भोपाल, 19 अगस्त 2026: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार " शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अयोग्य" सरकारी शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। नोटिफिकेशन और रूल बुक जारी हो चुकी है। शिक्षकों का कहना है कि वह परीक्षा देने के लिए तैयार है लेकिन उनकी कुछ शर्ते हैं। उनकी परीक्षा फीस माफ की जानी चाहिए, ऑनलाइन नहीं ऑफलाइन परीक्षा होनी चाहिए, मतदान के दिन की तरह परीक्षा के दिन उन्होंने अवकाश दिया जाना चाहिए और दूर दराज के जिन शिक्षकों को परीक्षा देने के लिए परीक्षा केंद्र तक आना पड़ेगा, उनको यात्रा भत्ता भी दिया जाना चाहिए।
MPESB वाले शिक्षकों की फीस से 15 करोड़ कमाएंगे
कर्मचारी चयन मंडल ने परीक्षा के लिए 1000 रुपए शुल्क तय किया है। प्रदेश में करीब 1.50 लाख शिक्षक इसके दायरे में आने का अनुमान है। ऐसे में केवल परीक्षा शुल्क से करीब 15 करोड़ रुपए जमा होंगे। शिक्षक संगठनों का दावा है कि परीक्षा के आयोजन पर इससे काफी कम राशि खर्च होगी। शिक्षक संगठनों ने 1000 रुपए शुल्क का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि ये शिक्षक नई नियुक्ति के लिए परीक्षा नहीं दे रहे हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में सेवा में बने रहने के लिए पात्रता परीक्षा दे रहे हैं। शिक्षक संगठनों के नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर अपील की जा रही है कि, वह इस बारे में मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मिलने जा रहे हैं, तब तक कोई भी एप्लीकेशन फॉर्म ना भरे।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मध्य प्रदेश में वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक अयोग्य घोषित कर दिए गए थे। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे शिक्षकों की सेवा समाप्त करने के स्थान पर, शिक्षक पात्रता परीक्षा के माध्यम से योग्यता धारण करने का अवसर दिया।
मध्य प्रदेश के शिक्षक 30 अगस्त को दिल्ली जाएंगे?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित देशभर के शिक्षक 30 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटने की तैयारी में हैं। सोशल मीडिया पर इसका भी कैंपेन चल रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने और शिक्षकों के हित में निर्णय लेने की मांग की जाएगी। राज्य अध्यापक संघ, शासकीय शिक्षक संगठन समेत अन्य संगठनों ने प्रदेश के शिक्षकों से दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है।
ऑनलाइन नहीं ऑफलाइन परीक्षा की मांग
शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने सेवारत शिक्षकों की टीईटी निःशुल्क कराने की मांग की है। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि यह परीक्षा शासन और शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुपालन का हिस्सा है, इसलिए इसका खर्च शिक्षकों से लेना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले सीएम राइज स्कूल, उत्कृष्ट विद्यालय और मॉडल स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षाओं का खर्च शासन ने उठाया था। ऐसे में सेवारत शिक्षकों की टीईटी के लिए शुल्क लेना समझ से परे है।

