28% दिव्यांग प्राथमिक शिक्षक की सेवा समाप्ति का आदेश हाईकोर्ट द्वारा स्थगित

Updesh Awasthee
जबलपुर, 14 जुलाई 2026:
हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश द्वारा 28% दिव्यांग प्राथमिक शिक्षक की सेवा समाप्ति के आदेश को स्थगित कर दिया गया है। मामला छतरपुर का है। नियुक्ति के समय कैंडिडेट की दिव्यांगता 51% थी लेकिन जब दोबारा मेडिकल करवाया तो 28% निकली। इसी आधार पर उनकी सेवा समाप्त कर दी गई थी। इस आदेश की पीडीएफ फाइल भोपाल समाचार के टेलीग्राम चैनल पर HC Stays Termination of 28% Disabled Primary Teacher के नाम से उपलब्ध है तत्काल डाउनलोड कर सकते हैं। मामले की पूरी कहानी इस प्रकार है

छतरपुर में दिव्यांग प्राथमिक शिक्षक सुरेंद्र पटेल का मामला

कहानी कुछ इस प्रकार है कि, सुरेंद्र पटेल पुत्र श्री ऋषि पटेल ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में दिव्यांग श्रेणी में आवेदन किया था। जब परीक्षा का रिजल्ट आया तो श्री सुरेंद्र पटेल को 108.33 अंक प्राप्त हुए। अनारक्षित श्रेणी का कट इससे कम था। मतलब मेरिट के आधार पर श्री सुरेंद्र पटेल की नियुक्ति अनारक्षित श्रेणी में होनी चाहिए थी, लेकिन डिपार्टमेंट ने उनको दिव्यांग श्रेणी में ही नियुक्ति प्रदान की। श्री सुरेंद्र पटेल ने भी दिव्यांग श्रेणी में नियुक्ति स्वीकार की और कोई आपत्ति नहीं की। नियुक्ति के समय उन्होंने दमोह मेडिकल बोर्ड का सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया जिसमें 51% दिव्यंगिता घोषित की गई थी। 

सुरेंद्र पटेल की दिव्यांगता 51% से घटकर 23% रह गई

बाद में खुलासा हुआ कि मध्य प्रदेश में कई लोगों ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करके सरकारी नौकरी प्राप्त कर ली है। बड़े पैमाने पर ऐसे मामले सामने आने के बाद, प्रशासन ने सभी दिव्यांग कैंडीडेट्स का दोबारा मेडिकल करवाने का फैसला किया। श्री सुरेंद्र कुमार पटेल का मेडिकल क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं सागर के द्वारा किया गया। सागर की रिपोर्ट में श्री सुरेंद्र पटेल की दिव्यांगता केवल 23% पाई गई। 18 जून 2026 को यह रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी गई और जिला शिक्षा अधिकारी छतरपुर में 24 जून 2026 को दिव्यांगजन अधिनियम 2016 की धारा 2 (घ) के तहत सेवा समाप्ति का नोटिस दे दिया। 

सेवा समाप्ति का नोटिस मिला तो श्रेणी सुधार की अपील कर दी

यह नोटिस मिलने के बाद श्री सुरेंद्र पटेल ने 28 जून को अपने जवाब में बताया कि उनकी नियुक्ति गलत श्रेणी में हो गई है। उनको अनारक्षित श्रेणी में नियुक्ति दी जाए, लेकिन दिनांक 2 जुलाई 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी ने श्री सुरेंद्र पटेल की सेवा समाप्त कर दी क्योंकि उनकी नियुक्ति दिव्यांग श्रेणी में हुई थी और उनकी दिव्यांगता प्रमाणित नहीं हुई। 

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किए गए सेवा समाप्ति के आदेश को प्राथमिक शिक्षक श्री सुरेंद्र पटेल द्वारा आरपीएस लॉ एसोसिएट के माध्यम से हाई कोर्ट ऑफ़ मध्य प्रदेश में पिटीशन नंबर 26135/ 2026 के माध्यम से चुनौती दी गई।

उक्त याचिका की प्रारंभिक सुनवाई जस्टिस विवेक कुमार सिंह की खंडपीठ द्वारा की गई, याचिका कर्ता की और से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं अभिलाषा सिंह लोधी द्वारा कोर्ट को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों में स्पेशल आरक्षण (होरीजोंनटल) लागू किए जाने के संबंध में न्याय दृष्टांत के माध्यम से बताया गया है कि कोई भी अभ्यर्थी जो स्पेशल /होरीजोनटल आरक्षण के तहत आवेदन करता है तथा प्रतियोगिता परिक्षा में उसके अंक/मेरिट, यदि अनारक्षित वर्ग या उसकी संबंधित केटेगिरी क्षैतिज (Vartical) आरक्षण के समतुल्य है तो उसे स्पेशल आरक्षण के तहत विज्ञापित पद के विरुद्ध नियुक्त नही किया जाएगा बल्कि उसे मेरिट के आधार पर अनारक्षित वर्ग में या उसके स्वयं की श्रेणी में ही चयनित किया जाएगा। 

High Court Stays Termination of 28% Disabled Primary Teacher

क्योंकि याचिकाकर्ता की मेरिट अनारक्षित वर्ग की कटआफ अंक के बराबर है इसलिए उसे दिव्यांग श्रेणी के स्थान पर अनारक्षित वर्ग में चयनित किया जाना चाहिए था। उक्त तर्कों को दृष्टिगत रखते हुए हाईकोर्ट द्वारा सेवा समाप्ति आदेश को निरस्त/स्टे करके याचिकाकर्ता को सेवा में वहाल कर 90 दिवस के अन्दर याचिकाकर्ता की मेरिट का परीक्षण करके श्रेणी परिवर्तित की जाए। याचिका कर्ता की और से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं अभिलाषा सिंह लोधी ने पक्ष रखा। रिपोर्ट: उपदेश अवस्थी (विधि पत्रकार एवं सलाहकार)।

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