दुकानदारों ने भोपाल बंद की चेतावनी दी, सड़कें जाम करेंगे और सीएम हाउस का घेराव करेंगे

Updesh Awasthee
भोपाल, 19 अगस्त 2026
: देशभर में बदलाव का दौर शुरू हो गया है। एक बार फिर लोग आंदोलन के लिए एकजुट होने लगे हैं। भोपाल के रेजिडेंशियल इलाकों में दुकान, शोरूम, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल यहां तक कि बड़े-बड़े अस्पतालों का संचालन करने वालों ने एकजुट और चेतावनी दी है कि यदि, उनकी प्रॉब्लम सॉल्व नहीं हुई तो वह भोपाल का बाजार बंद कर देंगे। सड़कें जाम कर देंगे और सीएम हाउस का घेराव करेंगे। 

सुप्रीम कोर्ट की सीलिंग से प्रभावित दुकानदारों ने रोशनपुरा चौराहे पर प्रदर्शन किया। व्यापारी हर रोज प्रदर्शन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि रेजिडेंशियल इलाकों में, व्यापारिक गतिविधियां नहीं चलाई जा सकती। इनको तत्काल बंद किया जाए। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि, ‘सरकार को 3 ऑप्शन देते हैं। पहला- मास्टर प्लान लागू करें, दूसरा- गुजरात की तर्ज पर मिक्स लैंड यूज लागू करें और तीसरा- निगम की सीलिंग की कार्रवाई रोके। यदि ऐसा नहीं किया तो भोपाल को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर देंगे। सड़कें जाम करेंगे और सीएम हाउस का घेराव करेंगे।’

10 नंबर मार्केट व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष आनंद सोनी ने कहा कि सरकार लाखों लोगों को बेरोजगार कर रही हैं। वर्ष 2005 से पेंडिंग मास्टर प्लान यदि पहले ही लागू हो जाता तो आज यह हालात नहीं बनते। भोपाल में व्यापारियों पर कार्रवाई हुई तो 90% व्यापार ही बंद हो जाएगा। जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।हाउसिंग बोर्ड के कारोबारी राहुल जैन ने बताया कि निगम के नोटिस आ रहे। इससे चिंता बढ़ गई हैं। दुकानदार पहले ही कर्जे में है। सरकार ने ही बिजली के कमर्शियल मीटर लगाए, दुकान की रजिस्ट्री की, नगर निगम को सारे टैक्स दे रहे तो फिर यह कार्रवाई क्यों? ऐसा हुआ तो बच्चों की स्कूल फीस कैसे भरेंगे? हम तो बेरोजगार हो जाएंगे।

मास्टर प्लान नहीं आना सरकार की विफलता

सीनियर एडवोकेट एहतेशाम कुरैशी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने रहवासी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी को लेकर आदेश दिया है। साल 2024 और 2025 में जजमेंट आया था। इसके बाद तमिलनाडु में याचिका लगी, जिसमें मध्य प्रदेश भी पार्टी है। याचिका में नगर निगम ने तथ्यों के साथ बताया है। शपथ पत्र में ही कहा है कि 2005 से मास्टर प्लान नहीं आया है। कुरैशी का कहना है कि भोपाल में मास्टर प्लान सरकार को लाना है। चीफ सेक्रेटरी को हाईकोर्ट में पक्ष रखना था। मुख्यमंत्री को सलाह देना थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यदि सरकार अपनी पक्ष मजबूती से रखती तो आज ये हालात नहीं बनते। राज्य सरकार चाहे तो वर्तमान की गतिविधियों को नियमित कर सकती है। भोपाल मास्टर प्लान और मिक्स लैंड यूज लागू कर सकती है।

पहली बार ब्यूटिशियन भी सड़क पर

निगम उन कारोबारियों को नोटिस दे रहा है, जिन्होंने रहवासी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी कर रखी है। इनमें ब्यूटी पार्लर और सैलून भी शामिल हैं। इसके चलते पहली बार ब्यूटिशियन भी सड़क पर उतर आई हैं। ब्यूटिनिशयन नित्या ने बताया कि कमर्शियल गतिविधियां बंद कराई गईं तो ब्यूटी पार्लर और ऐसे छोटे कारोबारों से जुड़े लोगों का रोजगार प्रभावित होगा। 

3 दिन की मोहलत, फिर सीलिंग की कार्रवाई

भोपाल में आवासीय भवनों के कमर्शियल उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने नोटिस दे रहा है। मंगलवार को भी नोटिस दिए गए। अब तक साढ़े 7 हजार से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें नरेला और गोविंदपुरा विधानसभाओं में नोटिस की संख्या सबसे ज्यादा है।

