढ़ियाँ भी किसी संग्रहालय से कम नहीं हैं, जहाँ मार्ग में भगवान गणेश, हनुमान और माता काली की अनेक प्राचीन मूर्तियाँ भक्तों को दर्शन देती हैं। यहाँ गुप्त काल से लेकर चंदेल काल तक की बारीक शिल्पकला देखने को मिलती है, जहाँ अप्सराएँ और गंधर्व महादेव की स्तुति करते प्रतीत होते हैं। द्वार पर गंगा और यमुना की प्रतिमाएँ भक्तों के अंतर्मन को पवित्र कर देती हैं। यह स्थान केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा और प्राचीन शिल्प का संगम है।
॥इति श्री नीलकंठ महादेव कथायां तृतीयोध्यायः॥

चतुर्थ अध्याय 
अब मैं तुम्हें इस क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता सुनाता हूँ। यद्यपि यहाँ शिव पूजा अत्यंत प्राचीन काल से प्रचलित है, किंतु चंदेल शासकों ने इस स्थान को परम वैभव प्रदान किया। राजा परमर्दिदेव (परमल) के काल में इस मंदिर का विस्तार हुआ और भव्य मंडप बनवाए गए। संवत 1201 के शिलालेखों में महादेव की स्तुति और राजाओं की अनन्य भक्ति का वर्णन मिलता है। यह किला इतना अभेद्य था कि महमूद गजनवी और शेरशाह सूरी जैसे आक्रमणकारी भी यहाँ परास्त हुए। महादेव की कृपा से यह दुर्ग सदैव धर्म का केंद्र बना रहा। यहाँ की मिट्टी का कण-कण अरबों वर्ष पुरानी भूवैज्ञानिक संरचनाओं का साक्षी है, जिसे आज संपूर्ण विश्व नमन करता है।
॥इति श्री नीलकंठ महादेव कथायां चतुर्थोध्यायः॥ 

पंचम अध्याय 
हे श्रेष्ठ जनों! अंत में इस कथा का फल सुनो। प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ पाँच दिवसीय विशाल 'कतकी मेला' लगता है, जहाँ देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुण्य लाभ लेने आते हैं। महाशिवरात्रि और सावन के मास में यहाँ जलाभिषेक का विशेष महत्व है। श्रद्धालु भक्त बांदा या खजुराहो के मार्ग से यहाँ पहुँचकर महादेव के चरणों में शीश नवाते हैं।

जो मनुष्य पूर्ण श्रद्धा के साथ कालिंजर के नीलकंठ महादेव की इस कथा का श्रवण या पठन करता है, भगवान शिव उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उसे आरोग्य, सुख-समृद्धि और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। नीलकंठ महादेव की कृपा से उसके जीवन के सारे कष्ट वैसे ही जर्जर हो जाते हैं, जैसे महादेव ने विष को किया था।
॥इति श्री नीलकंठ महादेव कथायां पंचमोध्यायः॥

आचार्योपदेशावस्थिना विरचिता कल्याणकारिणी
श्रीकालिञ्जरनीलकण्ठमहादेवस्य महात्म्यकथा सम्पूर्णा॥
॥बोलिए नीलकंठ महादेव की जय!॥

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