भोपाल, 22 अगस्त 2026: झीलों की नगरी नहीं तालाब के शहर भोपाल में इन दिनों एक अजीबोगरीब मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर के कई इलाकों से 'फुटपाथ गायब' हो गए हैं। जी हां, आपने सही पढ़ा। शहर के जागरूक नागरिकों ने अब अपनी पैदल चलने की आजादी के लिए मोर्चा खोल दिया है और सीधे थाने पहुंचकर 'फुटपाथ की गुमशुदगी' की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
अरेरा कॉलोनी के लोग पुलिस थाने पहुंचे
भोपाल की अरेरा कॉलोनी के रहवासियों ने हाल ही में हबीबगंज थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय निवासी विवेक त्रिपाठी और लवनीश भाटी का सवाल सीधा और तीखा है- "जनता के टैक्स के पैसे से बना फुटपाथ आखिर गया कहां? अब जनता सड़कों पर कहां चले?"। उनका आरोप है कि भू-माफियाओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने न केवल आवासीय भूखंडों पर अवैध मॉल बना लिए हैं, बल्कि 10 नंबर मार्केट के आसपास की मुख्य सड़कों के फुटपाथों को भी अपनी निजी पार्किंग और व्यावसायिक गतिविधियों में तब्दील कर दिया है।
अफसरों पर FIR की मांग
यह संभवतः किसी स्मार्ट सिटी में अपनी तरह का पहला मामला है जहाँ रहवासियों ने केवल अतिक्रमणकारियों पर ही नहीं, बल्कि नगर निगम और PWD के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी FIR दर्ज करने की मांग की है। रहवासियों का तर्क है कि सरकारी तंत्र की मिलीभगत या आंखें मूंद लेने के बिना सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करना संभव नहीं है। उन्होंने मांग की है कि:
- पुराने नक्शों और रिकॉर्ड से फुटपाथ की वर्तमान स्थिति का मिलान किया जाए।
- लापरवाह अधिकारियों की भूमिका की आपराधिक जांच हो।
- फुटपाथों को उनके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न फैसलों (जैसे ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे नगर निगम) में स्पष्ट किया है कि फुटपाथ और सार्वजनिक सड़कें पैदल चलने वालों के लिए हैं। न्यायालय ने बार-बार कहा है कि सड़कों और फुटपाथों पर अतिक्रमण करना नागरिकों के मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21 - जीवन का अधिकार) का उल्लंघन है। हालिया निर्देशों में भी अदालतों ने स्थानीय निकायों को आदेश दिया है कि फुटपाथों को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त रखा जाए ताकि पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अब शुरू होगा बड़ा आंदोलन
भोपाल के लोग अब रुकने वाले नहीं हैं। रहवासियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही फुटपाथ खाली नहीं कराए गए, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। शहर के अस्पतालों और शॉपिंग मॉल्स द्वारा फुटपाथ को अपनी 'जागीर' समझकर पार्किंग बनाने के खिलाफ अब आम आदमी ने अपनी सुरक्षा और हक की लड़ाई शुरू कर दी है।भोपाल के इस 'फुटपाथ बचाओ' अभियान ने अब निगम प्रशासन की नींद उड़ा दी है। देखना यह है कि प्रशासन कागजी सर्वे से आगे बढ़कर क्या कोई ठोस कार्रवाई करता है या नहीं।


