भारत की सबसे प्राचीन, अज्ञात और स्वयंभू शिवलिंग: आज मैं आपको एकादश रूद्र महादेव की एक ऐसी कथा सुनाने जा रहा हूं जो आज से पहले ना तो कभी सुनी गई और ना ही कभी लिखी गई है। भारतवर्ष में एक स्थान ऐसा भी है जहां पर द्वापर युग से एकादशी रुद्रा महादेव खुले आसमान के नीचे साधना में लीन हैं। जरासंध की पुत्री के बाद उन्होंने आज तक कभी किसी की सेवा स्वीकार नहीं की है। यह कोई काल्पनिक केवदंती नहीं है बल्कि इस बात का वह साक्षात संकेत भी देते हैं:-
द्वापर युग में मगध (वर्तमान बिहार) नाम का एक राज्य हुआ करता था। यहां के राजा जरासंध ने अपने राज्य की राजधानी गिरिव्रज (वर्तमान राजगीर) को बनाया था। यह क्षेत्र पांच प्राचीन पर्वतों से घिरा हुआ था। इनमें से एक पर्वत पर एकादश रूद्र महादेव अर्थात 11 शिवलिंग स्थित है। एकादश रूद्र महादेव यहां एकांत में स्थित हैं। अपनी साधना में लीन हैं, एवं नहीं चाहते कि कोई उनकी सेवा अथवा दर्शन हेतु आकर उनकी साधना को भंग करें, लेकिन देवर्षि नारद जी वर्ष में एक बार एकादश रूद्र महादेव के दर्शन हेतु नियमित रूप से जाते थे।
द्वापर युग में देवर्षि नारद जी ने जरासंध की पुत्री धन्यावती को बेहद गोपनीय और चमत्कारी एकादश रूद्र महादेव के विषय में बताया और इस क्षेत्र की सेवा का संकेत दिया। तभी से राजा जरासंध की पुत्री धन्यवती नियमित रूप से पर्वत पर स्थापित एकादश रूद्र महादेव की सेवा के लिए जाने लगी। वह अपनी राजधानी से निकलकर पर्वत के नीचे एक प्राकृतिक जल कुंड (जिसका जल हमेशा निर्मल होता है और कभी खत्म नहीं होता- वर्तमान पातालगंगा) में स्नान किया करती थी।
धन्यवती के बाद कई राजाओं ने एकादश रूद्र महादेव की सेवा करने का प्रयास किया। भव्य मंदिर बनाने का प्रयास किया परंतु एकादश रूद्र महादेव ने कभी किसी की सेवा स्वीकार नहीं की। स्वयंभू एकादश रूद्र महादेव ने कई बार इस बात का संकेत भी दिया। जब कभी किसी ने यहां पर कोई निर्माण या व्यवस्था की स्थापना का प्रयास किया तो, रात्रि कल में उसका पूरा निर्माण ध्वस्त हो गया।
12वीं शताब्दी तक यह क्षेत्र एकादश रूद्र महादेव का जागृत स्थान रहा। सातवीं शताब्दी में मगध क्षेत्र में पाशुपत, कालामुख एवं कापालिक जैसे महान शैव मठ संचालित थे। शैव संप्रदाय के अंतर्यामी साधुओं को ज्ञात था कि, एकादश रूद्र महादेव की साधना भंग नहीं करना है इसलिए उन्होंने कभी ऐसा प्रयास नहीं किया लेकिन हमेशा उनके निकट बने रहे, एकादश रूद्र महादेव का सानिध्य प्राप्त करते रहे।
आज भी बिहार राज्य के नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के धनवा गांव के पहाड़ पर एकादश रूद्र महादेव (11 शिवलिंग) बिल्कुल वैसे ही प्राकृतिक रूप में स्थित हैं, जैसे द्वापर युग में थे। वर्ष में केवल एक बार महाशिवरात्रि के दिन लाखों शिव भक्त एकादश रूद्र महादेव के दर्शन हेतु जाते हैं। इसके अलावा पूरे वर्ष एकादश रूद्र महादेव की कोई पूजा पाठ या अभिषेक नहीं होता। © अध्ययन एवं रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी, भोपाल।

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