Flipkart के डिलीवरी बॉय ने SDM ऑफिस को जंतर मंतर समझ लिया था, सलाखों के पीछे जाना पड़ा

Updesh Awasthee
पन्ना, 25 जुलाई 2026:
आजकल हर युवा खुद को क्रांतिकारी और सरकारी अधिकारियों को अत्याचारी समझने लगा है। एसडीम ऑफिस में डिलीवरी के दौरान विवाद की स्थिति बनी तो अपने सीनियर्स को सूचित करने के स्थान पर मोबाइल निकाल कर वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दिया। बाद में वीडियो वायरल कर दिया। पुलिस ने भैया जी को पकड़कर Section 151 of the BNSS के तहत गिरफ्तार कर लिया। दरअसल Flipkart वाले भैया को इतनी नॉलेज नहीं थी कि एसडीएम का फुल फॉर्म होता है सब डिविजनल मजिस्ट्रेट और मजिस्ट्रेट के रूम में उनकी अनुमति के बिना रिकॉर्डिंग नहीं कर सकते। चलिए अपन इस पूरे मामले को एक नए नजरिए से देखते हैं और पता लगते हैं कि एक्चुअल में गलती किसकी है जिसके कारण इतना बखेड़ा खड़ा हो गया है:-

टंटे की जड़: डिलीवरी बॉय ने किसी भी प्रकार की मदद करने से मना कर दिया

तो बात कुछ ऐसी है कि एसडीएम श्री रामनिवास चौधरी ने फ्लिपकार्ट से मोबाइल के दो कवर आर्डर किए थे। Flipkart ने दो कवर के स्थान पर एक कवर की डिलीवरी कर दी। जब एसडीएम श्री रामनिवास ने यह देखा तो डिलीवरी लेने से इनकार कर दिया और अपने पैसे वापस मांगे। डिलीवरी बॉय इस बात का गवाह था कि, पैकेट में दो नहीं एक मोबाइल कवर है। ऑर्डर के हिसाब से डिलीवरी नहीं हुई है। ग्राहक के सामने वह Flipkart का प्रतिनिधि था। होना यह चाहिए था कि वह तत्काल ग्राहक को कस्टमर केयर से कनेक्ट कर देता लेकिन डिलीवरी बॉय ने ऐसा नहीं किया बल्कि बहस करने लगा। कहने लगा कि मुझे नहीं मालूम आपने क्या आर्डर किया था और क्या आया है। आपको जो भी बात करनी है कंपनी से करो। जब एसडीएम श्रीनिवास इस व्यवहार पर गुस्सा हुए तो उसने मोबाइल निकाल लिया और रिकॉर्डिंग करना शुरू कर दिया। डिलीवरी बॉय ने किसी भी प्रकार की मदद करने से मना कर दिया। बोला इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता हूं। 

₹120 नहीं वीडियो रिकॉर्डिंग के कारण गिरफ्तार किया

इसके बाद एसडीएम ऑफिस के बाहर गया और लाइव करने लगा। मजिस्ट्रेट के ऑफिस में उनकी अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की रिकॉर्डिंग करना या लाइव करना, न्यूसेंस क्रिएट करना माना जाता है। यह एक दंडात्मक अपराध है। इसके कारण डिलीवरी बॉय को पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया और भारतीय न्याय संहिता की धारा 151 के तहत शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। यदि आप वीडियो को ध्यान से देखेंगे तो श्री रामनिवास एक ग्राहक की तरह बात कर रहे थे, लेकिन डिलीवरी बॉय मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्डिंग करते हुए एक अजीब फिसल के अहंकार में था। शायद इसलिए भी क्योंकि उसको पता था, सोशल मीडिया पर उसको सपोर्ट मिलेगा और वह हीरो बन जाएगा।

गलती किसकी है: एसडीम, डिलीवरी बॉय या कंपनी?

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और एक गरीब डिलीवरी बॉय को गिरफ्तार करवाने के लिए एसडीएम के खिलाफ नेगेटिव टिप्पणी की जा रही है लेकिन एक्चुअल में यहां गलती कंपनी की है। यदि किसी ग्राहक को कोई परेशानी है तो उसकी समस्या का समाधान करना कस्टमर केयर का दायित्व है। Flipkart कंपनी को यह व्यवस्था बनानी चाहिए कि यदि कोई ग्राहक डिलीवरी बॉय से अपनी समस्या शेयर करता है तो डिलीवरी बॉय तत्काल उसको कस्टमर केयर से कनेक्ट कर दे, ताकि उसकी समस्या का समाधान हो जाए। यदि कोई भी डिलीवरी बॉय ग्राहक द्वारा आपत्ति उठाने पर उसके घर में या ऑफिस में वीडियो बनाने लग जाएगा तो इसके दो संभावित परिणाम होंगे। पहले तो ग्राहक उत्तेजित हो जाएगा और एक सामान्य समस्या, विवाद में बदल जाएगी। दूसरा लोग Flipkart से सामान खरीदना ही बंद कर देंगे।

इस वीडियो को एक केस स्टडी की तरह देखिए

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