जबलपुर, 3 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 'हमारे शिक्षक' मोबाइल ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की अनिवार्यता और इसे वेतन से जोड़ने के राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में बताया गया है कि मोबाइल एप्लीकेशन के डाटा के आधार पर किसी कर्मचारी का वेतन रोकना या उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करना, अथवा सस्पेंड कर देना, अथवा उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करवा देना अनुचित है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला जस्टिस विशाल धागत की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। याचिकाकर्ता रामाधार द्विवेदी और अन्य ने राज्य सरकार द्वारा 20 जून 2025 को जारी किए गए उस परिपत्र (Circular) को चुनौती दी है, जिसमें शिक्षकों के लिए केवल 'हमारे शिक्षक' ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्री वासु जैन ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से सरकारी अधिवक्ता सुश्री स्वाति असीम जॉर्ज उपस्थित हुईं।
शिक्षकों की मुख्य आपत्तियाँ और मांगें
याचिका में अदालत से निम्नलिखित राहत प्रदान करने का आग्रह किया गया है:
वेतन और उपस्थिति का संबंध: याचिकाकर्ताओं ने 20.06.2025 के उस विवादित परिपत्र और उसके बाद के आदेशों को रद्द करने की मांग की है, जो ऐप के माध्यम से हाजिरी न लगाने पर वेतन रोकने या अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश देते हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग: जब तक स्कूलों में पर्याप्त बुनियादी ढांचा, उचित प्रशिक्षण और वैधानिक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित नहीं हो जाते, तब तक शिक्षकों को पारंपरिक/मैनुअल रजिस्टर के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव: याचिका में सरकार को स्कूलों में बायोमेट्रिक डिवाइस जैसे आधिकारिक बुनियादी ढांचे उपलब्ध कराने और शिक्षकों को प्रशिक्षण देने का निर्देश देने की मांग की गई है।
विशिष्ट श्रेणी के शिक्षकों के लिए छूट: उम्र, विकलांगता या इंटरनेट और संगत उपकरणों (Compatible devices) की कमी के कारण ऐप का उपयोग करने में असमर्थ शिक्षकों के लिए वैकल्पिक तंत्र विकसित करने की मांग की गई है।
डेटा गोपनीयता और सुरक्षा: शिक्षकों ने ऐप के उपयोग के दौरान अपनी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है और अदालत से सरकार को एक मजबूत गोपनीयता और डेटा सुरक्षा ढांचा तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।
भविष्य की कार्रवाई
याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केवल ऐप पर हाजिरी दर्ज न करने के आधार पर शिक्षकों का वेतन रोकना या उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करना अनुचित है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उच्च न्यायालय डिजिटल उपस्थिति की इस अनिवार्यता और शिक्षकों द्वारा उठाई गई व्यवहारिक समस्याओं के बीच कैसे संतुलन बनाता है।

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