नगर निगम के मुताबिक, कुल नोटिस में से 3 दिन में अधिभोग उल्लंघन की अवधि समाप्त होने वाले करीब एक हजार नोटिस शामिल हैं। उपायुक्त भुवन गुप्ता ने बताया कि अब निगम आगे की कार्रवाई करेगी। जिसमें अधिभोग उल्लंघन के मामलों में गुण-दोष पर परिक्षण करते हुए अंतिम आदेश पारित किया जाएगा और संबंधितों को सूचित करेंगे। उन्हें अधिभोग उल्लंघन बंद करने के लिए अंतिम सूचना पत्र जारी किए जाएंगे। सुनवाई के बाद फाइनल ऑर्डर होगा और फिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होगी।

62 हजार से ज्यादा प्रॉपर्टी लिस्टेड

निगम के मुताबिक, 62 हजार से ज्यादा ऐसी प्रॉपर्टी लिस्टेड की गई है, जो रहवासी इलाके में हैं और कारोबार हो रहा है। 5 अगस्त से पहले तक 1018 रहवासियों को नोटिस दिए थे। सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद निगम ने सर्वे का दायरा बढ़ाया और पूरे शहर में सर्वे शुरू किया। 5 से 12 अगस्त तक 1163, जबकि 13 अगस्त को 1135 नोटिस और दिए गए। 14 अगस्त को 1478 नोटिस और दिए गए। 16 अगस्त तक नरेला विधानसभा में 1470, हुजूर विधानसभा में 1032, गोविंदपुरा विधान सभा में 1250, मध्य विधानसभा में 1093, उतर विधानसभा में 371 और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में 652 नोटिए दिए जा चुके हैं।

अब तक 7158 नोटिस

आवासीय भवनों के कमर्शियल उपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने शहरभर में सर्वे और नोटिस की कार्रवाई तेज कर दी है। अब तक 7158 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। साेमवार तक 6589 नोटिस दिए गए थे। मंगलवार को 569 नोटिस दिए गए हैं।

कारोबारियों में दहशत

नए सर्वे में भवन से जुड़े दूसरे उल्लंघनों की भी जांच की जा रही है। अर्बन प्लानिंग के विशेषज्ञों के मुताबिक यदि समय पर मास्टर प्लान आता तो रहवासियों और कारोबारियों के सामने यह स्थिति नहीं खड़ी होती। रहवासी और व्यावसायिक इलाके अलग-अलग चिह्नित बनाए जाते।

सख्ती के बाद शहर के उन इलाकों के कारोबारियों में दहशत है, जो रहवासी इमारतों में दुकानें चला रहे हैं। अवधपुरी, अयोध्या बायपास, गौतम नगर, अशोका गार्डन, लालघाटी समेत जैसे इलाकों में दुकानदार नोटिस के बाद कमर्शियल इलाकों में दुकानें तलाश रहे हैं। यही कारण है कि नाराज व्यापारी सड़क पर प्रदर्शन करने को उतर गए।

अनुमति के विपरीत निर्माण व कारोबार की जांच

संपत्ति कर रिकॉर्ड के आधार पर 62 हजार 500 संपत्तियां चिन्हित हुई हैं। हालांकि, नोटिस देने का आंकड़ा 1 लाख तक पहुंच सकता है, क्योंकि गली-मोहल्लों में भी दुकानें खुल गई हैं।

मुख्य मार्गों से सर्वे, नदी-तालाब किनारे भी जांच

निगम ने मुख्य मार्गों के दोनों ओर और उनसे जुड़ी गलियों में सर्वे शुरू किया है। नदी-तालाब किनारे, ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और कैचमेंट एरिया में बने भवन प्राथमिकता से जांचे जाएंगे। अवैध मैरिज गार्डन को भी नोटिस दिए जाएंगे।

भोपाल का पिछला मास्टर प्लान 1995 में आया था। 2005 में नया प्लान आना था, जिसमें आबादी, रोजगार केंद्र और आवासीय-व्यावसायिक जरूरतों के आधार पर शहर के विस्तार की दिशा तय होती। लेकिन नया प्लान नहीं आया और शहर का फैलाव जरूरत के हिसाब से होता गया।

नर्मदापुरम रोड से भोजपुर रोड, कोलार, नीलबड़-रातीबड़ और रायसेन रोड तक बसाहट बढ़ती गई। नतीजा यह रहा कि कई जगह पहले कॉलोनियां बसीं और बाद में सड़क, पानी-सीवर जैसी सुविधाएं पहुंचीं। यही विस्तार अब ‘तीसरे भोपाल’ के रूप में सामने है।
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