ज्योतिषीय गुड न्यूज़: 1 अगस्त से सबके जीवन में शुभ संकेत, ग्लोबल ऑर्डर भी बदलेगा

Updesh Awasthee
धर्म एवं ज्योतिष न्यूज डेस्क, 1 अगस्त 2026:
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, नवंबर 2026 से जारी 'गोचर कालसर्प योग' की अवधि 1 अगस्त 2026 को समाप्त हो गई है। पिछले कई महीनों से सभी प्रमुख ग्रह राहु-केतु के बीच फंसे हुए थे, जिसने वैश्विक स्तर पर राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक मंदी की आशंकाओं, प्राकृतिक आपदाओं और युद्ध जैसी स्थितियों को बढ़ावा दिया था। 1 अगस्त को जैसे ही शुक्र ग्रह इस धुरी से बाहर निकलेंगे, यह प्रतिकूल ज्योतिषीय चक्र टूट जाएगा। हालांकि चंद्रमा इस चक्र से समय-समय पर बाहर निकलते रहते हैं पर उससे यह योग पूरी तरह भंग नहीं होता ब्लकि आंशिक रूप से प्रभावित होता है।

वैश्विक स्तर पर संभावित प्रमुख परिणाम:

राहु-केतु के प्रभाव से विश्व के प्रमुख देशों के बीच जो आक्रामक स्थिति बनी हुई थी, उसमें 1 अगस्त के बाद नरमी आने की उम्मीद है। वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता और शांति वार्ताओं के नए रास्ते खुलेंगे।

शेयर बाजार व अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में स्थिरता:

ग्रहों के बंधन से मुक्त होने के कारण शेयर बाजारों, कमोडिटीज (सोना-चांदी, क्रूड ऑयल) और मुद्रा बाजार में जो भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा था, वह धीरे-धीरे स्थिर होगा। वैश्विक निवेशकों का भरोसा बहाल होगा।

प्राकृतिक और मौसमी घटनाओं में राहत:

ग्रहों की आक्रामक युति समाप्त होने से वैश्विक स्तर पर चरम मौसमी घटनाओं (अत्यधिक बारिश, बाढ़, प्राकृतिक आपदाओं) के दबाव में कमी आएगी।

वैज्ञानिक व तकनीकी क्षेत्र में नए नवाचार:

राहु का प्रभाव हटने से विज्ञान, चिकित्सा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो रुकावटें थीं, वे दूर होंगी और नए शोध व आविष्कारों का मार्ग प्रशस्त होगा।

जनमानस में मानसिक शांति और सकारात्मकता:

वैश्विक स्तर पर आम जनता में जो अनजाना भय, तनाव और चिंता का माहौल बना हुआ था, वह छंटेगा। लोग आर्थिक और सामाजिक स्तर पर नए सिरे से प्रगति की ओर बढ़ेंगे।
ज्योतिष गणना के अनुसार 1 अगस्त 2026 का यह परिवर्तन दुनिया के लिए एक 'मोड़' (Turning Point) साबित होगा, जहां से वैश्विक शांति और आर्थिक सुधार की नई शुरुआत होगी।

कालसर्प दोष की शांति के प्रभावी उपाय 

जिन बच्चों के जन्म नवंबर से जुलाई 2026 के बीच में हुए हैं, उनमें से ज्यादातर बच्चों की कुंडली में कालसर्प दोष होगा। यदि कुंडली में कालसर्प दोष है तो उसे शांत करने के लिए निम्नलिखित वैदिक उपाय अत्यंत फलदायी माने जाते हैं:
त्र्यंबकेश्वर या शिव मंदिर में पूजन:
• नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग या किसी भी प्राचीन शिव मंदिर में योग्य पुरोहित द्वारा विधि-विधान से 'कालसर्प दोष शांति पूजा' करवाएं।
 भगवान शिव का रुद्राभिषेक:
• प्रत्येक सोमवार या अमावस्या के दिन जल में दूध, काले तिल और गंगाजल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें और 'ॐ नमः शिवाय' का निरंतर जप करें।
  महामृत्युंजय मंत्र का जाप:
• प्रतिदिन या कम से कम शनिवार को महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मंत्र राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव को नष्ट करता है।
 नाग-नागिन के जोड़े का जल प्रवाह:
• चांदी के बने छोटे नाग-नागिन के जोड़े का पूजन करके उसे बहते हुए जल (नदी) में प्रवाहित करें।
 राहु-केतु मंत्र एवं दान:
• राहु मंत्र: ॐ रां राहवे नमः
• केतु मंत्र: ॐ कें केतवे नमः
• शनिवार या अमावस्या को उड़द की दाल, काला कपड़ा, तिल या लोहे की वस्तुओं का दान जरूरतमंदों को करें।
 नागपंचमी एवं सोमवती अमावस्या पर विशेष पूजा:
• नागपंचमी या किसी भी अमावस्या तिथि पर नाग देवता का पूजन करें और राहु-केतु शांति के लिए प्रार्थना करें।
  पक्षियों व जानवरों की सेवा:
• प्रतिदिन पक्षियों को बाजरा/सप्तधान्य खिलाएं और आवारा कुत्तों को रोटी दें।

व्यक्तिगत परामर्श :
विभिन्न जातकों की कुंडलियों के विश्लेषण और अनुभवों के आधार पर यह देखा गया है कि यह योग राहु और केतु की राशि उन पर पड़ने वाले ग्रहों की दृष्टि और बल के अनुसार भी अच्छा या बुरा परिणाम देता है यदि राहु-केतु योगकारक अवस्था में है तो यह योग जातक को बहुत ऊंचाईयों पर ले जाने की क्षमता भी रखता है इसलिए किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से बचें और जातक की कुंडली का किसी विद्वान ज्योतिषी से विश्लेषण अवश्य कराएं। प्रस्तुति: श्री गीतांजलि ज्योतिष केंद्र, इंदौर।

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