ज्ञान विज्ञान न्यूज डेस्क, 11 जुलाई 2026: हाल ही में बर्मिंघम विश्वविद्यालय (University of Birmingham) के भौतिकविदों ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने समय की हमारी समझ को चुनौती दे दी है। प्रोफेसर जियोवानी बैरोंटिनी (Professor Giovanni Barontini) के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में एक नन्हा क्वांटम ब्रह्मांड (miniature quantum universe) बनाया, जहाँ समय किसी बाहरी घड़ी (External Clock) के बजाय सिस्टम के भीतर होने वाले बदलावों से स्वतः ही उत्पन्न हुआ। इस शोध ने इस विचार को बल दिया है कि time emerged without a clock, यानी समय का अस्तित्व तभी शुरू होता है जब कुछ बदलता है।
Measuring time without a clock in isolated quantum systems
इस प्रयोग की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इसमें समय को मापने के लिए किसी पारंपरिक घड़ी की आवश्यकता नहीं पड़ी। वैज्ञानिकों ने लगभग 24,000 ultracold rubidium atoms का उपयोग किया, जिन्हें पूर्ण शून्य (Absolute Zero) से कुछ अरबवें हिस्से ऊपर तक ठंडा किया गया था। इन परमाणुओं को लेजर बीम की मदद से दो हिस्सों—एक 'Bright' (देखा गया) और दूसरा 'Dark' (अनदेखा)—क्षेत्रों में विभाजित किया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब परमाणु एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाते हैं, तो उनके भीतर होने वाले बदलावों से समय का अपना एक नया पैमाना विकसित होता है।
Recreating Big Bang and Big Crunch in a laboratory mini universe
प्रयोगशाला में बनाए गए इस नन्हे ब्रह्मांड के भीतर परमाणुओं की गति ने ब्रह्मांडीय घटनाओं की नकल की। जब परमाणुओं का बादल 'Bright' क्षेत्र में तेजी से फैल रहा था, तो इसे simplified version of a Big Bang कहा गया, और जब वे वापस लौटे, तो इसे 'Big Crunch' जैसा माना गया। प्रोफेसर बैरोंटिनी ने देखा कि परमाणुओं की इस आवाजाही से समय की गति भी प्रभावित हुई। जब परमाणु तेजी से बढ़ रहे थे, तो समय "तेज" (Sped up) हो गया और जब परमाणु रुक गए, तो समय भी प्रभावी रूप से रुक गया।
What is entropic time and how it creates an arrow of time
इस शोध ने "entropic time" की अवधारणा को जन्म दिया है, जो किसी सिस्टम में विकार या बिखराव (Entropy) के बदलाव से परिभाषित होता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि परमाणुओं के वितरण में होने वाले बदलाव ही "समय की दिशा" (Arrow of Time) निर्धारित करते हैं। यह प्रयोग साबित करता है कि time could create itself और यह वास्तविकता की कोई बुनियादी विशेषता नहीं है, बल्कि सिस्टम के आंतरिक संबंधों से उत्पन्न होने वाला एक भ्रम (Illusion) मात्र हो सकता है।
Testing quantum gravity and Wheeler-DeWitt equation in lab conditions
यह अध्ययन भौतिकी के एक पुराने संकट, जिसे "Problem of Time" कहा जाता है, को हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 60 साल पुरानी Wheeler-DeWitt equation यह सुझाव देती है कि ब्रह्मांड का कोई बाहरी घड़ी नहीं है और यह एक स्थिर क्वांटम अवस्था है। इस प्रयोग ने पहली बार प्रयोगशाला में नियंत्रित स्थितियों के तहत यह दिखाया कि समय बाहरी मापदंडों के बिना भी आंतरिक रूप से उत्पन्न हो सकता है। इससे वैज्ञानिकों को भविष्य में quantum gravity और ब्लैक होल जैसे जटिल विषयों को समझने में मदद मिलेगी।
Future of quantum cosmology research and simulated black holes
बर्मिंघम विश्वविद्यालय की यह टीम अब इस दृष्टिकोण को और अधिक जटिल क्वांटम प्रणालियों तक ले जाने की योजना बना रही है। इस तकनीक का उपयोग करके वैज्ञानिक अब गणितीय मॉडलों के बजाय प्रयोगशाला प्रयोगों के माध्यम से शुरुआती ब्रह्मांड (Early Universe) की भौतिकी और simulated black holes का अध्ययन कर सकेंगे। यह शोध केवल समय के अस्तित्व पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि ब्रह्मांड को देखने के हमारे नजरिए को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है।

